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हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है आस्ताना

Fri, 19 Dec 2014 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा Updated Fri, 19 Dec 2014 12:46 AM IST
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Astana is a symbol of Hindu-Muslim unity

कौमी एकता और धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक बादशाहे हिरात (अफगानिस्तान) सूफी संत बाबा पीर मुबारक शाह का आस्ताना हिंदू-मुस्लिमाें की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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उर्स मुबारक के मौके पर आस्ताने की चौखट पर माथा टेककर मन्नतें मांगने वाले अकीदतमंदाें की भीड़ उमड़ती है। पीर मुबारक शाह का उर्स 20 दिसंबर तक चलेगा।

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उर्स में शिरकत करने वालों की भीड़ जुटना शुरू हो गई है। पीर मुबारक शाह के उर्स में हर साल हजारों की भीड़ जुटती है। यहां पर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के जिलाें से लोग शिरकत करने आते हैं।

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तीन दिन तक चलने वाले उर्स में आने वाले लोगाें के खानपान और ठहरने की व्यवस्थाएं सज्जादा नशीन द्वारा की जाती हैं। सज्जादा नशीन हाजी अलीमउद्दीन शाह ने बताया कि उर्स 20 दिसंबर तक चलेगा।

मजार-ए-अकदस पर 19 दिसंबर को सुबह फजिर की नमाज के बाद कुरानख्वानी होगी और इसके बाद दोपहर में फातिहा और लंगर होगा। रात में कव्वाली का कार्यक्रम किया जाएगा।


बादशाहे हिरात पीर मुबारक शाह संवत 1306 में राजपाठ छोड़कर हिंदुस्तान आए। उस वक्त ख्वाजा मुईनउद्दीन चिश्ती (ख्वाजा गरीब नवाज) का जमाना था। उन्हाेंने सबसे पहले अजमेर शरीफ ख्वाजा साहब की दरगाह में पहुंचकर हाजिरी दी। यहां काफी दिनाें तक आपने कयाम किया।


बाद में ख्वाजा साहब को गुरू बना लिया। इसके बाद वह महोबा आए, यहां पर कीरत पाल की हुकूमत थी। मुबारक शाह ने राजा कीरत पाल व उनके गुरू दीपक नाथ सिद्ध को उपदेश से प्रभावित किया। इस पर राजा कीरत पाल ने उन्हें 650 बीघा माफी व 68 बीघा मोहल्लेवासी भूमि दी थी।

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