{"_id":"5ef381008ebc3e432d3697b7","slug":"rbsk-team-is-now-screening-children-with-people-mahoba-news-knp5673705127","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगों के साथ अब बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही आरबीएसके टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोगों के साथ अब बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही आरबीएसके टीम
विज्ञापन
फोटो 24 एमए
महोबा। कोरोना के बाद स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने से कुपोषित बच्चों की पहचान और इलाज नहीं हो पा रहा था। अब आरबीएसके यानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम बच्चों को चिह्नित कर रही है। कुपोषित बच्चे पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती कराए जाएंगे।
कोरोना संक्रमण के कारण सभी गतिविधियों पर रोक थी। स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो गए। इससे आरबीएसके के तहत बच्चों के लिए चल रही 4-डी अथवा कुपोषित बच्चों को आवश्यकतानुसार इलाज व एनआरसी में भर्ती कराने का काम बाधित था, लेकिन अब धीरे-धीरे सेवाएं पटरी पर लौट रही हैं। शासन के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षकों व आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर को पत्र भेजा है। कोरोना योद्धा के तौर पर आरबीएसके टीम सदस्य गृह भ्रमण कर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। डीईआइसी मैनेजर डॉ. अंबुज गुप्ता ने बताया कि जनपद के चारों ब्लाकों में आरबीएसके की आठ टीमें कार्यरत हैं। सीएमओ के निर्देश पर टीम सदस्यों ने घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग का काम भी शुरू कर दिया है। अभी आरबीएसके की जैतपुर टीम ने बच्चों को चिह्नित किया है। उन्हें उपचार के लिए भेजा जाएगा। कुपोषित बच्चे मिलने पर उन्हें उपचार के लिए एनआरसी में भर्ती कराया जाएगा।
महोबा। 4-डी श्रेणी में यह बीमारियां हैं शामिल बच्चों की सभी तीस प्रकार की बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों को 4-डी का नाम दिया गया है। इस 4-डी में पहला डिफिसिएंसीज यानी पोषाहार में कमी की वजह से होने वाली बीमारियां, दूसरा डिसीज यानी बच्चों की सामान्य बीमारियां, तीसरा डिफेक्ट यानी जन्मजात विकृतियों से उत्पन्न रोग एवं चौथा डेवलपमेंटल डिसीज यानी विकास में कमी वाले रोग शामिल हैं। डीईआईसी मैनेजर ने बताया कि आरबीएसके में शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
महोबा। कोरोना के बाद स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने से कुपोषित बच्चों की पहचान और इलाज नहीं हो पा रहा था। अब आरबीएसके यानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम बच्चों को चिह्नित कर रही है। कुपोषित बच्चे पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती कराए जाएंगे।
कोरोना संक्रमण के कारण सभी गतिविधियों पर रोक थी। स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो गए। इससे आरबीएसके के तहत बच्चों के लिए चल रही 4-डी अथवा कुपोषित बच्चों को आवश्यकतानुसार इलाज व एनआरसी में भर्ती कराने का काम बाधित था, लेकिन अब धीरे-धीरे सेवाएं पटरी पर लौट रही हैं। शासन के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षकों व आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर को पत्र भेजा है। कोरोना योद्धा के तौर पर आरबीएसके टीम सदस्य गृह भ्रमण कर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। डीईआइसी मैनेजर डॉ. अंबुज गुप्ता ने बताया कि जनपद के चारों ब्लाकों में आरबीएसके की आठ टीमें कार्यरत हैं। सीएमओ के निर्देश पर टीम सदस्यों ने घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग का काम भी शुरू कर दिया है। अभी आरबीएसके की जैतपुर टीम ने बच्चों को चिह्नित किया है। उन्हें उपचार के लिए भेजा जाएगा। कुपोषित बच्चे मिलने पर उन्हें उपचार के लिए एनआरसी में भर्ती कराया जाएगा।
विज्ञापन
महोबा। 4-डी श्रेणी में यह बीमारियां हैं शामिल बच्चों की सभी तीस प्रकार की बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों को 4-डी का नाम दिया गया है। इस 4-डी में पहला डिफिसिएंसीज यानी पोषाहार में कमी की वजह से होने वाली बीमारियां, दूसरा डिसीज यानी बच्चों की सामान्य बीमारियां, तीसरा डिफेक्ट यानी जन्मजात विकृतियों से उत्पन्न रोग एवं चौथा डेवलपमेंटल डिसीज यानी विकास में कमी वाले रोग शामिल हैं। डीईआईसी मैनेजर ने बताया कि आरबीएसके में शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है।
विज्ञापन