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कजरी केवल गीत नहीं, बल्कि लोक संस्कृति की पहचान है : विजय बहादुर
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कजरी महोत्सव का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभांरभ करते विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक, पद्म श्री क
- फोटो : Samvad
हरिऔध कला केंद्र में रविवार को उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कजरी महोत्सव का समापन हुआ। महोत्सव में नामचीन कलाकारों के साथ स्थानीय और नवोदित प्रतिभाओं ने लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को सुरों में पिरोया। महोत्सव का शुभारंभ विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक, पद्मश्री कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव मिर्जापुर, डॉ. मन्नू यादव ‘कृष्ण’, वाराणसी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह तथा हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने दीप जला कर किया। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने कहा कि कजरी केवल एक गीत नहीं, बल्कि आजमगढ़ की माटी की खुशबू और लोक संस्कृति की पहचान है। कहा कि महोत्स्व का उद्देश्य पारंपरिक कजरी गायन की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और स्थानीय कलाकारों को मंच देना है।
‘ कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया...’ से झूम उठा प्रांगण
पहली शाम वाराणसी के कजरी गायक डॉ. मन्नू यादव ‘ कृष्ण ’ ने कजरी की पारंपरिक मिठास से कार्यक्रम की शुरुआत की। अयोध्या से आए कलाकार सत्यांशु पटेल ने अवधी कजरी और लोकगीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ स्थानीय कलाकार अजय मिश्रा, आलोक मिश्रा, हृदय मिश्रा और कृतिका सिंह ने भी अपनी प्रस्तुतियों से आजमगढ़ की लोक परंपरा की झलक दिखाई। इसके बाद मंच पर पहुंचीं पद्मश्री कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव। उन्होंने पिया मंगाए दा मेहंदी’, ‘ हमरी अटरिया पे आजा रे सांवरिया और कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरी आइल ननदी... से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। महोत्सव की दूसरी शाम भी लोक संगीत के नाम रही। वाराणसी से आईं डॉ. सुचारिता गुप्ता और डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने कजरी की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। आजमगढ़ के कलाकार नीतीश मिश्रा, आदर्श मिश्रा, शीतला मोहन मिश्रा और राहुल मिश्रा ने भी अपनी प्रस्तुतियों से लोक गायन की परंपरा को जीवंत किया।
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‘ कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया...’ से झूम उठा प्रांगण
पहली शाम वाराणसी के कजरी गायक डॉ. मन्नू यादव ‘ कृष्ण ’ ने कजरी की पारंपरिक मिठास से कार्यक्रम की शुरुआत की। अयोध्या से आए कलाकार सत्यांशु पटेल ने अवधी कजरी और लोकगीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ स्थानीय कलाकार अजय मिश्रा, आलोक मिश्रा, हृदय मिश्रा और कृतिका सिंह ने भी अपनी प्रस्तुतियों से आजमगढ़ की लोक परंपरा की झलक दिखाई। इसके बाद मंच पर पहुंचीं पद्मश्री कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव। उन्होंने पिया मंगाए दा मेहंदी’, ‘ हमरी अटरिया पे आजा रे सांवरिया और कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरी आइल ननदी... से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। महोत्सव की दूसरी शाम भी लोक संगीत के नाम रही। वाराणसी से आईं डॉ. सुचारिता गुप्ता और डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने कजरी की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। आजमगढ़ के कलाकार नीतीश मिश्रा, आदर्श मिश्रा, शीतला मोहन मिश्रा और राहुल मिश्रा ने भी अपनी प्रस्तुतियों से लोक गायन की परंपरा को जीवंत किया।
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