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महिला अस्पताल में स्थानांतरित होगा एसएनसीयू वार्ड
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महिला अस्पताल में स्थानांतरित होगा एसएनसीयू वार्ड
महराजगंज। जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) को जल्द ही महिला अस्पताल में ऊपरी तल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे तीमारदारों को सुविधा होगी। वहीं, जिला अस्पताल में संक्रामक रोग वार्ड का बेड बढ़ जाएगा, जिससे अधिक मरीज भर्ती किए जा सकेंगे।
जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इसमें सात माह में 2,309 शिशुओं को जीवनदान मिल चुका है। एसएनसीयू वार्ड 26 बेड का है। इसमें बीमार नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में 0-28 दिन के वह नवजात भर्ती किए जाते हैं, जो बीमार होते हैं।
एसएनसीयू में नवजात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं। कुछ नवजात समुदाय से भी सीधे भर्ती कराए जाते हैं। कुछ नवजात जिला अस्पताल के प्रसव कक्ष से भी रेफर किए जाते हैं, जो पैदा होने के बाद रोते नहीं हैं या जो समय से पहले पैदा हो जाते हैं। जो नवजात बुखार, खांसी व निमोनिया से ग्रसित होते हैं और जिनको झटका आता है, ऐसे बच्चे भी यहां रेफर होकर आते हैं।
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एसएनसीयू वार्ड पर एक नजर
- वार्ड में कुल उपलब्ध बेड-26
- कुल भर्ती हुए नवजात-2809
- कुल स्वस्थ हुए नवजात-2305
- कुल उच्च सेंटर पर रेफर-238
फालोअप दो स्तर से किया जाता है
एसएनसीयू वार्ड से डिस्चार्ज होने वाले नवजात का उचित फालोअप दो स्तर से किया जाता है। पहला कम्युनिटी फालोअप, दूसरा फैसिलिटी फालोअप। कम्युनिटी फालोअप के दौरान आशा कार्यकर्ता गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम के तहत निर्धारित तिथियों पर नवजात शिशुओं का देखभाल करती हैं। फैसिलिटी फालोअप के दौरान जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड से आठ दिन, एक माह तथा तीन माह में फालोअप किया जाता है।
मुख्य लाइन से महिला अस्पताल को जोड़ने की तैयारी
सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि महिला अस्पताल को मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए विद्युत निगम के उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। जैसे जिला अस्पताल की मुख्य लाइन है, उसी तरह से महिला अस्पताल में भी निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए मुख्य लाइन की व्यवस्था कराई जा रही है।
महिला अस्पताल में एसएनसीयू वार्ड को शिफ्ट किया जाएगा। जरूरी कार्यों को शुरू करा दिया गया है। यह वार्ड महिला अस्पताल में होने के बाद जच्चा-बच्चा एक ही भवन में रहेंगे। तीमारदारों को देखभाल में सहूलियत होगी।
- डॉ. एके द्विवेदी, प्रभारी सीएमएस
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महराजगंज। जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) को जल्द ही महिला अस्पताल में ऊपरी तल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे तीमारदारों को सुविधा होगी। वहीं, जिला अस्पताल में संक्रामक रोग वार्ड का बेड बढ़ जाएगा, जिससे अधिक मरीज भर्ती किए जा सकेंगे।
जिला अस्पताल में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इसमें सात माह में 2,309 शिशुओं को जीवनदान मिल चुका है। एसएनसीयू वार्ड 26 बेड का है। इसमें बीमार नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में 0-28 दिन के वह नवजात भर्ती किए जाते हैं, जो बीमार होते हैं।
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एसएनसीयू में नवजात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं। कुछ नवजात समुदाय से भी सीधे भर्ती कराए जाते हैं। कुछ नवजात जिला अस्पताल के प्रसव कक्ष से भी रेफर किए जाते हैं, जो पैदा होने के बाद रोते नहीं हैं या जो समय से पहले पैदा हो जाते हैं। जो नवजात बुखार, खांसी व निमोनिया से ग्रसित होते हैं और जिनको झटका आता है, ऐसे बच्चे भी यहां रेफर होकर आते हैं।
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एसएनसीयू वार्ड पर एक नजर
- वार्ड में कुल उपलब्ध बेड-26
- कुल भर्ती हुए नवजात-2809
- कुल स्वस्थ हुए नवजात-2305
- कुल उच्च सेंटर पर रेफर-238
फालोअप दो स्तर से किया जाता है
एसएनसीयू वार्ड से डिस्चार्ज होने वाले नवजात का उचित फालोअप दो स्तर से किया जाता है। पहला कम्युनिटी फालोअप, दूसरा फैसिलिटी फालोअप। कम्युनिटी फालोअप के दौरान आशा कार्यकर्ता गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम के तहत निर्धारित तिथियों पर नवजात शिशुओं का देखभाल करती हैं। फैसिलिटी फालोअप के दौरान जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड से आठ दिन, एक माह तथा तीन माह में फालोअप किया जाता है।
मुख्य लाइन से महिला अस्पताल को जोड़ने की तैयारी
सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि महिला अस्पताल को मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए विद्युत निगम के उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। जैसे जिला अस्पताल की मुख्य लाइन है, उसी तरह से महिला अस्पताल में भी निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए मुख्य लाइन की व्यवस्था कराई जा रही है।
महिला अस्पताल में एसएनसीयू वार्ड को शिफ्ट किया जाएगा। जरूरी कार्यों को शुरू करा दिया गया है। यह वार्ड महिला अस्पताल में होने के बाद जच्चा-बच्चा एक ही भवन में रहेंगे। तीमारदारों को देखभाल में सहूलियत होगी।
- डॉ. एके द्विवेदी, प्रभारी सीएमएस