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Mau News: ढाई साल में स्मार्ट नहीं हो पाईं समितियां, न दवा मिली न खाद महफूज

Sun, 30 Aug 2026 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:15 AM IST
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Committees failed to become 'smart' in two and a half years; neither medicines nor fertilizers remained secure.
बंद साधन स​ह​कारी समिति ​भीटी।
मऊ। गांवों में सस्ती दवा और किसानों को बेहतर सुविधा देने का दावा करने वाली सहकारिता विभाग की ‘स्मार्ट समिति’ योजना खुद बदहाली का शिकार है। ढाई साल पहले साधन सहकारी समितियों पर जनऔषधि केंद्र खोलने की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन अब तक 93 में सिर्फ एक समिति को ड्रग लाइसेंस मिल सका।
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वहां भी दवाएं नहीं पहुंचीं। जिम्मेदारों का कहना है कि सुविधा शुरू न हो पाने की वजह बी-फार्मा डिग्री धारक युवकों का नहीं मिल पाना है। दूसरी ओर करीब 40 समितियों के जर्जर भवन किसानों को मिलने वाली खाद की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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शासन के निर्देश पर जिले की 93 साधन सहकारी समितियों को स्मार्ट बनाने की योजना तैयार की गई थी। उद्देश्य था कि समितियां केवल खाद वितरण तक सीमित न रहें, बल्कि ग्रामीणों को सस्ती जेनेरिक दवाओं समेत अन्य सुविधाएं भी मिलें। इसके लिए समितियों पर प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र शुरू करने की योजना बनाई गई।
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योजना के तहत मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक की बरदहपुर बनियापार सहकारी समिति को ड्रग लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन अब तक दवाओं की आपूर्ति नहीं हो सकी। अधिकारियों के अनुसार बी-फार्मा डिग्रीधारक युवकों के उपलब्ध नहीं होने से केंद्र शुरू करने में अड़चन आ रही है। वहीं, समितियों की ओर से डिग्रीधारकों को मानदेय के बजाय दवाओं की बिक्री पर कमीशन देने का प्रस्ताव भी योजना की राह में रोड़ा बना।

शनिवार को रतनपुरा, परदहां, रानीपुर, बड़रांव और फतहपुर मंडाव ब्लॉक की समितियों की पड़ताल में व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आई। अमिला कोट, मादी दुल्ह, बहरामपुर, बड़रांव, थलईपुर, पहदेवाजीत, कोपागंज, सरवां, ढाढ़ाचवर, दुबारी, मझवारा, लुदुही, लोहा टिकर और पलिया समेत करीब 40 समितियों के भवन जर्जर मिले। पहदेवाजीत समिति के किसानों को खाद रतनपुरा समिति से दी जाती है। भवन की छत फटी है, सरिया बाहर निकली है और दीवारों में दरारें हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में खाद की बोरियों को बचाने के लिए तिरपाल लगाना पड़ता है। सीलन से खाद खराब होने का खतरा बना रहता है।
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