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बदहाली पर आंसू बहा रहा मधुबन का बस स्टेशन

Mon, 28 Jun 2021 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 11:00 PM IST
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Madhuban's bus station is shedding tears on the plight
मधुबन कस्बा के बीचो बीच स्थित रोडवेज बस स्टेशन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। भवन जर्जर हाल में है। यहां बिजली, पेयजल सहित बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। विभिन्न जिलों से आने वाली बसों का ठहराव ही नहीं होता है। सड़क पर कुछ समय के लिए रुककर गंतव्य को प्रस्थान कर जाती है। मुख्य मार्ग पर ही बसों का ठहराव होने से जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। रोडवेज परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। रोडवेज परिसर में बसों का ठहराव न होने से यात्रियों को पता ही नहीं चल पाता है। शिकायत के बाद भी आला अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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वर्ष 1980 में तत्कालीन परिवहन मंत्री संजय सिंह ने लाखों की लागत से बस स्टेशन क बनने की स्वीकृति प्रदान किया था तो तहसील क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लेकिन विभागीय अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए से बस स्टेशन की स्थिति दिन ब दिन दयनीय होती गई। दशकों बीत जाने के बाद भी विभाग की तरफ से रख रखाव सही ढंग से न करने के चलते भवन जर्जर हाल में हो गए हैं। विभाग के संवेदनहीनता के चलते परिसर में निजी सवारी वाहनों का जमघट लगा रहता है। इससे प्रतिमाह लाखों रुपये सरकारी राजस्व की चपत लग रही है। परिसर मेें गंदगी का अंबार लगा रहता है। भवन की खिड़कियां तथा दरवाजे टूट चुके हैं। बस स्टेशन खंडहर का रूप ले लिया है। परिसर में यात्रियों के बैठने की व्यवस्था तक नहीं है।
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कस्बे से होकर दिल्ली, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, बेल्थरारोड डिपो, राप्तीनगर,गोरखपुर, दोहरीघाट डिपो के माध्यम से सवारी अपने गंतव्य तक जाते हैं। दो महीने पूर्व एक कर्मचारी के रिटायर होने के बाद वर्तमान में कोई भी कर्मचारी नहीं है। रात में गाड़ी आती है तो हाल्ट करती हैं लेकिन कोई चौकीदार न होने के कारण उन्हें किसी अनहोनी का भय सताता है। आए दिन कस्बेवासी बस स्टेशन के सुंदरीकरण कराने के लिए आए दिन प्रदर्शन करते रहते हैं। लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। इस मामले में उपजिलाधिकारी लाल बाबू दुबे का कहना है कि मधुबन बस स्टेशन के मामले मेें एआरएम दोहरीघाट से रिपोर्ट मांगी गई है।
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