फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   The committee kept waiting for complaints, while Waqf properties ended up in the possession of others.

Maharajganj News: शिकायत का इंतजार करती रही कमेटी, दूसरों के कब्जे में चली गईं वक्फ संपत्तियां

Wed, 24 Jun 2026 01:55 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 01:55 AM IST
विज्ञापन
The committee kept waiting for complaints, while Waqf properties ended up in the possession of others.
2021 में गठित की गई थी कमेटी, एक भी शिकायत नहीं मिली
विज्ञापन


वामसी पोर्टल पर दर्ज थीं जनपद की 585 वक्फ संपत्तियां, उम्मीद पर सुन्नी वक्फ की 249 संपत्तियां ही अपलोड

महराजगंज। वक्फ संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद जिले में वक्फ संपत्तियों के डाटा फीड में गड़बड़झाला दिख रहा है। उम्मीद पोर्टल पर सुन्नी वक्फ बोर्ड की सिर्फ 249 संपत्तियां ही अपलोड हो सकी है। जबकि इससे पहले की प्रक्रिया में वामसी पोर्टल पर जिले की 585 वक्फ संपत्तियां दर्ज थीं। इन संपत्तियों को मूल स्वरूप में लाने के लिए बनी कमेटी सीमित अधिकारों का रोना रो रही है।
केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों के नाम पर चल रहे खेल पर विराम लगाने के लिए पिछले साल वक्फ संशोधन लागू किया था। इसके बाद वक्फ संपत्तियों को सूचीबद्ध करते हुए उम्मीद पोर्टल पर अपलोड कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी थी। पूरे एक वर्ष तक चली यह प्रक्रिया 5 जून 2026 को समाप्त हुई। इसके तहत सुन्नी वक्फ बोर्ड की सिर्फ 249 संपत्तियां ही चेकर जांच के बाद अप्रूवल पा सकीं। बाकी 91 संपत्तियां रिजेक्टड सूची का हिस्सा बनीं।
विज्ञापन


अगर दोनों वर्ग की संपत्तियां को मिला दी जाएं तो भी यह संख्या सिर्फ 340 ही हो रही है। वक्फ संशोधन अधिनियम आने से पहले राज्य सरकार के वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया (वामसी) पोर्टल पर जनपद की 585 वक्फ संपत्तियां दर्ज थीं। ऐसे में बाकी संपत्ति कहां चली गईं, यह स्पष्ट नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पांच सदस्यों की बनी थी कमेटी
वक्फ संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराने व दूसरे के नाम चढ़ी संपत्ति को मूल स्वरूप में लाने के लिए 2021 में दो शासनादेश जारी हुए थे। पहला शासनादेश अल्पसंख्यक अनुभाग के सचिव रवींद्र नायक व विशेष सचिव शिवाकांत द्विवेदी के हस्ताक्षर से जारी किया गया। इसमें बताया गया कि ऐसी वक्फ संपत्ति चिह्नित कराएं जो पहले वक्फ संपत्ति थी और मौजूदा समय में कब्जे या बिक्री से लोगों के नाम चढ़ गईं। लेकिन जनपद में ऐसी कोई संपत्ति नहीं चिह्नित हुई।
दूसरा शासनादेश 3 नवंबर 2021 को राज्य के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी की ओर से जारी हुआ। इसमें डीएम/अपर सर्वे कमिश्नर अध्यक्ष, एसपी सह अध्यक्ष, एडीएम सदस्य, तहसील एसडीएम सदस्य और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर वक्फ संपत्ति पर कब्जे की शिकायत का निस्तारण करना था। लेकिन गठन के बाद भी कमेटी के पास कोई मामला नहीं पहुंचा।

वक्फ की संपत्तियों पर होता रहा कब्जा
वक्फ मामलों के जानकर अमीन अंसारी ने बताया कि वक्फ की मिल्कियत सार्वजनिक हित के लिए खर्च होने का प्रावधान है। जिले में इसकी अवहेलना की गई। प्रशासनिक उदासीनता के चलते जिले में लगभग 1700 एकड़ वक्फ संपत्तियों का हेरफेर व स्वरूप बदला गया। प्रशासन के पास यह उत्तर नहीं है कि जब वक्फ मामले में ट्रिब्यूनल के अलावा हर आदेश अप्रभावी रहेगा तो फर्जी चकबंदी आदेश पर जनपद में वक्फ भूमि लोगों के नाम से कैसे दर्ज हुई। सरकार ने 2021 में वक्फ संपत्ति चिह्नित करने के लिए टास्क फोर्स गठित किया। इसका काम वक्फ से निजी मिल्कियत में बदली संपत्ति को उसका पुराना स्वरूप लौटाना था। मुतवल्लियों के इशारे पर इसकी अवहेलना हुई। जिला प्रशासन को वक्फ पर कब्जा दिख रहा था। वह शासन में आख्या भी भेज रहा था। पर, जिम्मेदार वक्फ संपत्तियों को पुराने स्वरूप में लाने के निर्देश पर शिकायत का इंतजार करते रह गए।


वर्जन

वक्फ मामलों में विभाग व प्रशासन के पास सीमित अधिकार हैं। शासन के निर्देश पर कमेटी का गठन किया गया था लेकिन यह बताना मुश्किल है कि जिले में कमेटी ने कितने मामले निस्तारित किए। नियमत: कमेटी सिर्फ शिकायत पर ही जांच कर सकती है।
-तन्मय पांडेय, डीएमओ, महराजगंज
कमेटी का काम :
वक्फ भूमि के कब्जे, विक्रय की शिकायत अथवा पूर्व चिन्हित वक्फ संपत्ति जिसकी आख्या शासन को पूर्व में भेजी जा चुकी हो की वृहद जांच पड़ताल के बाद उक्त भूमि को वक्फ संपत्ति में दोबारा दर्ज करना।
वामसी पोर्टल : अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय वक्फ संपत्ति का डेटा संरक्षित करने के लिए जीपीएस आधारित इस पोर्टल को मई 2025 से पहले तक संचालित कर रहा था जो जीपीएस ट्रैकिंग सुविधा से लैस थी। इसपर वक्फ की संपत्ति ट्रैक की जा सकती थी। औपचारिक रूप से 8 मई 2025 को इसे बंद कर दिया गया।


उम्मीद पोर्टल
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 6 जून 2025 को एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सुविधा से लैस प्रमाणित डेटा अपलोडिंग के लिए उम्मीद (यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इंपावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) पोर्टल लॉन्च किया। इसपर नए सिरे से चेक व्यवस्था (संपूर्ण प्रपत्रों की उपलब्धता की जांच) के बाद संपत्तियों को अपलोड करने का कार्य इसी माह पांच जून को पूर्ण कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article