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साम, दाम, दंड, भेद का ही चला सिक्का
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:02 AM IST
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ब्लाॅक प्रमुखी का चुनाव भले ही राज्य निर्वाचन आयोग के तय दिशा निर्देश पर हुआ। लेकिन पर्दे की आड़ में हो रही गोल गोलइती की राजनीति में साम, दाम, दंड भेद का फार्मूला सभी ब्लॉकों में हावी रहा। हर ब्लाक में किंगमेकर की भूमिका में मठाधीश लगे रहे। कहीं पूर्व ब्लाक प्रमुख, कहीं विधायक तो कहीं धनबली अपनी राजनीतिक जमीन बनाने के लिए प्रतिष्ठा दांव पर लगाए हुए थे।
जिले के नौ ब्लॉकों में प्रमुखी का चुनाव हुआ। इनमें समाजवादी पार्टी ने परदहां को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर अधिकृत प्रत्याशी उतारा था। लेकिन यहां भी जीतने वाली मिना सिंह के साथ सपा के ही दिग्गज खड़े थे। कोपागंज ब्लाक में ललिता कन्नौजिया की जीत में पर्दे के पीछे पूर्व जिलाध्यक्ष साधू यादव रहे तो फतहपुर मंडाव ब्लाक में ऐश्वर्या के जीत के पीछे पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामायन यादव एवं राजेंद्र मिश्रा की भूमिका रही।
घोसी ब्लाक में सुजीत के पीछे उनके पिता विधायक सुधाकर सिंह अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाए थे तो इसी ब्लाक से बसपा विधायक उमेश पाण्डेय की पतीष्ठा अपने भाई बृजेश पाण्डेय के लिए लगी हुई थी। हालाकि विधायक पांडेय के भाई चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सके।
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दोहरीघाट ब्लाक में सपा प्रत्याशी प्रदीप राय के पीछे भी सपा नेता राजेंद्र मिश्रा के साथ अन्य सपाई भी अपनी प्रतिष्ठा लगाए रहे। बड़रांव ब्लाक में भाजपा नेता एवं चिकित्सक डा. एचएन सिंह पटेल ने अपनी पुत्र वधु गीता पटेल के लिए जी जान ण्क किए हुए थे। यहां सपा की प्रत्याशी रहीं विमला यादव के अंतिम समय में चुनाव लड़ने से इनकार करने पर इस सीट पर भाजपा की राह आसान हो गई थी।
मुहम्मदाबाद गोहना में किंगमेकर की भूमिका में पूर्व बसपा विधायक राजेंद्र राम के साथ ही पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह ने अपना ब्लाक प्रमुख बनवाकर सपा को न सिर्फ झटका दिया बल्कि यहां से सपा विधायक बैजनाथ पासवान की रणनीति पर पानी फेर दिया। रानीपुर ब्लाक में नीति सिंह की जीत के लिए एमएलसी यशवंत सिंह एवं पूर्व ब्लाक प्रमुख अरूण सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर थी।
इस ब्लाक में बरेली जेल में बंद अनूज कन्नौजिया की मां चुनाव मैदान में थी जिसने नीति सिंह को कड़ी टक्कर दी। रतनपुरा ब्लाक में चुनाव जीतने वाले रामशरण राम के साथ यहां के सपा नेताओं की अग्रणी भूमिका रही। उन्होंने पूर्व विधायक रामबचन धूसिया के उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इनके पुत्र को हार का मुंह देेखना पड़ा।
इस हिसाब से देखा जाय तो सभी ब्लाकों में पिछले एक महीने से चुनावी गणित फिट करने के लिए प्रत्याशी अपने साथ मठाधीशों को लेकर हर प्रकार के हथकंडे अपना रहे थे। रविवार को मतगणना के बाद जीते उम्मीदवारों की घोषणा के बाद मठाधीशों के चेहरे भी मुस्कराते हुए नजर आए।
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जिले के नौ ब्लॉकों में प्रमुखी का चुनाव हुआ। इनमें समाजवादी पार्टी ने परदहां को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर अधिकृत प्रत्याशी उतारा था। लेकिन यहां भी जीतने वाली मिना सिंह के साथ सपा के ही दिग्गज खड़े थे। कोपागंज ब्लाक में ललिता कन्नौजिया की जीत में पर्दे के पीछे पूर्व जिलाध्यक्ष साधू यादव रहे तो फतहपुर मंडाव ब्लाक में ऐश्वर्या के जीत के पीछे पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामायन यादव एवं राजेंद्र मिश्रा की भूमिका रही।
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घोसी ब्लाक में सुजीत के पीछे उनके पिता विधायक सुधाकर सिंह अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाए थे तो इसी ब्लाक से बसपा विधायक उमेश पाण्डेय की पतीष्ठा अपने भाई बृजेश पाण्डेय के लिए लगी हुई थी। हालाकि विधायक पांडेय के भाई चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सके।
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दोहरीघाट ब्लाक में सपा प्रत्याशी प्रदीप राय के पीछे भी सपा नेता राजेंद्र मिश्रा के साथ अन्य सपाई भी अपनी प्रतिष्ठा लगाए रहे। बड़रांव ब्लाक में भाजपा नेता एवं चिकित्सक डा. एचएन सिंह पटेल ने अपनी पुत्र वधु गीता पटेल के लिए जी जान ण्क किए हुए थे। यहां सपा की प्रत्याशी रहीं विमला यादव के अंतिम समय में चुनाव लड़ने से इनकार करने पर इस सीट पर भाजपा की राह आसान हो गई थी।
मुहम्मदाबाद गोहना में किंगमेकर की भूमिका में पूर्व बसपा विधायक राजेंद्र राम के साथ ही पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह ने अपना ब्लाक प्रमुख बनवाकर सपा को न सिर्फ झटका दिया बल्कि यहां से सपा विधायक बैजनाथ पासवान की रणनीति पर पानी फेर दिया। रानीपुर ब्लाक में नीति सिंह की जीत के लिए एमएलसी यशवंत सिंह एवं पूर्व ब्लाक प्रमुख अरूण सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर थी।
इस ब्लाक में बरेली जेल में बंद अनूज कन्नौजिया की मां चुनाव मैदान में थी जिसने नीति सिंह को कड़ी टक्कर दी। रतनपुरा ब्लाक में चुनाव जीतने वाले रामशरण राम के साथ यहां के सपा नेताओं की अग्रणी भूमिका रही। उन्होंने पूर्व विधायक रामबचन धूसिया के उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इनके पुत्र को हार का मुंह देेखना पड़ा।
इस हिसाब से देखा जाय तो सभी ब्लाकों में पिछले एक महीने से चुनावी गणित फिट करने के लिए प्रत्याशी अपने साथ मठाधीशों को लेकर हर प्रकार के हथकंडे अपना रहे थे। रविवार को मतगणना के बाद जीते उम्मीदवारों की घोषणा के बाद मठाधीशों के चेहरे भी मुस्कराते हुए नजर आए।