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Mau News: सब्जियों, फलदार पौधों को नुकसान पहुंचा रहे घोंघे
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फूलपुर तहसील के आंधीपुर गांव में बड़े आकार के घोंघों के प्रकोप से ग्रामीण परेशान हैं। राजभर और अनुसूचित बस्ती में इनका फैलाव खेतों से लेकर घरों और पोखरी तक हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि ये सब्जियों, फलदार पौधों और अन्य वनस्पतियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शाम और रात में इनकी संख्या अधिक दिखाई देती है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब छह वर्ष पहले गांव का एक परिवार हरिद्वार से दो जीवों को शंख समझकर घर ले आया था। उन्हें मंदिर में रखा गया लेकिन कुछ समय बाद दोनों गायब हो गए। इसके बाद गांव में धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। ग्रामीण अब इनकी संख्या लाखों में होने का दावा कर रहे हैं। सिमिरता देवी ने बताया कि घोंघे अब घरों के अंदर तक पहुंच रहे हैं।
रमाशंकर राजभर के अनुसार पपीता और सब्जियों के पौधे नष्ट हो रहे हैं। दलसिंगार ने बताया कि लौकी, कोहड़ा और करैला की लताओं को भी नुकसान पहुंच रहा है। बाल किशुन ने बताया कि पहले कुछ हिस्सों में समस्या थी, अब अधिकांश बस्तियां प्रभावित हैं। प्रधान प्रतिनिधि सियाराम राजभर ने बताया कि ग्रामीणों ने समस्या की जानकारी दी है। मौसम सामान्य होने पर ब्लॉक और उच्चाधिकारियों को लिखित सूचना दी जाएगी। ग्रामीणों ने मौके पर जांच कर घोंघे की प्रजाति की पहचान और नियंत्रण की मांग की है।
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कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र प्रताप गौतम ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा बताए गए लक्षण जायंट अफ्रीकन स्नेल से मिलते हैं, हालांकि प्रजाति की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही होगी।
उन्होंने घोंघों को नंगे हाथों से न पकड़ने, खेत की सफाई रखने और अंडों समेत घोंघों की नियमित निगरानी की सलाह दी। अधिक प्रकोप होने पर कृषि विभाग की सलाह से अनुशंसित मोलस्कीसाइड का प्रयोग किया जा सकता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि ये सब्जियों, फलदार पौधों और अन्य वनस्पतियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शाम और रात में इनकी संख्या अधिक दिखाई देती है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब छह वर्ष पहले गांव का एक परिवार हरिद्वार से दो जीवों को शंख समझकर घर ले आया था। उन्हें मंदिर में रखा गया लेकिन कुछ समय बाद दोनों गायब हो गए। इसके बाद गांव में धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। ग्रामीण अब इनकी संख्या लाखों में होने का दावा कर रहे हैं। सिमिरता देवी ने बताया कि घोंघे अब घरों के अंदर तक पहुंच रहे हैं।
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रमाशंकर राजभर के अनुसार पपीता और सब्जियों के पौधे नष्ट हो रहे हैं। दलसिंगार ने बताया कि लौकी, कोहड़ा और करैला की लताओं को भी नुकसान पहुंच रहा है। बाल किशुन ने बताया कि पहले कुछ हिस्सों में समस्या थी, अब अधिकांश बस्तियां प्रभावित हैं। प्रधान प्रतिनिधि सियाराम राजभर ने बताया कि ग्रामीणों ने समस्या की जानकारी दी है। मौसम सामान्य होने पर ब्लॉक और उच्चाधिकारियों को लिखित सूचना दी जाएगी। ग्रामीणों ने मौके पर जांच कर घोंघे की प्रजाति की पहचान और नियंत्रण की मांग की है।
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कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र प्रताप गौतम ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा बताए गए लक्षण जायंट अफ्रीकन स्नेल से मिलते हैं, हालांकि प्रजाति की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही होगी।
उन्होंने घोंघों को नंगे हाथों से न पकड़ने, खेत की सफाई रखने और अंडों समेत घोंघों की नियमित निगरानी की सलाह दी। अधिक प्रकोप होने पर कृषि विभाग की सलाह से अनुशंसित मोलस्कीसाइड का प्रयोग किया जा सकता है।