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रामराज्याभिषेक के साथ कथा का समापन
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दोहरीघाट। रामचरित मानस सत्ता के त्याग की कथा है। महाभारत सत्ता के लिए संघर्ष की कथा है। राम के आदर्शों पर चलने से जीवन सफल हो जायेगा। भरत के चरित्र को अपने जीवन में उतार लो तो कभी दुख नहीं होगा। सीताजी की तरह हर नारी अपने को ढाल ले, हनुमान जैसा सेवक बने, तभी हम इस भव सागर से पार हो सकते हैं। यह बातें मद्धेशिया धर्मशाला में चल रही रामकथा के अंतिम दिन बुधवार को रामराज्याभिषेक की कथा को सुनाई।
उन्होंने कहा कि राम जब अयोध्या में पधारे तो पूरे अयोध्यावासी उनको एक पलक निहारने के लिये व्याकुल हो उठे। राम हर अयोध्यावासी के घर घर जाकर दर्शन दिए और पूरी अयोध्या भगवान के दर्शन पाकर निहाल हो गई। कथा वाचक ने कहा कि अगर किसी राम कथा एक व्यक्ति के जीवन में उतर गयी हो तो मेरी कथा इस धरा पर सफल हो जायेगी। रामराज्याभिषेक की झांकी भी व्यास गद्दी के पास सजायी गयी तो राम को तिलक देने वालों की होड़ लगी रही तथा सुबह में हवन आरती प्रसाद वितरण के साथ भोज का भी आयोजन किया गया जिसमें नगर के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया तथा संत को दान दक्षिणा देकर विदा किया। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन गुलाबचंद गुप्त ,विनोद वर्मा ,बाबूलाल ,संतोष कुमार, दीपेन्द्र गुप्त, राजेन्द्र प्रसाद आदि काफी लोग शामिल रहे।
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उन्होंने कहा कि राम जब अयोध्या में पधारे तो पूरे अयोध्यावासी उनको एक पलक निहारने के लिये व्याकुल हो उठे। राम हर अयोध्यावासी के घर घर जाकर दर्शन दिए और पूरी अयोध्या भगवान के दर्शन पाकर निहाल हो गई। कथा वाचक ने कहा कि अगर किसी राम कथा एक व्यक्ति के जीवन में उतर गयी हो तो मेरी कथा इस धरा पर सफल हो जायेगी। रामराज्याभिषेक की झांकी भी व्यास गद्दी के पास सजायी गयी तो राम को तिलक देने वालों की होड़ लगी रही तथा सुबह में हवन आरती प्रसाद वितरण के साथ भोज का भी आयोजन किया गया जिसमें नगर के लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया तथा संत को दान दक्षिणा देकर विदा किया। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन गुलाबचंद गुप्त ,विनोद वर्मा ,बाबूलाल ,संतोष कुमार, दीपेन्द्र गुप्त, राजेन्द्र प्रसाद आदि काफी लोग शामिल रहे।
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