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विषम परिस्थितियों में कष्टों को झेलने का करना चाहिए प्रयास
Updated Sun, 27 May 2018 11:32 PM IST
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कोपागंज (मऊ)। क्षेत्र के माफी लाड़नपुर स्थित चेरारामकापुरा में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन शनिवार की शाम गाजीपुर से पधारे कथा वाचक नीरज शास्त्री ने कहा कि आज भाई-भाई संपत्ति को लेकर आपस में झगड़ते रहते हैं। ऐसे में परिवार की शांति बनाए रखने के लिए भाइयों में संपत्ति का नहीं बल्कि विपत्तियों का बंटवारा होना चाहिए। कनिष्ठ भी अपने गुणों से ज्येष्ठ से श्रेष्ठ हो सकता है। विषम परिस्थितियों में कष्टों को झेलने का प्रयास करना चाहिए। श्रेष्ठता प्राप्त करने का यह प्रथम सोपान है। भरत से हमें प्रेरणा लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि भगवान राम और भाई भरत ने सम्पत्ति का बंटवारा नहीं किया बल्कि विपत्ति का बंटवारा किया। राम भरत मिलन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रभु राम, भरत को रघुवंश का हंस कह रहे हैं। भरत प्रेम रूपी अमृत के सागर हैं। भरत ने चित्रकूट से राम के चरण पादुका लेकर आए। चरण पादुका को ही सिंहासन पर रखकर भगवान के अयोध्या वापस आने के पूर्व ही रामराज्य की स्थापना कर डाली। जब हम अपने जीवन मात्र में अपने प्रति तथा भगवान राम पर दृष्टिगत करेंगे तो अनुभव करेंगे कि जीवन में हमारा योगदान शून्य है। हम सभी को अपनी योग्यता बढ़ानी होगी। स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका में वेदांत का प्रचार कर आध्यात्म को दिशा में भारत को विश्व का सिरमौर बनाया। भरत और भगवान राम के मिलन की कथा सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए और श्रीराम और देवी के जयकारा लगाने लगे। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक जवाहिर तिवारी, विनोद तिवारी, राजेश राय, पियूष राय, नरेंद्र राय, धर्मेंद्र तिवारी, अजीत पांडेय, समीर तिवारी, नवीन सिंह, अमित आदि शामिल रहे।
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