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परचून दुकानदार के बेटे का नाभिकीय वैज्ञानिक पद पर हुआ चयन
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नाभिकीय वैज्ञानिक बने चंचल गुप्ता।
- फोटो : MAHOBA
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कबरई (महोबा)। कस्बे के एक साधारण परिवार में जन्मे चंचल गुप्ता का चयन भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बॉर्क) कलपक्कम में नाभिकीय वैज्ञानिक पद पर हुआ है। चंचल के पिता घर पर ही परचून की दुकान चलाते हैैं। नाभिकीय वैज्ञानिक पद पर चयनित होकर चंचल ने न सिर्फ परिवार बल्कि जिले का नाम रोशन किया है।
कस्बे के विशाल नगर निवासी राममोहन गुप्ता के पुत्र चंचल गुप्ता ने वर्ष 2014 में कानपुर के जयनारायण विद्यामंदिर इंटर कॉलेज से 92.8 प्रतिशत अंक हासिल कर इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आसाम से 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर बीटेक की परीक्षा पास की। बीटेक में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर चंचल को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया गया था। 16 अगस्त 2019 को भारी उद्योग मंत्रालय में डिजाइनिंग इंजीनियर के पद पर उनका चयन हुआ। इसके बाद 26 सितंबर 2021 को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित वैज्ञानिक परीक्षा में भाग लिया। जिसका परिणाम एक दिसंबर को जारी हुआ। जिसमें चंचल ने देश में 33वीं रैैंक हासिल की। जिससे उनका चयन बॉर्क में नाभिकीय वैज्ञानिक के पद पर हुआ।
चंचल गुप्ता के पिता राममोहन गुप्ता ने बताया कि उनके पास महज पांच बीघा कृषि भूमि है। घर पर परचून की छोटी सी दुकान चलाकर इकलौते बेटे को पढ़ाया और उसकी जरूरतें पूरी की। बेटे के वैज्ञानिक बन जाने पर पिता राममोहन गुप्ता, मां पिंकी गुप्ता सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
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कस्बे के विशाल नगर निवासी राममोहन गुप्ता के पुत्र चंचल गुप्ता ने वर्ष 2014 में कानपुर के जयनारायण विद्यामंदिर इंटर कॉलेज से 92.8 प्रतिशत अंक हासिल कर इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आसाम से 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर बीटेक की परीक्षा पास की। बीटेक में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर चंचल को स्वर्ण पदक से पुरस्कृत किया गया था। 16 अगस्त 2019 को भारी उद्योग मंत्रालय में डिजाइनिंग इंजीनियर के पद पर उनका चयन हुआ। इसके बाद 26 सितंबर 2021 को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित वैज्ञानिक परीक्षा में भाग लिया। जिसका परिणाम एक दिसंबर को जारी हुआ। जिसमें चंचल ने देश में 33वीं रैैंक हासिल की। जिससे उनका चयन बॉर्क में नाभिकीय वैज्ञानिक के पद पर हुआ।
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चंचल गुप्ता के पिता राममोहन गुप्ता ने बताया कि उनके पास महज पांच बीघा कृषि भूमि है। घर पर परचून की छोटी सी दुकान चलाकर इकलौते बेटे को पढ़ाया और उसकी जरूरतें पूरी की। बेटे के वैज्ञानिक बन जाने पर पिता राममोहन गुप्ता, मां पिंकी गुप्ता सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
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