विकास से कोसों दूर है मधुबन तहसील

Mau Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
मधुबन। आजादी के दशकों बाद भी स्थानीय तहसील को विकसित नहीं किया जा सका है। वहीं प्राकृतिक, धार्मिक धरोहरों को संजोए जाने का प्रयास तक नहीं किया जा सका है। यहां के लोग प्राकृतिक आपदाओं से जूझते रहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां से दर्जनों प्रतिभाएं देश विदेश में अपना परचम फहरा रही हैं, लेकिन शासन प्रशासन की नजरें इनायत नहीं हो सकी है।
देश को आजाद कराने में मधुबन तहसील के क्रांतिकारियों का काफी योगदान रहा है। अमर शहीदों ने अपने सीने में विकास का सपना संजोया था, लेकिन उनके सपने को साकार करने की दिशा में ठोस कदम तक नहीं उठाया जा सका है। मधुबन तहसील की आबादी लगभग डेढ़ लाख है। अधिकतर लोगों के जीविका का साधन कृषि और पशुपालन है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव से लोगों की हालत दिन ब दिन दयनीय होती जा रही है। तहसील में स्थापित विद्युत उपकेंद्र बदहाल पड़े हैं। जर्जर तारों को बदला नहीं जा सका है। ऐसे में विद्युत आपूर्ति की दयनीय स्थिति रहने से बाहर से व्यवसायी भी उद्योग धंधे लगाने से कतराते हैं। वहीं सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए माइनरें तो निकाली गई हैं, लेकिन उनमें समय पर पानी ही नहीं आता है। राजकीय नलकूप भी शो पीस बनकर रह गए हैं। ऐसे में फसल उत्पादन तेजी से घटता रहा है। वहीं घाघरा के कहर से हर वर्ष किसानों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन अभी तक किसानों को शासन प्रशासन की ओर से एक पाई का मुआवजा तक नहीं मिल सका है।

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