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Lalitpur News: देवगढ़ से नवागढ़ तक बिखरी है जैन धर्म और पुरातत्व की अनमोल विरासत
Sun, 27 Sep 2026 01:45 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:45 AM IST
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ललितपुर। बुंदेलखंड की धरती पर इतिहास, धर्म, संस्कृति और पुरातत्व की ऐसी विरासत बिखरी है, जिसकी प्राचीनता आज भी लोगों को आकर्षित करती है। ललितपुर में देवगढ़ से नवागढ़, बानपुर, मदनपुर, दूधई, चांदपुर-जहाजपुर, पवागिरि, बांसी और शहर के अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र तक जैन धर्म से जुड़े अनेक प्राचीन तीर्थ, मंदिर, प्रतिमाएं और पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। इनमें कई स्थानों का धार्मिक महत्व सदियों पुराना है, तो कई अपनी शिल्पकला और स्थापत्य के कारण देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
जनपद के प्रमुख तीर्थक्षेत्रों में देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इससे धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। जरूरत इन स्थलों को बेहतर सड़क, परिवहन, पेयजल, बिजली, स्वच्छता, ठहरने और पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने की है। विशेषज्ञों और तीर्थक्षेत्रों से जुड़े लोगों का कहना है कि देवगढ़, नवागढ़ समेत प्रमुख जैन स्थलों को एक सर्किट के रूप में विकसित करने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।
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देवगढ़ में जैन मंदिरों के साथ गुप्तकालीन विरासत
बेतवा नदी के किनारे स्थित देवगढ़ जैन धर्म और पुरातत्व दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। देवगढ़ क्षेत्र में प्राचीन जैन मंदिरों की श्रृंखला, तीर्थंकरों की प्रतिमाएं और शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण मिलते हैं। यहां गुप्तकाल से लेकर गुर्जर-प्रतिहार और चंदेलकाल तक की कला और स्थापत्य की छाप दिखाई देती है। देवगढ़ का दशावतार मंदिर भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गुप्तकालीन इस मंदिर की स्थापत्य शैली और पत्थरों पर की गई नक्काशी भारतीय मंदिर वास्तुकला के विकास को समझने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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नवागढ़ में प्रागैतिहासिक साक्ष्यों से धार्मिक आस्था तक
महरौनी क्षेत्र का नवागढ़ प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र के साथ पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां की पहाड़ियों से प्राचीन औजार और अन्य पुरातात्विक अवशेष मिलने की जानकारी मिलती है। भगवान अरनाथ की प्राचीन प्रतिमा से जुड़े अतिशय की श्रद्धालुओं में विशेष मान्यता है। यहां गुरुकुल भी संचालित है।
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मध्यकालीन कला से आधुनिक जैन स्थापत्य तक
बानपुर में प्राचीन जैन प्रतिमाएं और सहस्रकूट चैत्यालय क्षेत्र की पहचान हैं। मदनपुर में 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच की स्थापत्य और पाषाण कला के अवशेष मिलते हैं। दूधई में प्राचीन मंदिर और शिल्पकला के उदाहरण हैं। यहां विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच स्थित जैन मंदिरों में भगवान शांतिनाथ की विशाल एकाश्म प्रतिमा विशेष आकर्षण है। ललितपुर शहर में स्थित अभिनंदनोदय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र आधुनिक जैन स्थापत्य का प्रमुख उदाहरण है। राजस्थानी नागर शैली में निर्मित इस तीर्थक्षेत्र में भगवान अभिनंदननाथ की प्राचीन प्रतिमा के साथ 21 फीट ऊंची नवीन प्रतिमा, 111 फीट ऊंचा कीर्ति स्तंभ और अनेक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।
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पवागिरि और बांसी भी आस्था के प्रमुख केंद्र
तालबेहट क्षेत्र में स्थित पवागिरि सिद्धक्षेत्र जैन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ है। यहां मुनिराजों के निर्वाण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं। वहीं बांसी क्षेत्र में प्राचीन पार्श्वनाथ प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। चांदपुर-जहाजपुर क्षेत्र में सहस्रलिंगेश्वर हजारिया महादेव मंदिर, वाराह मंदिर, भंडारिया मंदिर, विष्णु मंदिर और शांति नाथ जैन मंदिर समेत अनेक प्राचीन स्थल क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
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जनपद के प्रमुख पर्यटन स्थल
देवगढ़
जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर बेतवा नदी के किनारे स्थित देवगढ़ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां प्राचीन मंदिर, जैन मंदिर, प्रतिमाएं और विभिन्न कालखंडों की कला के उदाहरण मिलते हैं।
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दशावतार मंदिर
देवगढ़ का गुप्तकालीन दशावतार मंदिर अपनी स्थापत्य शैली और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों और पट्टिकाओं पर उकेरी गई कलाकृतियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
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मुचकुंद की गुफाएं
देवगढ़ और धौजरी क्षेत्र के आसपास पहाड़ियों और जंगलों के बीच प्राकृतिक गुफाएं हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार इनका संबंध मुचकुंद ऋषि से है।
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तालबेहट का किला
मानसरोवर झील के किनारे स्थित तालबेहट किला बुंदेलखंड के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। किले के साथ मानसरोवर झील भी पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण का केंद्र है।
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दूधई
बालाबेहट मार्ग पर स्थित दूधई में प्राचीन मंदिर और शिल्पकला के अवशेष हैं। क्षेत्र की पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित ऐतिहासिक धरोहरें इसे विशेष बनाती हैं।
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राजघाट बांध
बेतवा नदी पर बना राजघाट बांध और आसपास का प्राकृतिक परिदृश्य प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
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जिला पुरातत्व संग्रहालय
