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Mau News: जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ ने दिया इस्तीफा, फिजिशियन के भरोसे मरीज
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आजमगढ़। मंडलीय जिला चिकित्सालय में मानसिक रोग विशेषज्ञ के इस्तीफे के बाद मरीजों को अब फिजिशियन के भरोसे रहना पड़ रहा है।
इस स्थिति के मद्देनजर, काउंसिलिंग सेंटर में कर्मियों की तैनाती की गई है जो मरीजों की काउंसिलिंग कर रहे हैं। मंडलीय जिला चिकित्सालय में डॉ. सुमित सिंह की मानसिक रोग विशेषज्ञ के रूप में तैनाती की गई थी। लेकिन सितंबर माह के शुरुआत में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
उनके इस प्रकार अचानक इस्तीफा देने से स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी कमी आ गई है। इससे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को उचित उपचार और परामर्श मिलने में कठिनाई हो रही है। वर्तमान में फिजिशियन इन मरीजों की प्राथमिक देखभाल कर रहे हैं, लेकिन वे मानसिक रोगों के विशेषज्ञ नहीं हैं। जबकि मंडलीय जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन दो से तीन मरीज मानसिक रोग से पीड़ित होकर पहुंचते हैं।
वैसे तो मंडलीय जिला चिकित्सालय के काउंसिलिंग सेंटर में प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया है। ये कर्मी मरीजों को भावनात्मक सहारा और प्रारंभिक परामर्श प्रदान कर रहे हैं।
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लेकिन विशेषज्ञ न होने से मानसिक रोग पीड़ित मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसमें उनको समय के साथ ही आर्थिक समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।
ऑटिज्म के मुख्य कारण: ऑटिज्म के सही कारणों का पता नहीं चल सका है।
हालांकि, विभिन्न अध्ययनों में कहा गया है कि यह कुछ आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से होता है। जो कि गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग के विकास को बाधित करते हैं।
जैसे - दिमाग के विकास को नियंत्रित करने वाले जीन में कोई गड़बड़ी होना, सेल्स और दिमाग के बीच संपर्क बनाने वाले जीन में गड़बड़ी होना आदि है।
जिला अस्पताल के पूर्व मनोचिकित्सक डॉ. सुमित सिंह ने बताया कि ऑटिज्म बीमारी से ग्रसित बच्चे दूसरे बच्चों से घुलने-मिलने से बचते हैं।
अकेले रहना, खेलकूद में हिस्सा न लेना, एक जगह पर घंटों अकेले या चुपचाप बैठना, किसी एक ही वस्तु पर ध्यान आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे बच्चे गुस्सैल, बदहवास, बेचैन, अशांत और तोड़फोड़ मचाने जैसा व्यवहार करते हैं।
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इस स्थिति के मद्देनजर, काउंसिलिंग सेंटर में कर्मियों की तैनाती की गई है जो मरीजों की काउंसिलिंग कर रहे हैं। मंडलीय जिला चिकित्सालय में डॉ. सुमित सिंह की मानसिक रोग विशेषज्ञ के रूप में तैनाती की गई थी। लेकिन सितंबर माह के शुरुआत में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
उनके इस प्रकार अचानक इस्तीफा देने से स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी कमी आ गई है। इससे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को उचित उपचार और परामर्श मिलने में कठिनाई हो रही है। वर्तमान में फिजिशियन इन मरीजों की प्राथमिक देखभाल कर रहे हैं, लेकिन वे मानसिक रोगों के विशेषज्ञ नहीं हैं। जबकि मंडलीय जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन दो से तीन मरीज मानसिक रोग से पीड़ित होकर पहुंचते हैं।
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वैसे तो मंडलीय जिला चिकित्सालय के काउंसिलिंग सेंटर में प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया है। ये कर्मी मरीजों को भावनात्मक सहारा और प्रारंभिक परामर्श प्रदान कर रहे हैं।
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लेकिन विशेषज्ञ न होने से मानसिक रोग पीड़ित मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसमें उनको समय के साथ ही आर्थिक समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।
ऑटिज्म के मुख्य कारण: ऑटिज्म के सही कारणों का पता नहीं चल सका है।
हालांकि, विभिन्न अध्ययनों में कहा गया है कि यह कुछ आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से होता है। जो कि गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग के विकास को बाधित करते हैं।
जैसे - दिमाग के विकास को नियंत्रित करने वाले जीन में कोई गड़बड़ी होना, सेल्स और दिमाग के बीच संपर्क बनाने वाले जीन में गड़बड़ी होना आदि है।
जिला अस्पताल के पूर्व मनोचिकित्सक डॉ. सुमित सिंह ने बताया कि ऑटिज्म बीमारी से ग्रसित बच्चे दूसरे बच्चों से घुलने-मिलने से बचते हैं।
अकेले रहना, खेलकूद में हिस्सा न लेना, एक जगह पर घंटों अकेले या चुपचाप बैठना, किसी एक ही वस्तु पर ध्यान आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे बच्चे गुस्सैल, बदहवास, बेचैन, अशांत और तोड़फोड़ मचाने जैसा व्यवहार करते हैं।