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हेरोइन रखने के जुर्म में 10 साल की सजा
Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। थाना बेवर क्षेत्र में लगभग एक वर्ष पहले 500 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़े गए आरोपी को अदालत ने 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को एक लाख रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा। जुर्माना अदा न करने पर दो वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
थाना बेवर पुलिस ने 17 मई 2013 को रात में गश्त के दौरान एक युवक को पकड़ा था। पूछताछ में उसने अपना नाम मनोज गुप्ता निवासी सब्जीमंडी काजीटोला बेवर बताया। युवक के पास से 500 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की। एडीजे बच्चू सिंह के कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। न्यायाधीश ने सुनवाई दौरान अधिवक्ता के तर्क के आधार पर मनोज को दोषी पाया। एडीजे ने मनोज को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने की।
आठ मुकदमे एनडीपीएस के विचाराधीन
आरोपी मनोज इस कारोबार से पहले से भी जुड़ा है। मनोज में विभिन्न थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत आठ मुकदमे और दर्ज हैं। जो न्यायालय में विचाराधीन हैं।
मनोज ने भरा था तलाशी का सहमति पत्र
एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी के लिए मनोज चाहता तो किसी राजपत्रित अधिकारी के सामने तलाशी करा सकता था। लेकिन मनोज ने पुलिस से तलाशी कराने का सहमति पत्र भरा था।
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थाना बेवर पुलिस ने 17 मई 2013 को रात में गश्त के दौरान एक युवक को पकड़ा था। पूछताछ में उसने अपना नाम मनोज गुप्ता निवासी सब्जीमंडी काजीटोला बेवर बताया। युवक के पास से 500 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की। एडीजे बच्चू सिंह के कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। न्यायाधीश ने सुनवाई दौरान अधिवक्ता के तर्क के आधार पर मनोज को दोषी पाया। एडीजे ने मनोज को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने की।
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आठ मुकदमे एनडीपीएस के विचाराधीन
आरोपी मनोज इस कारोबार से पहले से भी जुड़ा है। मनोज में विभिन्न थानों में एनडीपीएस एक्ट के तहत आठ मुकदमे और दर्ज हैं। जो न्यायालय में विचाराधीन हैं।
मनोज ने भरा था तलाशी का सहमति पत्र
एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी के लिए मनोज चाहता तो किसी राजपत्रित अधिकारी के सामने तलाशी करा सकता था। लेकिन मनोज ने पुलिस से तलाशी कराने का सहमति पत्र भरा था।
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