{"_id":"6276b3c4662e70180c03fc7a","slug":"arv-s-demand-increased-in-district-hospital-from-outside-patients-mau-news-vns652345313","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाहरी मरीजों से जिला अस्पताल में बढ़ गई एआरवी की डिमांड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाहरी मरीजों से जिला अस्पताल में बढ़ गई एआरवी की डिमांड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। जिला अस्पताल में कुत्ते और बंदरों के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन यानी एआरवी लगवाने वालों की संख्या बढ़ गई है। रोज एआरवी कक्ष के सामने मरीजों की लाइन सुबह नौ बजे से ही लग जा रही है। चौंकाने वाली बात है कि इन मरीजों में 35 फीसदी से ज्यादा मरीज बाहरी दो जिलों के हैं। इन मरीजों द्वारा अपने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने तथा अस्पताल नजदीक होने के चलते आने की बात कह रहे है। उधर, बाहरी जिले के मरीजों के आने से एंटी रैबिज इंजेक्शन की खपत होने से यह स्टॉक जल्द खत्म हो जाता है। ऐसे में स्टॉक खत्म होने पर मरीजों को कई दिनों तक परेशानी उठानी पड़ती है।
जिला अस्पताल में हर दिन औसतन 40 से 50 मरीजों को वैक्सीन लगाई जा रही है। ऐसे तो ठंड के मौसम में कुत्ते द्वारा काटने के मामले बढ़ते हैं, लेकिन वर्तमान में ही गर्मी में हर माह बढ़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। शनिवार की दोपहर एक बजे तक ही जिला अस्पताल में एंटी रैबिज लगवाने के लिए 30 मरीज पहुंच चुके थे। आंकड़ों पर नजर डाले तो इस माह में बीते शुक्रवार तक 685 मरीज पहुंच चुके है। चौंकाने वाली बात है कि इन मरीजों में नगर से पहुंचने वाले मरीजों की संख्या महज 25 फीसदी तक ही है, बाकी 35 फीसदी बलिया तथा गाजीपुर जिले के मऊ जिले के सीमावर्ती गांव के मरीजों की है। शेष जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की है, जिनके द्वारा सीएचसी-पीएचसी पर इंजेक्शन न होने पर अस्पताल पहुंचते है। इन छह दिनों में पहुंचे 685 मरीजों में बाहरी जिलों के 97 मरीज थे। वहीं बीते अप्रैल माह में 1925 मरीजों में 685 मरीज बाहरी जिलों के थे। उधर, जिले के अलावा दूसरे जिलों के मरीजों के आने से अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक जल्द ही समाप्त हो जा रहा है। सूत्रों की माने तो जिला अस्पताल द्वारा बीते मार्च माह में 810 वायल का स्टॉक मंगाया था, लेकिन बाहरी मरीजों के आने के चलते यह स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि एंटी रैबिज एक दो दिन में खत्म हो जाएगा, जिसके लिए मांग पत्र भेजा जा चुका है।
सीएचसी-पीएचसी पर एंटीरैबिज न होने से हलाकान हो रहे मरीज
मऊ। जिला अस्पताल में शनिवार को एंटी रैबिज लगवाने पहुंचे मधुबन के दुबारी निवासी राम प्रकाश, कहिनौर निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि वह अपने यहां के अस्पतालों में एंटी रैबिज न होने पर वह जिला अस्पताल पहुंचे थे। जबकि दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबिज इंजेक्शन की उपलब्धता रहनी चाहिए।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में एंटी रैबिज की उपलब्धता है, लेकिन स्टॉक कम होने पर इसको लेकर डिमांड पत्र भेजा जा चुका है। जिससे समय पर एंटी रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक उपलब्ध रहे, इससे मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। - डॉ. बृजकुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
विज्ञापन
जिला अस्पताल में हर दिन औसतन 40 से 50 मरीजों को वैक्सीन लगाई जा रही है। ऐसे तो ठंड के मौसम में कुत्ते द्वारा काटने के मामले बढ़ते हैं, लेकिन वर्तमान में ही गर्मी में हर माह बढ़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। शनिवार की दोपहर एक बजे तक ही जिला अस्पताल में एंटी रैबिज लगवाने के लिए 30 मरीज पहुंच चुके थे। आंकड़ों पर नजर डाले तो इस माह में बीते शुक्रवार तक 685 मरीज पहुंच चुके है। चौंकाने वाली बात है कि इन मरीजों में नगर से पहुंचने वाले मरीजों की संख्या महज 25 फीसदी तक ही है, बाकी 35 फीसदी बलिया तथा गाजीपुर जिले के मऊ जिले के सीमावर्ती गांव के मरीजों की है। शेष जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की है, जिनके द्वारा सीएचसी-पीएचसी पर इंजेक्शन न होने पर अस्पताल पहुंचते है। इन छह दिनों में पहुंचे 685 मरीजों में बाहरी जिलों के 97 मरीज थे। वहीं बीते अप्रैल माह में 1925 मरीजों में 685 मरीज बाहरी जिलों के थे। उधर, जिले के अलावा दूसरे जिलों के मरीजों के आने से अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक जल्द ही समाप्त हो जा रहा है। सूत्रों की माने तो जिला अस्पताल द्वारा बीते मार्च माह में 810 वायल का स्टॉक मंगाया था, लेकिन बाहरी मरीजों के आने के चलते यह स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि एंटी रैबिज एक दो दिन में खत्म हो जाएगा, जिसके लिए मांग पत्र भेजा जा चुका है।
विज्ञापन
सीएचसी-पीएचसी पर एंटीरैबिज न होने से हलाकान हो रहे मरीज
मऊ। जिला अस्पताल में शनिवार को एंटी रैबिज लगवाने पहुंचे मधुबन के दुबारी निवासी राम प्रकाश, कहिनौर निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि वह अपने यहां के अस्पतालों में एंटी रैबिज न होने पर वह जिला अस्पताल पहुंचे थे। जबकि दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबिज इंजेक्शन की उपलब्धता रहनी चाहिए।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में एंटी रैबिज की उपलब्धता है, लेकिन स्टॉक कम होने पर इसको लेकर डिमांड पत्र भेजा जा चुका है। जिससे समय पर एंटी रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक उपलब्ध रहे, इससे मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। - डॉ. बृजकुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल