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...चचा गले न लगाओ कि जख्म रिसता है
mau
Updated Fri, 16 Nov 2018 11:39 PM IST
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moharram
- फोटो : अमर उजाला
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नगर के शिया मोहल्ला स्थित मासुमिया क़दीम अजाखाने से बृहस्पतिवार की देर रात कमेटी नौजवाने अंजुमन मासूमिया क़दीमी की ओर से असिराने कर्बला की याद में अलम और ताबूत का जुलुस निकाला गया। जुलूस में रास्ते भर अंजुमनें नौहा मातम किया।
मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना मोहम्मद बशारत रजा हुसैनी ने कहा कि जुलूस उन कैदियों की याद में है जो दस मोहर्रम को कर्बला से असीर करके शाम में क़ैद रहे। जिस क़ैदखाने में इमामे हुसैन की चार साल की बच्ची पानी मांगते और रोते रोते प्यासी ही दुनिया से चली गई। जिसको देख कर यजीद मजबूर हो गया और इमामे हुसैन के घर वालों को आजाद कर दिया। यह काफिला कर्बला होते हुए रबी-उल-अव्वल को मदीना पहुंचा।
शब्बेदारी में अंजुमन मासूमिया क़दीम के साहबे बयाज मोजाहिर हुसैन अलमदार हुसैन और अहमद हुसैन के नौहे ‘मोहम्मदे हनफिया से कहते थे सज्जाद, चचा गले न लगाओ कि जख्म रिस्ता है’ सुन कर अजादार रो पड़े। इस दौरान मौलाना मोजाहिर हुसैन, मौलाना मोहम्मद मेहंदी हुसैनी, मौलाना रहबर रजा, इश्तेयाक हुसैन, शमशाद, असगर इमाम, फैजान, मोहम्मद जोहेर, शब्बू, सलमान, मीसम, शादाब, शब्बीर, जावेद, अनीस, शोहरत सहित काफी संख्या में अजादार मौजूद रहे।
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मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना मोहम्मद बशारत रजा हुसैनी ने कहा कि जुलूस उन कैदियों की याद में है जो दस मोहर्रम को कर्बला से असीर करके शाम में क़ैद रहे। जिस क़ैदखाने में इमामे हुसैन की चार साल की बच्ची पानी मांगते और रोते रोते प्यासी ही दुनिया से चली गई। जिसको देख कर यजीद मजबूर हो गया और इमामे हुसैन के घर वालों को आजाद कर दिया। यह काफिला कर्बला होते हुए रबी-उल-अव्वल को मदीना पहुंचा।
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शब्बेदारी में अंजुमन मासूमिया क़दीम के साहबे बयाज मोजाहिर हुसैन अलमदार हुसैन और अहमद हुसैन के नौहे ‘मोहम्मदे हनफिया से कहते थे सज्जाद, चचा गले न लगाओ कि जख्म रिस्ता है’ सुन कर अजादार रो पड़े। इस दौरान मौलाना मोजाहिर हुसैन, मौलाना मोहम्मद मेहंदी हुसैनी, मौलाना रहबर रजा, इश्तेयाक हुसैन, शमशाद, असगर इमाम, फैजान, मोहम्मद जोहेर, शब्बू, सलमान, मीसम, शादाब, शब्बीर, जावेद, अनीस, शोहरत सहित काफी संख्या में अजादार मौजूद रहे।
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