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राष्ट्रविरोधी ताकतों को शांत करने को संत सड़कों पर उतरने को तैयार
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वृंदावन। धर्म रक्षा संघ के तत्वावधान में नागरिकता कानून के समर्थन में परिक्रमा मार्ग स्थित अखंड दया धाम में सभा हुई। इसमें संतों ने मोदी सरकार के निर्णय को राष्ट्रहित में बताया है।
महामण्डलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने सभा की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के पक्ष में वृंदावन का संत समाज राष्ट्रविरोधी ताकतों को शांत करने के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है। राष्ट्रहित में कार्य करने संतों की जिम्मेदारी है। संत हरिबोल महाराज ने कहा कि देश विरोधी लोग जामिया मिलिया जैसे कॉलेज के छात्रों को हथियार बनाकर अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं।
स्वामी चित्त प्रकाशानंद ने कहा कि मोदी सरकार जो भी निर्णय ले रही है वह पूर्णत: राष्ट्रहित में है। संत बलराम बाबा ने कहा कि राष्ट्र की सम्पत्ति केा नुकसान पहुंचाना बड़ा अपराध है। ऐसे उपद्रवियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि नागरिकता कानून को इस स्वरूप में सन 1950 में ही पारित हो जाना चाहिए।
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सभा में धर्म रक्षा संघ के संयोजक आचार्य बद्रीश, अध्यक्ष सौरभ गौड़, महंत लाड़िलीशरण, महंत सुंदर दास, महामंडलेश्वर आदित्यानंद महाराज, स्वामी राघवानंद, स्वामी रघुनाथ दास, भगवान दास चौधरी, अश्विनी मिश्रा, संजय शर्मा, अनुज शास्त्री, प्रशांत गोस्वामी आदि उपस्थित थे।
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महामण्डलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने सभा की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के पक्ष में वृंदावन का संत समाज राष्ट्रविरोधी ताकतों को शांत करने के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार है। राष्ट्रहित में कार्य करने संतों की जिम्मेदारी है। संत हरिबोल महाराज ने कहा कि देश विरोधी लोग जामिया मिलिया जैसे कॉलेज के छात्रों को हथियार बनाकर अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं।
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स्वामी चित्त प्रकाशानंद ने कहा कि मोदी सरकार जो भी निर्णय ले रही है वह पूर्णत: राष्ट्रहित में है। संत बलराम बाबा ने कहा कि राष्ट्र की सम्पत्ति केा नुकसान पहुंचाना बड़ा अपराध है। ऐसे उपद्रवियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। स्वामी गोविंदानंद तीर्थ ने कहा कि नागरिकता कानून को इस स्वरूप में सन 1950 में ही पारित हो जाना चाहिए।
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सभा में धर्म रक्षा संघ के संयोजक आचार्य बद्रीश, अध्यक्ष सौरभ गौड़, महंत लाड़िलीशरण, महंत सुंदर दास, महामंडलेश्वर आदित्यानंद महाराज, स्वामी राघवानंद, स्वामी रघुनाथ दास, भगवान दास चौधरी, अश्विनी मिश्रा, संजय शर्मा, अनुज शास्त्री, प्रशांत गोस्वामी आदि उपस्थित थे।