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बस सात दिन शेष, नहीं खाया तो जरूर खा लें फाइलेरिया की दवा : सीएमओ
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हाथीपांव से बचने के लिए दवा खाना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। बस! सात दिन...खुद का पांव हाथी जैसा होने से बचाने और हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) से बचने के लिए बस एक उपाय है। मच्छर के काटने से होने वाली फाइलेरिया लाइलाज और गंभीर बीमारी है। किसी को हो जाए तो जीवन भर ठीक नहीं होती है। इसलिए जो लोग रह गए हैं, 28 अगस्त तक दवा जरूर खा लें। आशा आपके घर पहुंचें और उस वक्त आपकी मुलाक़ात न हो तो बाद में उनसे संपर्क कर दवा जरूर खाएं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीना वर्मा ने जनपदवासियों से यह अपील करते हुए बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत 10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) चल रहा है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिला रहीं हैं। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित और कारगर है। दो साल से छोटे बच्चों, गर्भवती और गंभीर रूप से बीमार को छोड़कर सभी को यह दवा जरूर खानी है।
वेक्टर बाॅर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बीमारी का पता चलने में पांच से 15 साल लग सकते हैं, इसलिए कोई भी जोखिम न लें और न ही कोई बहाना करें, आज का यही बहाना आपको जीवनभर के लिए मुसीबत में डाल सकता है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से संक्रमित होने के बाद रोगी का पूरा जीवन दर्द और कठिनाई से बीतता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। बस! सात दिन...खुद का पांव हाथी जैसा होने से बचाने और हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) से बचने के लिए बस एक उपाय है। मच्छर के काटने से होने वाली फाइलेरिया लाइलाज और गंभीर बीमारी है। किसी को हो जाए तो जीवन भर ठीक नहीं होती है। इसलिए जो लोग रह गए हैं, 28 अगस्त तक दवा जरूर खा लें। आशा आपके घर पहुंचें और उस वक्त आपकी मुलाक़ात न हो तो बाद में उनसे संपर्क कर दवा जरूर खाएं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीना वर्मा ने जनपदवासियों से यह अपील करते हुए बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत 10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) चल रहा है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिला रहीं हैं। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित और कारगर है। दो साल से छोटे बच्चों, गर्भवती और गंभीर रूप से बीमार को छोड़कर सभी को यह दवा जरूर खानी है।
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वेक्टर बाॅर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बीमारी का पता चलने में पांच से 15 साल लग सकते हैं, इसलिए कोई भी जोखिम न लें और न ही कोई बहाना करें, आज का यही बहाना आपको जीवनभर के लिए मुसीबत में डाल सकता है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से संक्रमित होने के बाद रोगी का पूरा जीवन दर्द और कठिनाई से बीतता है।
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