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डाक्टर विहिन होने से ठप पड़ा एसएनसीयू वार्ड, कर्मचारी फरमा रहे है आराम
Updated Sun, 17 Jun 2018 01:08 AM IST
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मऊ। जिला मुख्यालय स्थित महिला अस्पताल में एसएनसीयू यूनिट- नवजात शिशु केयर यूनिट में तैनात डाक्टरों के इस्तीफा देने के चलते यूनिट में बच्चों को इलाज नहीं हो पा रहा है। डाक्टरों के इस्तीफा देने के तीन माह बीतने के बाद एक भी डाक्टर की तैनाती न होने के चलते यूनिट में तैनात कर्मचारियों को कोई काम नहीं है। काम न होने के चलते जहां कर्मचारी अराम फरमा रहे है, वहीं अस्पताल में प्रसव के बाद बीमार बच्चों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
बता दे महिला जिला अस्पताल में प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में ही एसएनसीयू वार्ड बनाया गया है। वार्ड में एक साथ 8 बच्चों के इलाज के लिए आधुनिक मशीनों के दो डाक्टरों और 7 स्टाफ की तैनाती की गई है। जहां कुछ माह तही वार्ड के डाक्टर एसएस राय और मनोज गुप्ता द्वारा तत्तकालीन सीएमस डा. माधुरी सिंह पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मार्च 2018 में इस्तीफा देने के साथ दोनों ने क्रमश: 2 और 7 मार्च को डाक से अपना इस्तीफा सीएमओ को भेज दिया। एक साथ दोनों डाक्टरों के इस्तीफा देने के चलते साढ़े तीन माह से यूनिट में बच्चों का इलाज बंद है। अस्पताल में प्रसव के बाद अगर कोई बच्चा बीमार पैदा हो रहा है तो उसे निजी अस्पताल को रेफर किया जा रहा है। उधर कई माह से यूनिट में इलाज बंद होने से तैनात कर्मचारी रोजाना अपने समय पर अस्पताल तो आ रहे है, लेकिन यूनिट में बैठने के बजाए अस्पताल में इधर उधर बैठकर अपना समय पूरा कर रहे है। इस बावत प्रभारी सीएमएस डा. आरके गुप्ता का कहना है कि समस्या को देखते हुए फिलहाल एसएनसीयू वार्ड के लिए एक महिला डाक्टर की तैनाती की जा चुकी है। हालांकि अभी वह अवकाश पर है, जल्द ही उनके द्वारा ज्वाइनिंग की जाएगी।
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बता दे महिला जिला अस्पताल में प्रसव के बाद गंभीर रूप से बीमार बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में ही एसएनसीयू वार्ड बनाया गया है। वार्ड में एक साथ 8 बच्चों के इलाज के लिए आधुनिक मशीनों के दो डाक्टरों और 7 स्टाफ की तैनाती की गई है। जहां कुछ माह तही वार्ड के डाक्टर एसएस राय और मनोज गुप्ता द्वारा तत्तकालीन सीएमस डा. माधुरी सिंह पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए मार्च 2018 में इस्तीफा देने के साथ दोनों ने क्रमश: 2 और 7 मार्च को डाक से अपना इस्तीफा सीएमओ को भेज दिया। एक साथ दोनों डाक्टरों के इस्तीफा देने के चलते साढ़े तीन माह से यूनिट में बच्चों का इलाज बंद है। अस्पताल में प्रसव के बाद अगर कोई बच्चा बीमार पैदा हो रहा है तो उसे निजी अस्पताल को रेफर किया जा रहा है। उधर कई माह से यूनिट में इलाज बंद होने से तैनात कर्मचारी रोजाना अपने समय पर अस्पताल तो आ रहे है, लेकिन यूनिट में बैठने के बजाए अस्पताल में इधर उधर बैठकर अपना समय पूरा कर रहे है। इस बावत प्रभारी सीएमएस डा. आरके गुप्ता का कहना है कि समस्या को देखते हुए फिलहाल एसएनसीयू वार्ड के लिए एक महिला डाक्टर की तैनाती की जा चुकी है। हालांकि अभी वह अवकाश पर है, जल्द ही उनके द्वारा ज्वाइनिंग की जाएगी।
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