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माता विंध्यवासिनी के दर्शन से भक्तों की पूरी होती है मुराद
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माता का मंदिर
- फोटो : LALITPUR
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बार (ललितपुर) कस्बा बार एवं धमना के बीच विंध्याचल पर्वत श्रंखला पर स्थित माता विंध्यवासिनी का मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। दूर दराज से आने वाले भक्तों की मुराद माता रानी पूरी करती हैं। मनौती पूर्ण होने पर लोग यहां आकर हवन, भंडारा, कथा, कन्या भोज आदि कार्यक्रम करते हैं। इस मंदिर पर वर्ष भर कन्या भोज का कार्यक्रम चलता ही रहता है। नवरात्र में विशेष पूजन अर्चन करने लोग दूर दराज से आते हैं।
माता विंध्यवासिनी मंदिर में नवदुर्गा झांकी की मूर्ति नहीं रखी जाती है। बताते है कि करीब 30 वर्ष पहले यहां पर भक्तों ने माता की मूर्ति रखकर झांकी सजाई थी। जब लोग माता की झांकी विसर्जन करने के लिए तालाब में पहुंचे तो विसर्जन करते समय झांकी मय भक्तों के तालाब में डूब गई थी। आसपास के लोगों ने किसी प्रकार भक्तों को डूबने से बचाया था तब से आज तक इस मंदिर पर माता की झांकी नहीं रखी जाती है।
मुगल काल में तोड़ दी गई थी मूर्ति
बुजुर्गो के मुताबिक मिर्जापुर की विंध्यवासिनी माता की यह छोटी बहन हैं। उन्हें छोटी बहन के रूप में यहां लोग पूजते हैं। बताते हैं कि यहां पर माता की जो मूर्ति मठ में हुआ करती थी उसे मुगल काल में तोड़फोड़ कर नष्ट कर दिया था। पर माता इस स्थान पर आज भी विराजमान हैं और लोग उन्हीं क्षतिग्रस्त मूर्तियों में माता की झलक देखकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं।
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माता विंध्यवासिनी के सिद्ध मंदिर में लोग दूर-दूराज से आकर मन्नत मांगते हैं एवं माता मंदिर के निकट ही हनुमान जी का मंदिर मनाया है। कस्बा बार निवासी पन्नालाल साहू ने भगवान भोलेनाथ के परिवार का मंदिर बनाया है।
उमाकांत गोस्वामी, ग्राम धमना
बार बांसी सड़क पर धमना एवम् बार की सीमा पर स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर बहुत ही प्राचीन और अलौकिक है। यह मंदिर मुगल शासनकाल के पूर्व में स्थापित किया गया। यहां भक्त पूजा एवं मनौती के लिए आते है।
महादेव प्रसाद गोस्वामी, कस्बा बार
फोटो-36
पहाड़ी पर स्थित माता विंध्यवासिनी का मंदिर हजारों वर्ष पुराना है पहले यह एक छोटी सी मठ के रूप में था जिसे बाद में नया रूप देकर बनवाया गया। माता यहां सबकी मन्नत पूरी करती हैं।
माधव सिंह यादव, मोतीखेरा
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माता विंध्यवासिनी मंदिर में नवदुर्गा झांकी की मूर्ति नहीं रखी जाती है। बताते है कि करीब 30 वर्ष पहले यहां पर भक्तों ने माता की मूर्ति रखकर झांकी सजाई थी। जब लोग माता की झांकी विसर्जन करने के लिए तालाब में पहुंचे तो विसर्जन करते समय झांकी मय भक्तों के तालाब में डूब गई थी। आसपास के लोगों ने किसी प्रकार भक्तों को डूबने से बचाया था तब से आज तक इस मंदिर पर माता की झांकी नहीं रखी जाती है।
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मुगल काल में तोड़ दी गई थी मूर्ति
बुजुर्गो के मुताबिक मिर्जापुर की विंध्यवासिनी माता की यह छोटी बहन हैं। उन्हें छोटी बहन के रूप में यहां लोग पूजते हैं। बताते हैं कि यहां पर माता की जो मूर्ति मठ में हुआ करती थी उसे मुगल काल में तोड़फोड़ कर नष्ट कर दिया था। पर माता इस स्थान पर आज भी विराजमान हैं और लोग उन्हीं क्षतिग्रस्त मूर्तियों में माता की झलक देखकर उनकी पूजा अर्चना करते हैं।
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माता विंध्यवासिनी के सिद्ध मंदिर में लोग दूर-दूराज से आकर मन्नत मांगते हैं एवं माता मंदिर के निकट ही हनुमान जी का मंदिर मनाया है। कस्बा बार निवासी पन्नालाल साहू ने भगवान भोलेनाथ के परिवार का मंदिर बनाया है।
उमाकांत गोस्वामी, ग्राम धमना
बार बांसी सड़क पर धमना एवम् बार की सीमा पर स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर बहुत ही प्राचीन और अलौकिक है। यह मंदिर मुगल शासनकाल के पूर्व में स्थापित किया गया। यहां भक्त पूजा एवं मनौती के लिए आते है।
महादेव प्रसाद गोस्वामी, कस्बा बार
फोटो-36
पहाड़ी पर स्थित माता विंध्यवासिनी का मंदिर हजारों वर्ष पुराना है पहले यह एक छोटी सी मठ के रूप में था जिसे बाद में नया रूप देकर बनवाया गया। माता यहां सबकी मन्नत पूरी करती हैं।
माधव सिंह यादव, मोतीखेरा