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Maharajganj News: युवा, बच्चे और महिलाएं बनीं ढाल...तस्कर हो रहे मालामाल

Fri, 04 Jul 2025 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 04 Jul 2025 01:11 AM IST
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Youth, children and women became shields...smugglers are getting rich
महराजगंज। बेरोजगारी और महिलाओं की जरूरत को भांपकर अब तस्करों ने इन्हें कैरियर के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। लाभ का छोटा हिस्सा उनकी झोली में आता है। बाकी से तस्कर अपनी तिजोरी में भरते हैं।
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बॉर्डर क्षेत्र में उनके मजबूत नेटवर्क की वजह से धंधे पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के बेरोजगार युवा, महिलाओं के साथ बच्चों को भी कैरियर बनाकर तस्कर मालामाल हो रहे हैं।
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सूत्रों की मानें तो जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करों ने बेरोजगार युवाओं के साथ महिलाओं को कैरियर के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। चंद पैसों के लिए सीमावर्ती क्षेत्र की गरीब महिलाएं कैरियर का काम करने को तैयार हो जा रही हैं।
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इसके बदले उन्हें पांच से सात सौ रुपये दिए जाते हैं। इस समय महिलाएं, पुरुष और बच्चे खुलेआम चीनी, चाइनीज सेब, कॉस्मेटिक सामान, सुपारी, इलायची और कपड़ों को तस्करी कर सरहद पार पहुंचा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि अब चाइनीज किशमिश भी नेपाल के मार्केट में आ गई है, जिसे सिर्फ पचास रुपये प्रत्येक बॉक्स लेकर जिले में पहुंचाया जा रहा है। पकड़े जाने पर महिलाएं और बच्चे रोने लगते हैं। सोनौली कस्बे के दो नंबर गली, तीन नंबर और एसएसबी रोड स्थित एक काॅलोनी, श्यामकाट बागीचा, फरेंदी तिवारी बाजार, भगवानपुर बाजार और केवटलिया सीमा से भी सामान की तस्करी हो रही है। बीते एक माह से नेपाल पुलिस की सक्रियता है, जिसकी वजह से नेपाल पुलिस प्रतिदिन भारत से तस्करी कर नेपाल पहुंच रहे सामानों को बरामद कर रही है। इनमें यूरिया, काजू, बादाम और कपड़े शामिल हैं।
एक दो गत्ता कपड़े के मिलते हैं पांच सौ : नाम नहीं छपने की शर्त पर कुछ महिलाओं ने बताया कि बेलहिया स्थित दो से तीन किराने की दुकान से काॅस्मेटिक और चाइनीज सामानों को सोनौली बस डिपो तक लाने के लिए पांच सौ रुपये मिल जाते हैं। ठीक इसी तरह सोनौली कपड़े की दुकानों से एक साड़ी का 90 से 100 रुपये पीस बुटवल पहुंचाने के लिए मिलता है। महंगे सूट और लहंगे के एक हजार रुपये तक मिल जाते हैं। एक बार में दो से पांच पीस कपड़ा बेलहिया तक पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद दूसरा आदमी बाइक से आगे लेकर जाता है। इस काम में करीब 50 युवा, बच्चे और महिलाएं लगी हैं। कुछ चीनी लेकर जाने वाले युवकों ने बताया कि एक बोरी में 50 किलो चीनी रहती है। प्रति बोरी पांच सौ मिलते हैं। इस तरह कुछ ही घंटे में एक हजार रुपये मिल जाते हैं।

महिलाओं और बच्चों का सहारा लिया जाना ठीक नहीं : पूर्वांचल ग्रामीण सेवा समिति सोनौली की इंचार्ज पुष्पा चौधरी ने बताया कि सामानों की तस्करी के लिए गरीब महिलाओं और बच्चों का सहारा लिया जाना ठीक नहीं है। इसे रोकना बहुत जरूरी है। सीमावर्ती क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर उनको रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
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