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सरकारी लाभ के लिए हेडक्लर्क बना मजदूर
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 28 Jun 2015 12:13 AM IST
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सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकारी कर्मचारी पर स्वयं को मजदूर घोषित करने का आरोप है। मामले की शिकायत एसएसपी से की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कर्मचारी इंटर कालेज में प्रधान लिपिक पद पर कार्यरत है और उसने स्वयं को मजदूर दर्शा कर बीपीएल कार्ड बनवा लिया है। अपनी पुत्री को सावित्रीबाई फुले योजना में मदद भी दिलाई।
थाना मगोर्रा के गांव मकहेरा निवासी ललित कुमार का कहना है कि चंद्रभान सिंह निवासी मल्हू थाना मगोर्रा महात्मा गांधी स्मारक इंटर कालेज, सौंख में वर्ष 1988 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर भर्ती हुआ था। वर्तमान में वह प्रधान लिपिक के पद पर कार्यरत है।
आरोप है कि चंद्रभान सिंह ने परिवार की वार्षिक आय मात्र 18000 रुपये दर्शाकर बीपीएल राशन कार्ड बनवाया है। इस राशनकार्ड और कूट रचित प्रपत्रों के जरिए उसने वर्ष 2011 में कक्षा 11 में अध्ययनरत अपनी पुत्री को सावित्री बाईफुले बालिका मदद योजना में आवेदन कराया। इसके अंतर्गत डीआईओएस कार्यालय से 15 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक 14 मार्च 2012 को प्राप्त किया।
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आरोपी ने अपनी दूसरी पुत्री को कक्षा 11 में पढ़ने के दौरान दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया। इसमें अपनी वार्षिक आय 1,92,468 रुपये दर्शाई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि चंद्रभान की वार्षिक आय लगभग 2.60 लाख रुपये है। एसएसपी से मामले में कार्रवाई की मांग की गई है।
कालेज में कार्यरत प्रधान लिपिक द्वारा स्वयं को मजदूर दर्शाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने संबंधी शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसी शिकायत आती है, तो जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
भास्कर मिश्रा
जिला विद्यालय निरीक्षक
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थाना मगोर्रा के गांव मकहेरा निवासी ललित कुमार का कहना है कि चंद्रभान सिंह निवासी मल्हू थाना मगोर्रा महात्मा गांधी स्मारक इंटर कालेज, सौंख में वर्ष 1988 में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर भर्ती हुआ था। वर्तमान में वह प्रधान लिपिक के पद पर कार्यरत है।
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आरोप है कि चंद्रभान सिंह ने परिवार की वार्षिक आय मात्र 18000 रुपये दर्शाकर बीपीएल राशन कार्ड बनवाया है। इस राशनकार्ड और कूट रचित प्रपत्रों के जरिए उसने वर्ष 2011 में कक्षा 11 में अध्ययनरत अपनी पुत्री को सावित्री बाईफुले बालिका मदद योजना में आवेदन कराया। इसके अंतर्गत डीआईओएस कार्यालय से 15 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक 14 मार्च 2012 को प्राप्त किया।
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आरोपी ने अपनी दूसरी पुत्री को कक्षा 11 में पढ़ने के दौरान दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया। इसमें अपनी वार्षिक आय 1,92,468 रुपये दर्शाई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि चंद्रभान की वार्षिक आय लगभग 2.60 लाख रुपये है। एसएसपी से मामले में कार्रवाई की मांग की गई है।
कालेज में कार्यरत प्रधान लिपिक द्वारा स्वयं को मजदूर दर्शाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने संबंधी शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसी शिकायत आती है, तो जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
भास्कर मिश्रा
जिला विद्यालय निरीक्षक