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Mahoba News: केन-बेतवा लिंक परियोजना से चंदेलकालीन तालाबों के बहुरेंगे दिन
Thu, 26 Dec 2024 04:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Thu, 26 Dec 2024 04:04 AM IST
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महोबा। केन-बेतवा लिंक परियोजना शुरू होने से जिले के चंदेलकालीन तालाबों के दिन बहुर सकते हैं। इसका फायदा जनपदवासियों को होगा। दावा किया जा रहा है कि सिंचाई व्यवस्था पहले से बेहतर जाएगी। हर खेत को पानी मिल सकेगा।
इस परियोजना से शहर में स्थित तालाबों को भी पानी मिलेगा, जिससे पेयजल की समस्या खत्म हो सकती है। चंदेल राजाओं ने बड़ी संख्या में बुंदेलखंड इलाके में तालाबों का निर्माण कराया था। बुंदेलखंड में करीब 2000 चंदेलकालीन तालाब हैं।
इनमें से करीब 500 जलाशय अब भी ठीक हालत में हैं। सभी तालाब आपस में जुड़े हुए हैं। एक तालाब के भरने के बाद उसके अतिरिक्त पानी को अगले तालाब में भरने की व्यवस्था है।
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महोबा शहर में स्थित चंदेलकालीन मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण सागर, विजय सागर, दिसरापुर तालाब में भी केन-बेतवा लिंक परियोजना का पानी पहुंचेगा। इससे जनपद में सूखे का संकट नहीं रहेगा।
यूपी के चार जिलों को होगा फायदा
केन-बेतवा लिंक परियोजना से एमपी के दस जिलों व यूपी के महोबा, झांसी, बांदा और ललितपुर को फायदा मिलेगा। परियोजना के पूरा होने पर आठ लाख 11 हजार कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। 62 हजार लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
परियोजना के तहत बनने वाली नहर से पानी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए माइक्रो इरिगेशन सिस्टम से खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से पंप के जरिए प्रेशराइज्ड पाइप लाइन डालकर सीधे खेतों में पानी पहुंचाया जाएगा।
केन और बेतवा नदी के बारे में जानिए
केन नदी बुंदलेखंड की प्रमुख नदियों में से एक है। यह नदी यमुना की सहायक नदी है। केन मध्यप्रदेश के कटनी जिले से निकलती है। यह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना में मिलती है।
इससे पहले यह 427 किमी की दूरी तय करती है। केन नदी पर पन्ना टाइगर रिजर्व के पास दौधन बांध बनाकर पानी को रोका जाएगा। इसके बाद टनल और नहर के माध्यम से पानी को बेतवा में छोड़ा जाएगा। वहीं, बेतवा नदी मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से निकलती है।
यह नदी रायसेन, भोपाल, विदिशा से होते हुए उत्तरप्रदेश के झांसी, ललितपुर जिलों से बहती हुई यमुना में मिलती है। इससे पहले यह 590 किमी की दूरी तय करती है।
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इस परियोजना से शहर में स्थित तालाबों को भी पानी मिलेगा, जिससे पेयजल की समस्या खत्म हो सकती है। चंदेल राजाओं ने बड़ी संख्या में बुंदेलखंड इलाके में तालाबों का निर्माण कराया था। बुंदेलखंड में करीब 2000 चंदेलकालीन तालाब हैं।
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इनमें से करीब 500 जलाशय अब भी ठीक हालत में हैं। सभी तालाब आपस में जुड़े हुए हैं। एक तालाब के भरने के बाद उसके अतिरिक्त पानी को अगले तालाब में भरने की व्यवस्था है।
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महोबा शहर में स्थित चंदेलकालीन मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण सागर, विजय सागर, दिसरापुर तालाब में भी केन-बेतवा लिंक परियोजना का पानी पहुंचेगा। इससे जनपद में सूखे का संकट नहीं रहेगा।
यूपी के चार जिलों को होगा फायदा
केन-बेतवा लिंक परियोजना से एमपी के दस जिलों व यूपी के महोबा, झांसी, बांदा और ललितपुर को फायदा मिलेगा। परियोजना के पूरा होने पर आठ लाख 11 हजार कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। 62 हजार लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
परियोजना के तहत बनने वाली नहर से पानी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए माइक्रो इरिगेशन सिस्टम से खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से पंप के जरिए प्रेशराइज्ड पाइप लाइन डालकर सीधे खेतों में पानी पहुंचाया जाएगा।
केन और बेतवा नदी के बारे में जानिए
केन नदी बुंदलेखंड की प्रमुख नदियों में से एक है। यह नदी यमुना की सहायक नदी है। केन मध्यप्रदेश के कटनी जिले से निकलती है। यह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना में मिलती है।
इससे पहले यह 427 किमी की दूरी तय करती है। केन नदी पर पन्ना टाइगर रिजर्व के पास दौधन बांध बनाकर पानी को रोका जाएगा। इसके बाद टनल और नहर के माध्यम से पानी को बेतवा में छोड़ा जाएगा। वहीं, बेतवा नदी मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से निकलती है।
यह नदी रायसेन, भोपाल, विदिशा से होते हुए उत्तरप्रदेश के झांसी, ललितपुर जिलों से बहती हुई यमुना में मिलती है। इससे पहले यह 590 किमी की दूरी तय करती है।

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