{"_id":"5e2b32178ebc3e4b017f84b9","slug":"chhatraon-aur-mahilaaon-ko-bana-rahi-hunarmand-mahoba-news-knp5404872161","type":"story","status":"publish","title_hn":"निशुल्क प्रशिक्षण देकर महिलाओं व छात्राओं को हुनरमंद बना रही कहकशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निशुल्क प्रशिक्षण देकर महिलाओं व छात्राओं को हुनरमंद बना रही कहकशा
विज्ञापन
महोबा। जिले की महिलाओं व छात्राओं को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाने वाली समाजसेविका कहकशा जलाल की मुहिम अब रंग ला रही हैं। तीन छात्राओं के समूह से एक वर्ष पहले शुरू किए गए। निशुल्क सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण में इस समय दो दर्जन छात्राएं आत्मनिर्भर बनने के हुनर सीख रही हैं। आधा दर्जन युवतियों ने निशुल्क प्रशिक्षण लेकर स्वयं का काम शुरू कर दिया है, वह प्रतिदिन 200 रुपये से लेकर 500 रुपये तक कमा रहीं हैं। समाज सेविका के इस कार्य की लोग खुले दिल से सराहना कर रहे हैं।
एक दशक से समाजसेवा के कार्य में जुटी शहर के मोहल्ला लवकुशनगर तिराहा निवासी कहकशा जलाल किराए के मकान में रहती है। सिलाई-कढ़ाई के साथ मेहंदी व लिफाफे बनाने का हुनर सीखे कहकशा ने एक वर्ष पहले निशुल्क प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर व फीस अदा करने में अक्षम छात्राओं व महिलाओं को प्रशिक्षण देेना चालू किया। यह कारवां लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में दो दर्जन छात्राएं व महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पॉर्लर व मेहंदी बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं, जबकि आधा दर्जन से अधिक युवतियों व महिलाओं ने अपने-अपने घरों में ही स्वयं का रोजगार प्रारंभ कर दिया है। स्वयं का रोजगार करने वाली युवतियों में प्रियंका, आरती, माधुरी, किरन, रानी, रोशनी आदि शामिल हैं। समाजसेविका ने बताया कि एक वर्ष पहले उनके मोहल्ले की कुछ छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते हुनर होने के बाद भी फीस अदा कर सिलाई-कढ़ाई व अन्य प्रशिक्षण नहीं ले पा रही थी। तब उन्होंने निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की ठानी और आज कई युवतियां अपने पैरों पर खड़ी हैं। उनका काम देखकर उन्हें सुखद अनुभव होता है। बताया कि इस निशुल्क प्रशिक्षण में शासन-प्रशासन से किसी प्रकार की कोई मदद नहीं है।
इनसेट
उपकारागार की महिलाओं को भी बना रही हुनरमंद
महोबा। किराए के मकान में छात्राओं व महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाने वाली समाजसेविका जेल में भी महिलाओं को हुनरमंद बना रही है। वर्तमान में उपकारागार में निरुद्ध एक दर्जन महिलाओं को प्रतिदिन सिलाई-कढ़ाई के साथ मेहंदी व लिफाफा बनाने के गुर सिखाए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें जेल से छूटने के बाद स्वयं के पैरों खड़े होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। समाजसेविका के इस कार्य की जेल में निरुद्ध महिलाएं सराहना कर रही हैं।
विज्ञापन
इनसेट
प्रशिक्षण का हुनर बच्चों की परवरिश का बना सहारा
महोबा। एक वर्ष पहले निशुल्क प्रशिक्षण लेकर हुनर सीखने वाली दो महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई का काम बच्चों की परवरिश का सहारा बना। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम शाहपहाड़ी निवासी रोशनी व लवकुशनगर तिराहा निवासी रानी के लिए प्रशिक्षण वरदान साबित हुआ। दोनों महिलाओं के पति बाहर रहते हैं और घर में किसी प्रकार की सहायता नहीं भेजते। ऐसे समय में दोनों महिलाओं ने घर पर ही सिलाई का कार्य शुरू कर इसे रोजगार का साधन बनाया। प्रतिदिन 200 से 500 रुपये कमाकर अपना व बच्चों का पेट पाल रही हैं।
विज्ञापन
एक दशक से समाजसेवा के कार्य में जुटी शहर के मोहल्ला लवकुशनगर तिराहा निवासी कहकशा जलाल किराए के मकान में रहती है। सिलाई-कढ़ाई के साथ मेहंदी व लिफाफे बनाने का हुनर सीखे कहकशा ने एक वर्ष पहले निशुल्क प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर व फीस अदा करने में अक्षम छात्राओं व महिलाओं को प्रशिक्षण देेना चालू किया। यह कारवां लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में दो दर्जन छात्राएं व महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पॉर्लर व मेहंदी बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं, जबकि आधा दर्जन से अधिक युवतियों व महिलाओं ने अपने-अपने घरों में ही स्वयं का रोजगार प्रारंभ कर दिया है। स्वयं का रोजगार करने वाली युवतियों में प्रियंका, आरती, माधुरी, किरन, रानी, रोशनी आदि शामिल हैं। समाजसेविका ने बताया कि एक वर्ष पहले उनके मोहल्ले की कुछ छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते हुनर होने के बाद भी फीस अदा कर सिलाई-कढ़ाई व अन्य प्रशिक्षण नहीं ले पा रही थी। तब उन्होंने निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की ठानी और आज कई युवतियां अपने पैरों पर खड़ी हैं। उनका काम देखकर उन्हें सुखद अनुभव होता है। बताया कि इस निशुल्क प्रशिक्षण में शासन-प्रशासन से किसी प्रकार की कोई मदद नहीं है।
विज्ञापन
इनसेट
उपकारागार की महिलाओं को भी बना रही हुनरमंद
महोबा। किराए के मकान में छात्राओं व महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाने वाली समाजसेविका जेल में भी महिलाओं को हुनरमंद बना रही है। वर्तमान में उपकारागार में निरुद्ध एक दर्जन महिलाओं को प्रतिदिन सिलाई-कढ़ाई के साथ मेहंदी व लिफाफा बनाने के गुर सिखाए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें जेल से छूटने के बाद स्वयं के पैरों खड़े होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। समाजसेविका के इस कार्य की जेल में निरुद्ध महिलाएं सराहना कर रही हैं।
विज्ञापन
इनसेट
प्रशिक्षण का हुनर बच्चों की परवरिश का बना सहारा
महोबा। एक वर्ष पहले निशुल्क प्रशिक्षण लेकर हुनर सीखने वाली दो महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई का काम बच्चों की परवरिश का सहारा बना। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम शाहपहाड़ी निवासी रोशनी व लवकुशनगर तिराहा निवासी रानी के लिए प्रशिक्षण वरदान साबित हुआ। दोनों महिलाओं के पति बाहर रहते हैं और घर में किसी प्रकार की सहायता नहीं भेजते। ऐसे समय में दोनों महिलाओं ने घर पर ही सिलाई का कार्य शुरू कर इसे रोजगार का साधन बनाया। प्रतिदिन 200 से 500 रुपये कमाकर अपना व बच्चों का पेट पाल रही हैं।