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Maharajganj News: तेंदुए के हमले से ग्रामीणों में दहशत...तारबाड़ लगाने की मांग

Fri, 26 Jun 2026 01:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 01:54 AM IST
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Panic among villagers following leopard attack... demand for fencing.
इसी जगह पर तेंदुए ने युवक पर किया था हमला। सुनी पड़ी सड़क।  
चरभरिया गांव के पास सिवान में हुई घटना, जंगल से सटे गांवों में दहशत
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ग्रामीणों का आरोप, वन विभाग चलाता है केवल जागरूकता अभियान, नहीं करता ठोस इंतजाम
महराजगंज। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल रेंज क्षेत्र के ग्रामीणों में तेंदुए के हमले की दहशत है। डोमा गांव से होकर ग्राम कालनही, चंदा गुलरभार, चरभरिया, आजाद नगर और अहिरौली होते हुए खड्डा (कुशीनगर) जाने वाले मार्ग पर आए दिन तेंदुए की चहलकदमी, पदचिह्न मिलने और हमलों की घटनाएं सामने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से केवल जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जबकि सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। लोगों ने जंगल की ओर तारबाड़ लगाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, कालानाही खुर्द निवासी किशन साहनी पुत्र सुरेश साहनी अपने साथी सूरज मद्धेशिया के साथ बुधवार रात करीब आठ बजे डोमा चौराहे से बिरयानी की दुकान बंदकर बाइक से घर लौट रहे थे। जैसे ही वे चरभरिया गांव के समीप सिवान क्षेत्र से गुजर रहे थे, पीछे से आए तेंदुए ने अचानक किशन पर हमला कर दिया। हमले से बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई, जिससे किशन के पैर में चोट आ गई। किसी तरह दोनों युवक वहां से जान बचाकर निकले। घायल को निचलौल सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
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घटना के बाद जंगल से सटे गांवों में भय का माहौल है। कालनही, चंदा गुलरभार, चरभरिया, आजाद नगर, अहिरौली समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों का आवागमन इसी मार्ग से होता है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही इस सड़क पर निकलना जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने तेंदुए के हमले में घायल युवक को विभागीय स्तर पर आर्थिक सहायता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की है। इसके लिए वन विभाग को लिखित प्रार्थना पत्र भी सौंपा गया है।
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बढ़ रहा मानव का हस्तक्षेप, लगातार सिमट रहे प्राकृतिक आवास

वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के सदस्य अरशद हुसैन ने बताया कि जंगली जानवरों के आबादी क्षेत्र की ओर आने का प्रमुख कारण उनके प्राकृतिक आवास का लगातार सिमटना है। जंगलों में मानव हस्तक्षेप बढ़ने और वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि भोजन और सुरक्षित आवास की तलाश में तेंदुए जंगल से सटे गन्ने के खेतों में शरण ले रहे हैं, जहां उन्हें पानी और शिकार दोनों आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में मानव और तेंदुए का आमना-सामना होने पर हमले की आशंका बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में तारबाड़ लगाई जाए, सड़क किनारे झाड़ियों की सफाई कराई जाए और लोगों की सुरक्षा के लिए स्थायी एवं प्रभावी इंतजाम किए जाएं, ताकि तेंदुए के बढ़ते आतंक पर अंकुश लगाया जा सके।यह खबर अमर उजाला की स्थानीय रिपोर्टिंग शैली के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें घटना, ग्रामीणों की पीड़ा, विभागीय पक्ष और विशेषज्ञ की राय को संतुलित रूप से शामिल किया गया है।
वर्जन
क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और संसाधनों की मांग को लेकर उच्चाधिकारियों को समय-समय पर मौखिक एवं लिखित रूप से अवगत कराया जाता रहा है। विभाग से बजट प्राप्त होने पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। लोगों को सतर्क रहने के लिए लगातार जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
-सुनील कुमार राव, रेंजर, निचलौल रेंज
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क्षेत्र में तेंदुए का आतंक वर्षों से बना हुआ है। लोगों को जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरना पड़ता है। सड़क के दोनों ओर घनी झाड़ियां होने के कारण रास्ता संकरा हो गया है। शाम होते ही तेंदुआ जंगल से निकलकर शिकार की तलाश में आबादी की ओर आ जाता है।
-प्रभु प्रसाद, पूर्व प्रधान, कलनही गांव
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गांव में बुनियादी संसाधनों का अभाव है। दैनिक उपयोग की अधिकांश वस्तुएं खरीदने के लिए लोगों को डोमा खास चौराहे तक जाना पड़ता है। ऐसे में इस मार्ग का उपयोग करना मजबूरी है लेकिन घर सुरक्षित पहुंचने की कोई गारंटी नहीं रहती। जंगली जानवरों के हमले का खतरा हमेशा बना रहता है।

-रविन्द्र भारती, ग्रामीण
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विभागीय उदासीनता के कारण यह सड़क लोगों के लिए खतरे का पर्याय बन चुकी है। सड़क के किनारे झाड़ियों की सफाई कराई जानी चाहिए और संवेदनशील क्षेत्रों में तारबाड़ लगाई जानी चाहिए। इसी मार्ग से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं।
- अजय राजभर, ग्रामीण
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