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प्राकृतिक चिकित्सा से दूर हो जाता है आसाध्य रोग
Updated Sat, 17 Nov 2018 10:51 PM IST
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मऊ। नगर के आर्य समाज दयानंद बाल विद्या मंदिर प्रांगण में शनिवार को योग वैलनेस सेंटर कासिमपुर के तत्वाधान में विचार गोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्राकृतिक चिकित्सा के इतिहास, उत्पत्ति, सिद्धांत और उपादेयता पर चर्चा की गई।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में योग प्रशिक्षक विश्वा गुप्ता ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के जनक जॉन बेनेडिक्ट और भारत में डॉ. दिनेश शॉ मेहता थे। कहा कि महात्मा गांधीजी नेचुरोपैथी के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उन्होंने सर्वप्रथम भारत में आल इंडिया नेचरक्योर हॉस्पिटल की स्थापना पुणे में 18 नवंबर 1945 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की मौजूदगी में करवाई थी। जहां डॉक्टर दिनेश शॉ मेहता द्वारा महात्मा गांधी के कब्ज के रोग को प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से ठीक किया था। इसी क्रम में पदमा ने बताया कि यह पंचमहाभूत चिकित्सा पर आधारित, ड्रगलेस( दवारहित), सर्वसुलभ, साइड इफेक्ट रहित और संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। जो स्वचिकित्सा पर आधारित होती है और ये भारत में प्राचीन काल से सूर्य स्नान और मिट्टी स्नान, तालाब स्नान के रूप में प्रचलित है। जिनमें 10 प्रमुख सिद्धांत होते हैं। गोष्ठी को संजीत और राजन ने संबोधित किया गया। इस मौके पर आचार्य मनीष आर्य, दिनेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में योग प्रशिक्षक विश्वा गुप्ता ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के जनक जॉन बेनेडिक्ट और भारत में डॉ. दिनेश शॉ मेहता थे। कहा कि महात्मा गांधीजी नेचुरोपैथी के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उन्होंने सर्वप्रथम भारत में आल इंडिया नेचरक्योर हॉस्पिटल की स्थापना पुणे में 18 नवंबर 1945 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की मौजूदगी में करवाई थी। जहां डॉक्टर दिनेश शॉ मेहता द्वारा महात्मा गांधी के कब्ज के रोग को प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से ठीक किया था। इसी क्रम में पदमा ने बताया कि यह पंचमहाभूत चिकित्सा पर आधारित, ड्रगलेस( दवारहित), सर्वसुलभ, साइड इफेक्ट रहित और संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। जो स्वचिकित्सा पर आधारित होती है और ये भारत में प्राचीन काल से सूर्य स्नान और मिट्टी स्नान, तालाब स्नान के रूप में प्रचलित है। जिनमें 10 प्रमुख सिद्धांत होते हैं। गोष्ठी को संजीत और राजन ने संबोधित किया गया। इस मौके पर आचार्य मनीष आर्य, दिनेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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