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Mahoba News: बूंदाबांदी से पकी खड़ी गेहूं की फसलें भींगी, किसान परेशान
Sat, 21 Mar 2026 12:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:05 AM IST
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महोबा/कुलपहाड़/श्रीनगर। बुंदेलखंड की पठारी धरती पर बेमौसम बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बारिश व बूंदाबांदी से पकी खड़ी फसलें भीग गईं। जिले में सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को हुआ। किसान पॉलीथिन ढककर फसलों का बचाव करते नजर आए। फसलों के भीगने से भारी नुकसान की आशंका है।
जनपद में इस बार रबी सीजन के दौरान करीब 2.32 लाख हेक्टेयर पर फसल बोई गई। जिसमें एक लाख दो हजार हेक्टेयर में गेहूं, 40 हजार हेक्टेयर में सरसों, 70 हजार हेक्टेयर में मटर और 20 हजार हेक्टेयर पर चना की फसल बोई गई थी। सरसों की फसल पहले ही कट चुकी है। मौसम विभाग की ओर से दो दिन पहले ही बारिश के साथ ही बिजली गिरने की संभावना की चेतावनी जारी की गई थी। बृहस्पतिवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। रात करीब 11 बजे अचानक तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी का सिलसिला रुक-रुक कर चलता रहा। वहीं, शुक्रवार की सुबह भी हल्की बारिश के बाद करीब एक घंटे तक बूंदाबांदी हुई। ऐसे में जिन किसानों की फसल खेतों में मड़ाई के लिए या फिर पकी खड़ी थीं वह भीग गईं। इससे किसान परेशान नजर आए। मड़ाई के लिए एकत्र की गई फसलों को किसी तरह बचाने के लिए किसान पॉलीथिन ढकते रहे। फसलें भीगने से किसानों को दाना काला पड़ने की आशंका है।
कुलपहाड़ संवाद के अनुसार शुक्रवार की सुबह अचानक मौसम के बदलाव ने किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर दी। आंधी के साथ ही बारिश और बूंदाबांदी को देखते हुए किसान फसल के उत्पाद को सुरक्षित सहेजने में जुटे रहे। हालांकि, शाम तक मौसम खराब बना रहा लेकिन बारिश न होने पर किसानों ने राहत की सांस ली। मौसम विभाग ने शुक्रवार को आंधी तूफान व बारिश की संभावना बताते हुए चेतावनी जारी की थी। खराब मौसम की जानकारी मिलते ही किसानों ने सुबह से ही खेतों में कटी पड़ी फसल को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया। श्रीनगर संवाद के अनुसार बीती रात तेज आंधी के साथ हुई बेमौसम बारिश से किसानों की खेत में खड़ी फसल भीग गई। फसल को बचाए जाने के लिए किसान परेशान रहे और खेतों में फसल को ढकते नजर आए। क्षेत्र में खेतों में किसान अपनी फसलों को काटकर एकत्र कर रहे हैं। रात को तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं। उधर, जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह का कहना है कि हल्की बारिश हुई है। फसल को ज्यादा नुकसान नहीं है। सरसों की फसल पहले ही कट चुकी है।
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जनपद में इस बार रबी सीजन के दौरान करीब 2.32 लाख हेक्टेयर पर फसल बोई गई। जिसमें एक लाख दो हजार हेक्टेयर में गेहूं, 40 हजार हेक्टेयर में सरसों, 70 हजार हेक्टेयर में मटर और 20 हजार हेक्टेयर पर चना की फसल बोई गई थी। सरसों की फसल पहले ही कट चुकी है। मौसम विभाग की ओर से दो दिन पहले ही बारिश के साथ ही बिजली गिरने की संभावना की चेतावनी जारी की गई थी। बृहस्पतिवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। रात करीब 11 बजे अचानक तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी का सिलसिला रुक-रुक कर चलता रहा। वहीं, शुक्रवार की सुबह भी हल्की बारिश के बाद करीब एक घंटे तक बूंदाबांदी हुई। ऐसे में जिन किसानों की फसल खेतों में मड़ाई के लिए या फिर पकी खड़ी थीं वह भीग गईं। इससे किसान परेशान नजर आए। मड़ाई के लिए एकत्र की गई फसलों को किसी तरह बचाने के लिए किसान पॉलीथिन ढकते रहे। फसलें भीगने से किसानों को दाना काला पड़ने की आशंका है।
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कुलपहाड़ संवाद के अनुसार शुक्रवार की सुबह अचानक मौसम के बदलाव ने किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर दी। आंधी के साथ ही बारिश और बूंदाबांदी को देखते हुए किसान फसल के उत्पाद को सुरक्षित सहेजने में जुटे रहे। हालांकि, शाम तक मौसम खराब बना रहा लेकिन बारिश न होने पर किसानों ने राहत की सांस ली। मौसम विभाग ने शुक्रवार को आंधी तूफान व बारिश की संभावना बताते हुए चेतावनी जारी की थी। खराब मौसम की जानकारी मिलते ही किसानों ने सुबह से ही खेतों में कटी पड़ी फसल को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया। श्रीनगर संवाद के अनुसार बीती रात तेज आंधी के साथ हुई बेमौसम बारिश से किसानों की खेत में खड़ी फसल भीग गई। फसल को बचाए जाने के लिए किसान परेशान रहे और खेतों में फसल को ढकते नजर आए। क्षेत्र में खेतों में किसान अपनी फसलों को काटकर एकत्र कर रहे हैं। रात को तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं। उधर, जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह का कहना है कि हल्की बारिश हुई है। फसल को ज्यादा नुकसान नहीं है। सरसों की फसल पहले ही कट चुकी है।
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