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एक शिक्षक के भरोसे चल रही पढ़ाई
महराजगंज (ब्यूरो)
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:20 AM IST
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एक िशशिक्षक के भरोसे पढ़ाई
- फोटो : अमर उजाला
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सिसवा बाजार (महराजगंज)। कस्बे में लगभग दस दशक पूर्व स्थापित सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी के संचालित ऋषिकुल संस्कृत महाविद्यालय बहदाल हो चुका है। सन 1922 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बस्ती जनपद के मनिकापुर के नजदीक स्थित ग्राम सभा सहजनपुर निवासी रामछत्र द्विवेदी ने स्थापित किया गया था। आज के समय में इस महाविद्यालय की देख रेख जिला विद्यालय निरीक्षक करता है, मगर विभागीय लापरवाही के कारण यह महाविद्यालय पूरी तरह से उपेक्षित है। यहां व्याकरण, ज्योतिष, साहित्य व पुराण चार विषयों की शिक्षा दी जाती है।
महाविद्यालय में पंजीकृत 102 छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने की जिम्मेदारी महज एक वित्त विहीन शिक्षक के भरोसे चल रही है। पूर्व में यहां प्राचार्य सहित कुल पांच शिक्षकों की तैनाती थी, जो अलग-अलग विषयों की शिक्षा देते थे, लेकिन मौजूदा समय में एक वित्त विहीन शिक्षक सभी विषयों की शिक्षाएं देते हैं। देख रेख व रख-रखाव के अभाव में महाविद्यालय भवन जर्जर हो चूका है। महाविद्यालय पर लेखा जोखा रखने के लिए न तो किसी लिपिक और न ही साफ सफाई के लिए किसी सफाई कर्मचारी की तैनाती है। सफाई न होने से यहां हर तरफ कूड़ा व कचरा बिखरा रहता है। महाविद्यालय पर तैनात वित्त विहीन शिक्षक व कार्यवाहक प्रधानाचार्य अखिलेश पांडेय के अनुसार 126 शिक्षार्थियों में से महज 6-7 शिक्षार्थी ही पठन-पाठन के लिए आते हैं। संसाधन व सुविधाओं के अभाव में यह महाविद्यालय दिन-प्रतिदिन अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। महाविद्यालय के प्रबंधक भोला सिंह का कहना है महाविद्यालय में अध्यापकों की तैनाती व जर्जर भवन के निर्माण और अन्य संसाधनों की मांग बार बार विभाग से किया जा रहा है, लेकिन इस दिशा में विभाग ने कभी रुचि नहीं लिया। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए प्रयास किया जाएगा।
महाविद्यालय में पंजीकृत 102 छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने की जिम्मेदारी महज एक वित्त विहीन शिक्षक के भरोसे चल रही है। पूर्व में यहां प्राचार्य सहित कुल पांच शिक्षकों की तैनाती थी, जो अलग-अलग विषयों की शिक्षा देते थे, लेकिन मौजूदा समय में एक वित्त विहीन शिक्षक सभी विषयों की शिक्षाएं देते हैं। देख रेख व रख-रखाव के अभाव में महाविद्यालय भवन जर्जर हो चूका है। महाविद्यालय पर लेखा जोखा रखने के लिए न तो किसी लिपिक और न ही साफ सफाई के लिए किसी सफाई कर्मचारी की तैनाती है। सफाई न होने से यहां हर तरफ कूड़ा व कचरा बिखरा रहता है। महाविद्यालय पर तैनात वित्त विहीन शिक्षक व कार्यवाहक प्रधानाचार्य अखिलेश पांडेय के अनुसार 126 शिक्षार्थियों में से महज 6-7 शिक्षार्थी ही पठन-पाठन के लिए आते हैं। संसाधन व सुविधाओं के अभाव में यह महाविद्यालय दिन-प्रतिदिन अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। महाविद्यालय के प्रबंधक भोला सिंह का कहना है महाविद्यालय में अध्यापकों की तैनाती व जर्जर भवन के निर्माण और अन्य संसाधनों की मांग बार बार विभाग से किया जा रहा है, लेकिन इस दिशा में विभाग ने कभी रुचि नहीं लिया। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए प्रयास किया जाएगा।
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