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कौन हैं बरानिका इलांगोवन?: 2023 में खाली हाथ लौटीं, 2026 में रचा इतिहास; पोल वॉल्ट में भारत को दिलाया पहला पदक

Fri, 25 Sep 2026 09:44 PM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया Published by: मयंक त्रिपाठी Updated Fri, 25 Sep 2026 09:44 PM IST
सार

बरानिका इलांगोवन ने 4.15 मीटर की छलांग के साथ एशियन गेम्स 2026 में महिला पोल वॉल्ट का कांस्य पदक जीता। वह एशियन गेम्स में पोल वॉल्ट पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, जिससे भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया।

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Baranica Elangovan Makes History, Wins Indias First Asian Games Pole Vault Medal
बरानिका इलांगोवन - फोटो : IANS

विस्तार

तमिलनाडु के एक छोटे से गांव के कृषि परिवार से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचना बरानिका इलांगोवन के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। शुक्रवार को नागोया में जब उन्होंने महिला पोल वॉल्ट में 4.15 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता, तो वह सिर्फ उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक नहीं थी, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का भी नया अध्याय था। बरानिका एशियन गेम्स में पोल वॉल्ट पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं।
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29 वर्षीय बरानिका ने कजाखस्तान की पोलिना इवानोवा के साथ कांस्य साझा किया। दोनों ने 4.15 मीटर की समान ऊंचाई पार की और उनके सफल प्रयासों का रिकॉर्ड भी एक जैसा रहा। ऐसे में दोनों को अलग नहीं किया जा सका और दोनों को संयुक्त रूप से कांस्य पदक मिला। लेकिन बरानिका के लिए यह पदक केवल एक प्रतियोगिता का नतीजा नहीं है। इसके पीछे कई वर्षों की मेहनत, असफलताओं से उबरने और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कहानी है।
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छठी कक्षा में शुरू हुआ सफर
मयिलादुथुरई जिले के कुथालम में कृषि परिवार में जन्मीं बरानिका ने छठी कक्षा से एथलेटिक्स शुरू किया था। शुरुआत में उनका ध्यान पोल वॉल्ट पर नहीं था। वह स्प्रिंट के अलावा लंबी कूद और ट्रिपल जंप जैसी स्पर्धाओं में हिस्सा लेती थीं। बाद में चेन्नई के एथिराज कॉलेज फॉर वुमेन में दाखिला मिलने के बाद उनका सफर आगे बढ़ा। उन्होंने एमओपी वैष्णव कॉलेज फॉर वुमेन से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की।

2018 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में 3.80 मीटर की छलांग लगाकर मीट रिकॉर्ड बनाने वाली बरानिका को पुडुमई पेन्न फाउंडेशन ने कोच मिल्बर रसेल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिलाया। उनके करियर में एक बड़ा मोड़ 2022 में आया, जब भुवनेश्वर में उनके प्रदर्शन ने ओडिशा रिलायंस फाउंडेशन एथलेटिक्स हाई परफॉर्मेंस सेंटर के मुख्य कोच मार्टिन ओवेन्स का ध्यान खींचा। इसके बाद वह दिसंबर 2022 में भुवनेश्वर जाकर प्रशिक्षण लेने लगीं।
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जब एक असफलता ने रोका, तो बरानिका ने खुद को फिर खड़ा किया
  • बरानिका का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 2023 में उन्होंने बंगलूरू में इंडियन ग्रां प्री में 4.10 मीटर की छलांग लगाई, लेकिन इसके बाद भुवनेश्वर में इंटर-स्टेट मीट में 3.80 मीटर से अधिक ऊंचाई पार नहीं कर सकीं। यही प्रदर्शन उन्हें 2022 एशियन गेम्स की भारतीय टीम में जगह दिलाने से रोक गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
  • 2026 उनके करियर के लिए बदलाव का साल साबित हुआ। मार्च में उन्होंने भुवनेश्वर में नेशनल इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 4.22 मीटर की छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और महिला पोल वॉल्ट में पहली भारतीय इंडोर नेशनल चैंपियन बनीं। उन्होंने रोसी मीना पॉलराज के 2022 में बनाए 4.21 मीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
  • सिर्फ दो महीने बाद उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड फिर तोड़ दिया। मई में भुवनेश्वर में 4.23 मीटर की छलांग लगाकर बरानिका ने भारतीय पोल वॉल्ट का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया।
  • रिकॉर्ड हालांकि ज्यादा समय तक उनके नाम नहीं रहा। जुलाई में उनकी ही ट्रेनिंग पार्टनर सिंधुश्री गणेशा ने इसे पीछे छोड़ दिया। लेकिन बरानिका और सिंधुश्री की इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने भारतीय महिला पोल वॉल्ट के स्तर को लगातार ऊपर उठाया।
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एशियन गेम्स में जब इतिहास उनके सामने था
नागोया में बरानिका ने अपने अंतिम मुकाबले की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की। उन्होंने 3.85 मीटर और 4.00 मीटर की ऊंचाई पहली कोशिश में पार की। 4.15 मीटर पर उन्हें दो प्रयास करने पड़े, लेकिन आखिरकार उन्होंने यह ऊंचाई भी पार कर ली।

इसके बाद चुनौती 4.25 मीटर की थी। बरानिका इस ऊंचाई को पार नहीं कर सकीं और तीन असफल प्रयासों के बाद उनका मुकाबला समाप्त हुआ। मगर तब तक वह इतिहास रच चुकी थीं। उनकी हमवतन सिंधुश्री गणेशा हालांकि फाइनल में कोई वैध प्रयास दर्ज नहीं करा सकीं और बिना रिकॉर्डेड हाइट के प्रतियोगिता से बाहर हो गईं।

एक साल में बदली तस्वीर
  • बरानिका ने जिस तरह 2026 में अपने प्रदर्शन का स्तर उठाया, उसने उनके एशियन गेम्स पदक की नींव रखी।
  • मार्च में 4.22 मीटर और मई में 4.23 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के बाद उन्होंने मई में इंडियन ओपन एथलेटिक्स सीरीज और 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता।
  • एशियन गेम्स में उनका 4.15 मीटर का प्रयास उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 4.23 मीटर से कम जरूर रहा, लेकिन यह छलांग ऐतिहासिक महत्व रखती है। क्योंकि इसके साथ भारत को एशियन गेम्स में महिला पोल वॉल्ट का अपना पहला पदक मिला।
  • एक समय असफल प्रदर्शन के कारण बड़ी प्रतियोगिता से बाहर रह गई बरानिका ने कुछ ही वर्षों में अपने खेल की सीमाएं लगातार आगे बढ़ाईं और अब उनका नाम भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में दर्ज हो चुका है।
  • कुथालम के खेतों से शुरू हुआ सफर नागोया के पोडियम तक पहुंच चुका है। बरानिका इलांगोवन की कांस्य छलांग ने सिर्फ एक पदक नहीं जीता, बल्कि भारतीय महिला पोल वॉल्ट को एक नई पहचान भी दे दी।
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