{"_id":"6ab573b30e17ba47ba0537b7","slug":"sleeper-buses-running-without-permits-are-turning-into-harbingers-of-death-mahoba-news-c-225-1-mah1001-129084-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahoba News: यमराज बनकर दौड़ रहीं बिना परमिट स्लीपर बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahoba News: यमराज बनकर दौड़ रहीं बिना परमिट स्लीपर बसें
विज्ञापन
महोबा। यमराज बनकर सड़कों पर दौड़ रही बिना परमिट की स्लीपर बसें यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही हैं। बस माफिया के सिंडीकेट ने अफसरों की आंखों में धूल झोंक रखी है। जिले में विभिन्न स्थलों पर इन बसों में यात्रा के लिए टिकट बुकिंग कार्यालय खुले हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को अपनी जान पर खेलकर इन बसों में सफर करना पड़ रहा है।
बृहस्पतिवार को हुई स्लीपर बस में आग की घटना ने सभी झकझोर कर रख दिया है। शहर में बड़ी संख्या में बिना परमिट की निजी स्लीपर बसों का संचालन होता है। यह बसें शहर से विभिन्न स्थानों के लिए रवाना होती हैं। जगह-जगह टिकट बुकिंग के कार्यालय खुले हैं। शहर के डाक बंगला मैदान के पास, लवकुशनगर तिराहा व बाइपास मार्ग से इन बसों का संचालन किया जाता है। यहां बसें महोबा शहर के साथ ही कुलपहाड़, पनवाड़ी, चरखारी, मुस्करा से होते हुए गुजरती हैं। स्लीपर बसों में नीचे की साइड में डिकी व छत पर भारी मात्रा में लगेज भी ढोया जाता है।
दिल्ली से आने वाला ज्यादातर लगेज इन्हीं स्लीपर बसों से शहर में आता है। बिना परमिट स्लीपर बसों का संचालन करने वाले बस माफियाओं का सिंडीकेट बड़ा है और दूर तक इसके तार जुड़े हैं। ऐसे में जिम्मेदार इन निजी स्लीपर बसों पर कार्रवाई करने की आमतौर पर हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इससे शहर में बिना परमिट के ही स्लीपर बसों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। एआरटीओ दयाशंकर का कहना है कि बसों की नियमित चेकिंग की जा रही है। एक सप्ताह में तीन स्लीपर बसों को बंद किया गया है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को हुई स्लीपर बस में आग की घटना ने सभी झकझोर कर रख दिया है। शहर में बड़ी संख्या में बिना परमिट की निजी स्लीपर बसों का संचालन होता है। यह बसें शहर से विभिन्न स्थानों के लिए रवाना होती हैं। जगह-जगह टिकट बुकिंग के कार्यालय खुले हैं। शहर के डाक बंगला मैदान के पास, लवकुशनगर तिराहा व बाइपास मार्ग से इन बसों का संचालन किया जाता है। यहां बसें महोबा शहर के साथ ही कुलपहाड़, पनवाड़ी, चरखारी, मुस्करा से होते हुए गुजरती हैं। स्लीपर बसों में नीचे की साइड में डिकी व छत पर भारी मात्रा में लगेज भी ढोया जाता है।
विज्ञापन
दिल्ली से आने वाला ज्यादातर लगेज इन्हीं स्लीपर बसों से शहर में आता है। बिना परमिट स्लीपर बसों का संचालन करने वाले बस माफियाओं का सिंडीकेट बड़ा है और दूर तक इसके तार जुड़े हैं। ऐसे में जिम्मेदार इन निजी स्लीपर बसों पर कार्रवाई करने की आमतौर पर हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इससे शहर में बिना परमिट के ही स्लीपर बसों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। एआरटीओ दयाशंकर का कहना है कि बसों की नियमित चेकिंग की जा रही है। एक सप्ताह में तीन स्लीपर बसों को बंद किया गया है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
विज्ञापन