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Mau News: कबाड़ बीनने वाले परिवारों की बदलेगी किस्मत, मिलेगा सरकारी योजनाओं का सहारा
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मऊ। कबाड़ बीनकर परिवार पालने वाले लोगों को चिह्नित कर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिला पंचायत राज विभाग ने गांव-गांव सर्वे के जरिए इन परिवारों की पहचान कर उन्हें सरकारी तंत्र से जोड़ने की पहल की है।
पंचायत सचिव वेस्ट पिकर्स का सत्यापन और प्रोफाइलिंग कर उनका ब्योरा नमस्ते एप पर दर्ज करेंगे। सहमति के बाद पंजीकरण कराने वाले पात्र लोगों को पहचान पत्र भी दिया जाएगा, ताकि उनका काम अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बन सके।
इस पहल का मकसद केवल पहचान दर्ज करना नहीं, बल्कि कबाड़ बीनने वाले परिवारों को स्थायी आजीविका का रास्ता देना भी है। लाभार्थियों के समूह बनाकर उन्हें ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर से जोड़ा जाएगा। कचरा संग्रहण वाहन खरीदने के लिए अधिकतम पांच लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी का भी प्रावधान है। इससे वर्षों से असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे परिवारों के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
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जिला पंचायत राज विभाग के निर्देश के बाद पंचायत सचिवों ने चिन्हांकन का काम शुरू कर दिया है। पहल के जरिए उन परिवारों को सरकारी सुविधाओं की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है, जो अब तक असंगठित तरीके से कबाड़ संग्रह कर जीवनयापन करते रहे हैं। इससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा के
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पंचायत सचिव वेस्ट पिकर्स का सत्यापन और प्रोफाइलिंग कर उनका ब्योरा नमस्ते एप पर दर्ज करेंगे। सहमति के बाद पंजीकरण कराने वाले पात्र लोगों को पहचान पत्र भी दिया जाएगा, ताकि उनका काम अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बन सके।
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इस पहल का मकसद केवल पहचान दर्ज करना नहीं, बल्कि कबाड़ बीनने वाले परिवारों को स्थायी आजीविका का रास्ता देना भी है। लाभार्थियों के समूह बनाकर उन्हें ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर से जोड़ा जाएगा। कचरा संग्रहण वाहन खरीदने के लिए अधिकतम पांच लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी का भी प्रावधान है। इससे वर्षों से असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे परिवारों के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
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जिला पंचायत राज विभाग के निर्देश के बाद पंचायत सचिवों ने चिन्हांकन का काम शुरू कर दिया है। पहल के जरिए उन परिवारों को सरकारी सुविधाओं की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है, जो अब तक असंगठित तरीके से कबाड़ संग्रह कर जीवनयापन करते रहे हैं। इससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा के