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'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की': नंदगांव में उल्लास, बधाइयों से गूंजा नंदभवन; श्रद्धालुओं पर लुटाए उपहार
Sun, 06 Sep 2026 01:35 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:35 PM IST
सार
मथुरा के नंदगांव में नंदोत्सव का उल्लास छाया हुआ है। नंदभवन में रविवार को श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की गूंज पूरा वातावरण कृष्यमय हो गया।
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नंदगांव में नंदोत्सव का छाया उल्लास।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाजे-बाजे री बधइयां नंदगांव, मगन सब नर-नारी की गूंज के साथ नंदगांव में नंदोत्सव का उल्लास अपने चरम पर पहुंच गया। नंदभवन से लेकर कस्बे की गलियों तक ऐसा लगा मानो स्वयं नंदबाबा के आंगन में जन्मे लाला की खुशियां मनाने पूरा ब्रज उमड़ पड़ा हो। कभी समाज गायन की मधुर तान सुनाई दी तो कभी मल्लयुद्ध, बांस बधाई, और शंकर लीला ने श्रद्धालुओं को रोमांचित किया।
नंदोत्सव पर सजाए गए भोग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद नंदमहल में पारंपरिक मल्लयुद्ध ने उत्सव में अलग रंग भर दिया। सेवायत गोस्वामियों ने प्रतीकात्मक रूप से अखाड़े में उतरकर कुश्ती की। मुकाबले के बाद दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगकर गले मिलकर ब्रज की प्रेम परंपरा का संदेश दिया। इस दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने मल्लयुद्ध में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
नंदभवन में उमड़ी भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नंदोत्सव में हास-परिहास का दौर भी चलता रहा। बरसाना के गोप नंदबाबा के जमाई की जय बोलते तो नंदगांव के गोप बृषभानु के जमाई की जयकार करते। इसी बीच भांड स्वरूप एक गोस्वामी युवक करीब 15 फुट ऊंचे बांस पर चढ़ गया और भगवान कृष्ण-बलराम की ओर मुख कर बधाई पद सुनाने लगा। यह दृश्य देखते ही नंदभवन जयकारों और तालियों से गूंज उठा।
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नंदभवन में श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भोलेनाथ ने उतारी कान्हा की नजर
नंदोत्सव के बीच हुई शंकर लीला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही। परंपरा के अनुसार भगवान शंकर बालकृष्ण के दर्शन के लिए नंदभवन पहुंचे। यशोदा मैया द्वारा तत्काल दर्शन न कराए जाने पर भोलेनाथ द्वार पर ही धूनी रमाकर बैठ गए। बाद में मैया के आग्रह पर वे भीतर पहुंचे और बालकृष्ण के दर्शन करते ही भावविह्वल हो उठे। उन्होंने मोर पंखों से कान्हा की नजर उतारी तथा राई-नमक से भी बुरी नजर दूर करने की परंपरा निभाई। लीला के इस भावपूर्ण दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
नंदोत्सव के बीच हुई शंकर लीला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही। परंपरा के अनुसार भगवान शंकर बालकृष्ण के दर्शन के लिए नंदभवन पहुंचे। यशोदा मैया द्वारा तत्काल दर्शन न कराए जाने पर भोलेनाथ द्वार पर ही धूनी रमाकर बैठ गए। बाद में मैया के आग्रह पर वे भीतर पहुंचे और बालकृष्ण के दर्शन करते ही भावविह्वल हो उठे। उन्होंने मोर पंखों से कान्हा की नजर उतारी तथा राई-नमक से भी बुरी नजर दूर करने की परंपरा निभाई। लीला के इस भावपूर्ण दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
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नंदभवन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दही-हल्दी-केसर की दधी कांधो के लिए उमड़ी भीड़
उत्सव का उल्लास उस समय और बढ़ गया जब कान्हा की दधी कांधो लेकर सेवायत नंदभवन पहुंचे। दही, हल्दी और केसर से तैयार दधी कांधो पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखते ही बना। सेवायतों ने परंपरा के अनुसार खिलौने, टॉफियां और वस्त्र लुटाए। फरुआ और पंजीरी का प्रसाद भी वितरित किया गया।
उत्सव का उल्लास उस समय और बढ़ गया जब कान्हा की दधी कांधो लेकर सेवायत नंदभवन पहुंचे। दही, हल्दी और केसर से तैयार दधी कांधो पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखते ही बना। सेवायतों ने परंपरा के अनुसार खिलौने, टॉफियां और वस्त्र लुटाए। फरुआ और पंजीरी का प्रसाद भी वितरित किया गया।