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इंद्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी तपस्या : अविचल सागर
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा कि तपाने से जैसे अशुद्ध वस्तु शुद्ध होती है, उसी तरह अपनी आत्मा को तप के माध्यम से जब तपाते हैं तो जीवन में निखार एवं परिणामों में निर्मलता आती है। वह अभिनंदनोदय तीर्थ में उत्तम तप दिवस पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनिश्री ने कहा कि इच्छाओं का निरोध भी तप है। किसी तपस्वी की जब छवि देखते हैं तो उसके प्रति श्रद्धा अपने आप होती है। उन्होंने कहा कि इंद्रिय विषयों पर विजय ही सच्ची साधना है। तप के माध्यम से आत्मा निर्मल होती है और शांति की अनुभूति होती है। धर्मसभा के प्रारंभ में आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन श्रेष्ठीजनों ने किया जबकि तत्वार्थ सूत्र का वाचन श्रेयसी जैन, अभिनय जैन और अर्घ्य समर्पण दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, सनत जैन, कैप्टन राजकुमार जैन, प्रफुल्ल जैन, पारस जैन के साथ श्रेष्ठीजनों ने किया।
तप की बताई महत्ता : जैन अटामंदिर में पं. पंकज जैन शास्त्री ने तप की महत्ता बताते हुए कहा कि मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए तपश्चरण जरूरी है। धर्मसभा के पूर्व तत्वार्थ सूत्र का वाचन स्मिता जैन लकी व साक्षी सराफ ने किया। शाम को धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें विजेता प्रतिभागी पुरस्कृत किए गए। आदिनाथ मंदिर नई बस्ती में पं. अनुज शास्त्री सांगानेर के सानिध्य में धार्मिक भजन संध्या का आयोजन हुआ। संचालन मंदिर प्रबंधक जितेंद्र जैन ने किया। सुमत चंदावली, अंकित जैन, आलोक जैन, मनीष जैन, दिनेश सतभैय्या, संतोष, राहुल भंडारी आदि मौजूद रहे।
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-- -- -- -- -- इन मंदिरों में हुए आयोजन :
आदिनाथ मंदिर सिविल लाइन में ब्रह्मचारिणी सीमा, मीना, पार्श्वनाथ जैन, नयामंदिर बड़ा मंदिर में पं. वैभव शास्त्री, वाहुबलि नगर में सोहित शास्त्री, आदिनाथ मंदिर नईबस्ती में अनुज शास्त्री प्रवचन कर रहे हैं। प्रातःकाल से ही नईबस्ती आदिनाथ मंदिर चंद्रप्रभु मंदिर डोढाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर, एम्ब्रोसिया कॉलोनी, ज्ञानोदय तीर्थ मुनिसुव्रतनाथ मंदिर गोशाला में अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है। सायंकाल जैन मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम है।
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मड़ावरा। वर्णीनगर में दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म के अवसर पर मुनि अक्षय सागर महाराज ने कहा कि अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाना ही तप है। तप द्वारा व्यक्ति नर से नारायण भी बन सकता है।
मुनि श्री के ससंघ के सानिध्य में श्री महावीर विद्याविहार के परिसर में प्रात:काल श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान आदि धार्मिक क्रियाएं एवं सोलहकारण विधान का आयोजन चल रहा है। शनिवार को श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य दयोदय गोशाला के महामंत्री नीलेश जैन, मयूराज जैन, नरेंद्र जैन, अमित जैन, दीपेश जैन डोंगरा ने प्राप्त किया।आचार्य श्री के पूजन के पश्चात संस्कृत भाषा में संपादित होने जा रही आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज की कृति ‘मूकमाटी’ महाकाव्य का विमोचन किया गया। मुनिश्री का पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य राजकुमार, शैलेष जैन, रीतेश जैन एवं संतोष जैन, साहिल बजाज ने प्राप्त किया।
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ललितपुर। मुनि अविचल सागर महाराज ने कहा कि तपाने से जैसे अशुद्ध वस्तु शुद्ध होती है, उसी तरह अपनी आत्मा को तप के माध्यम से जब तपाते हैं तो जीवन में निखार एवं परिणामों में निर्मलता आती है। वह अभिनंदनोदय तीर्थ में उत्तम तप दिवस पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनिश्री ने कहा कि इच्छाओं का निरोध भी तप है। किसी तपस्वी की जब छवि देखते हैं तो उसके प्रति श्रद्धा अपने आप होती है। उन्होंने कहा कि इंद्रिय विषयों पर विजय ही सच्ची साधना है। तप के माध्यम से आत्मा निर्मल होती है और शांति की अनुभूति होती है। धर्मसभा के प्रारंभ में आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन श्रेष्ठीजनों ने किया जबकि तत्वार्थ सूत्र का वाचन श्रेयसी जैन, अभिनय जैन और अर्घ्य समर्पण दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, सनत जैन, कैप्टन राजकुमार जैन, प्रफुल्ल जैन, पारस जैन के साथ श्रेष्ठीजनों ने किया।
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तप की बताई महत्ता : जैन अटामंदिर में पं. पंकज जैन शास्त्री ने तप की महत्ता बताते हुए कहा कि मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए तपश्चरण जरूरी है। धर्मसभा के पूर्व तत्वार्थ सूत्र का वाचन स्मिता जैन लकी व साक्षी सराफ ने किया। शाम को धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें विजेता प्रतिभागी पुरस्कृत किए गए। आदिनाथ मंदिर नई बस्ती में पं. अनुज शास्त्री सांगानेर के सानिध्य में धार्मिक भजन संध्या का आयोजन हुआ। संचालन मंदिर प्रबंधक जितेंद्र जैन ने किया। सुमत चंदावली, अंकित जैन, आलोक जैन, मनीष जैन, दिनेश सतभैय्या, संतोष, राहुल भंडारी आदि मौजूद रहे।
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आदिनाथ मंदिर सिविल लाइन में ब्रह्मचारिणी सीमा, मीना, पार्श्वनाथ जैन, नयामंदिर बड़ा मंदिर में पं. वैभव शास्त्री, वाहुबलि नगर में सोहित शास्त्री, आदिनाथ मंदिर नईबस्ती में अनुज शास्त्री प्रवचन कर रहे हैं। प्रातःकाल से ही नईबस्ती आदिनाथ मंदिर चंद्रप्रभु मंदिर डोढाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर, एम्ब्रोसिया कॉलोनी, ज्ञानोदय तीर्थ मुनिसुव्रतनाथ मंदिर गोशाला में अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है। सायंकाल जैन मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम है।
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मड़ावरा। वर्णीनगर में दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म के अवसर पर मुनि अक्षय सागर महाराज ने कहा कि अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाना ही तप है। तप द्वारा व्यक्ति नर से नारायण भी बन सकता है।
मुनि श्री के ससंघ के सानिध्य में श्री महावीर विद्याविहार के परिसर में प्रात:काल श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान आदि धार्मिक क्रियाएं एवं सोलहकारण विधान का आयोजन चल रहा है। शनिवार को श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य दयोदय गोशाला के महामंत्री नीलेश जैन, मयूराज जैन, नरेंद्र जैन, अमित जैन, दीपेश जैन डोंगरा ने प्राप्त किया।आचार्य श्री के पूजन के पश्चात संस्कृत भाषा में संपादित होने जा रही आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज की कृति ‘मूकमाटी’ महाकाव्य का विमोचन किया गया। मुनिश्री का पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य राजकुमार, शैलेष जैन, रीतेश जैन एवं संतोष जैन, साहिल बजाज ने प्राप्त किया।