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कंपोजिट ग्रांट : विद्यालय के विकास पर खर्च कर सकेंगे रकम
Sat, 23 Mar 2024 04:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 23 Mar 2024 04:25 PM IST
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महराजगंज। 3.74 करोड़ कंपोजिट ग्रांट से जिले के 1705 बेसिक स्कूलों की सूरत सुधरेगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने छात्र संख्या के हिसाब से एसएमसी (विद्यालय प्रबंधन समिति) के खाते में धनराशि भेज दी है।
विद्यालय प्रबंधन जरूरत के हिसाब से विद्यालय के विकास पर रकम खर्च कर सकेंगे। जिले में 1705 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय में दो लाख 10 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। पहले रंग-रोगन के नाम पर सभी विद्यालयों को सात से 10 हजार रुपये शासन से मिलते थे। इससे स्कूलों की न तो ठीक से रंगाई-पुताई हो पाती थी और न ही दूसरे सामान की खरीदारी।
2019-20 सत्र से सरकार ने स्कूलों में छात्र संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट आवंटित करना शुरू किया, जिससे प्रधानाध्यापक जरूरत के हिसाब से स्कूलों में काम कराते हैं। विभाग के अनुसार एक से 30 तक बच्चों की संख्या पर 10 हजार, 30 से 100 बच्चों पर 25 हजार, 100 से 250 बच्चों पर 50 हजार, 250 से 1000 बच्चों पर 75 हजार और 1000 से अधिक बच्चों वाले स्कूलों को एक लाख ग्रांट राशि जारी की जाती है। आवंटित ग्रांट को विद्यालय प्रबंधन रंगरोगन, चहारदीवारी निर्माण, ढोलक, हारमोनियम सहित शैक्षिक और खेलकूद सामग्री पर खर्च करते हैं। ग्रांट शुरू होने के बाद जिले के बेसिक विद्यालयों की सूरत बदली है। इस वर्ष 50 प्रतिशत धनराशि पहले ही मिल चुकी थी। शेष 50 प्रतिशत धनराशि अब मिली है, उसे स्कूलों में भेजी जा रही है।
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कंपोजिट ग्रांट की धनराशि छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को भेज दी गई है। विद्यालय प्रबंधन विद्यालय के विकास के लिए पैसे खर्च कर सकते हैं। इससे बेसिक विद्यालयों में बच्चों का नामांकन कराने में शिक्षक रूचि लेंगे। परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था बदलेगी।
-श्रवण कुमार गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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कंपोजिट ग्रांट से ये कार्य कर सकेंगे प्रधानाध्यापक
कंपोजिट ग्रांट से प्रधानाध्यापक विद्यालयों में मरम्मत, रंगाई-पुराई के अलावा अन्य कार्य करा सकेंगे। धनराशि को विद्यालयों में पेयजल, शिक्षण सहायक सामग्री, कक्षों में टाइल्स लगवाने, फर्स्ट एड बाॅक्स, अग्निशमन यंत्र, विद्युत उपकरण की खरीदारी, कंप्यूटर कक्ष, अनुरक्षण कार्य में खर्च कर सकते हैं। आवश्यकतानुसार पेंटिग कार्य, टाट पट्टी, चटाई, दरी, रेडियो प्रोग्राम, सांस्कृतिक कार्यक्रम के उपकरण, सामान्य सामग्री, बागवानी किट जैसी जरूरतें पूरी कर सकते हैं।
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विद्यालय प्रबंधन जरूरत के हिसाब से विद्यालय के विकास पर रकम खर्च कर सकेंगे। जिले में 1705 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय में दो लाख 10 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। पहले रंग-रोगन के नाम पर सभी विद्यालयों को सात से 10 हजार रुपये शासन से मिलते थे। इससे स्कूलों की न तो ठीक से रंगाई-पुताई हो पाती थी और न ही दूसरे सामान की खरीदारी।
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2019-20 सत्र से सरकार ने स्कूलों में छात्र संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट आवंटित करना शुरू किया, जिससे प्रधानाध्यापक जरूरत के हिसाब से स्कूलों में काम कराते हैं। विभाग के अनुसार एक से 30 तक बच्चों की संख्या पर 10 हजार, 30 से 100 बच्चों पर 25 हजार, 100 से 250 बच्चों पर 50 हजार, 250 से 1000 बच्चों पर 75 हजार और 1000 से अधिक बच्चों वाले स्कूलों को एक लाख ग्रांट राशि जारी की जाती है। आवंटित ग्रांट को विद्यालय प्रबंधन रंगरोगन, चहारदीवारी निर्माण, ढोलक, हारमोनियम सहित शैक्षिक और खेलकूद सामग्री पर खर्च करते हैं। ग्रांट शुरू होने के बाद जिले के बेसिक विद्यालयों की सूरत बदली है। इस वर्ष 50 प्रतिशत धनराशि पहले ही मिल चुकी थी। शेष 50 प्रतिशत धनराशि अब मिली है, उसे स्कूलों में भेजी जा रही है।
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कंपोजिट ग्रांट की धनराशि छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को भेज दी गई है। विद्यालय प्रबंधन विद्यालय के विकास के लिए पैसे खर्च कर सकते हैं। इससे बेसिक विद्यालयों में बच्चों का नामांकन कराने में शिक्षक रूचि लेंगे। परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था बदलेगी।
-श्रवण कुमार गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
कंपोजिट ग्रांट से ये कार्य कर सकेंगे प्रधानाध्यापक
कंपोजिट ग्रांट से प्रधानाध्यापक विद्यालयों में मरम्मत, रंगाई-पुराई के अलावा अन्य कार्य करा सकेंगे। धनराशि को विद्यालयों में पेयजल, शिक्षण सहायक सामग्री, कक्षों में टाइल्स लगवाने, फर्स्ट एड बाॅक्स, अग्निशमन यंत्र, विद्युत उपकरण की खरीदारी, कंप्यूटर कक्ष, अनुरक्षण कार्य में खर्च कर सकते हैं। आवश्यकतानुसार पेंटिग कार्य, टाट पट्टी, चटाई, दरी, रेडियो प्रोग्राम, सांस्कृतिक कार्यक्रम के उपकरण, सामान्य सामग्री, बागवानी किट जैसी जरूरतें पूरी कर सकते हैं।