नेहरू नगर स्थित जिला पुरातत्व संग्रहालय में क्षेत्र से प्राप्त प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख और अन्य ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित रखे गए हैं।
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बोले विशेषज्ञ और तीर्थक्षेत्रों से जुड़े लोग
“हमारी संस्कृति और आस्था के प्रतीक हैं तीर्थक्षेत्र। बुंदेलखंड में हमारी विरासत बिखरी पड़ी है। इन प्राचीन क्षेत्रों की धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी को आगे आना चाहिए। देवगढ़ को जैन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।”
— अनिल जैन अंचल, अध्यक्ष, देवोदय तीर्थक्षेत्र देवगढ़
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“प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित और स्वच्छ रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। नवागढ़ के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व को देखते हुए इसे जैन सर्किट के रूप में विकसित करने पर सरकार को विचार करना चाहिए।”
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— ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत, निर्देशक, प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़
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“बुंदेलखंड और ललितपुर में अनेक प्राचीन ऐतिहासिक विरासत समेटे अतिशय एवं सिद्ध क्षेत्र हैं। ये हमारी अमूल्य धरोहर और पहचान हैं। इन तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में प्रभावी पहल की जरूरत है।”
— डॉ. सुनील संचय, संयुक्त महामंत्री, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड
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“ललितपुर में जगह-जगह प्राचीन तीर्थक्षेत्र हैं, जो हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान हैं। अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र आज पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यहां वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से तीर्थयात्री आते हैं।”
— मोदी पंकज जैन, प्रबंधक, अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र, ललितपुर
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जनपद के प्रमुख तीर्थक्षेत्रों में देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इससे धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। जरूरत इन स्थलों को बेहतर सड़क, परिवहन, पेयजल, बिजली, स्वच्छता, ठहरने और पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने की है। विशेषज्ञों और तीर्थक्षेत्रों से जुड़े लोगों का कहना है कि देवगढ़, नवागढ़ समेत प्रमुख जैन स्थलों को एक सर्किट के रूप में विकसित करने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।
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देवगढ़ में जैन मंदिरों के साथ गुप्तकालीन विरासत
बेतवा नदी के किनारे स्थित देवगढ़ जैन धर्म और पुरातत्व दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। देवगढ़ क्षेत्र में प्राचीन जैन मंदिरों की श्रृंखला, तीर्थंकरों की प्रतिमाएं और शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण मिलते हैं। यहां गुप्तकाल से लेकर गुर्जर-प्रतिहार और चंदेलकाल तक की कला और स्थापत्य की छाप दिखाई देती है। देवगढ़ का दशावतार मंदिर भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गुप्तकालीन इस मंदिर की स्थापत्य शैली और पत्थरों पर की गई नक्काशी भारतीय मंदिर वास्तुकला के विकास को समझने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नवागढ़ में प्रागैतिहासिक साक्ष्यों से धार्मिक आस्था तक
महरौनी क्षेत्र का नवागढ़ प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र के साथ पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां की पहाड़ियों से प्राचीन औजार और अन्य पुरातात्विक अवशेष मिलने की जानकारी मिलती है। भगवान अरनाथ की प्राचीन प्रतिमा से जुड़े अतिशय की श्रद्धालुओं में विशेष मान्यता है। यहां गुरुकुल भी संचालित है।
मध्यकालीन कला से आधुनिक जैन स्थापत्य तक
बानपुर में प्राचीन जैन प्रतिमाएं और सहस्रकूट चैत्यालय क्षेत्र की पहचान हैं। मदनपुर में 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच की स्थापत्य और पाषाण कला के अवशेष मिलते हैं। दूधई में प्राचीन मंदिर और शिल्पकला के उदाहरण हैं। यहां विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच स्थित जैन मंदिरों में भगवान शांतिनाथ की विशाल एकाश्म प्रतिमा विशेष आकर्षण है। ललितपुर शहर में स्थित अभिनंदनोदय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र आधुनिक जैन स्थापत्य का प्रमुख उदाहरण है। राजस्थानी नागर शैली में निर्मित इस तीर्थक्षेत्र में भगवान अभिनंदननाथ की प्राचीन प्रतिमा के साथ 21 फीट ऊंची नवीन प्रतिमा, 111 फीट ऊंचा कीर्ति स्तंभ और अनेक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।
पवागिरि और बांसी भी आस्था के प्रमुख केंद्र
तालबेहट क्षेत्र में स्थित पवागिरि सिद्धक्षेत्र जैन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ है। यहां मुनिराजों के निर्वाण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं। वहीं बांसी क्षेत्र में प्राचीन पार्श्वनाथ प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। चांदपुर-जहाजपुर क्षेत्र में सहस्रलिंगेश्वर हजारिया महादेव मंदिर, वाराह मंदिर, भंडारिया मंदिर, विष्णु मंदिर और शांति नाथ जैन मंदिर समेत अनेक प्राचीन स्थल क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
जनपद के प्रमुख पर्यटन स्थल
देवगढ़
जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर बेतवा नदी के किनारे स्थित देवगढ़ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां प्राचीन मंदिर, जैन मंदिर, प्रतिमाएं और विभिन्न कालखंडों की कला के उदाहरण मिलते हैं।
दशावतार मंदिर
देवगढ़ का गुप्तकालीन दशावतार मंदिर अपनी स्थापत्य शैली और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों और पट्टिकाओं पर उकेरी गई कलाकृतियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
मुचकुंद की गुफाएं
देवगढ़ और धौजरी क्षेत्र के आसपास पहाड़ियों और जंगलों के बीच प्राकृतिक गुफाएं हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार इनका संबंध मुचकुंद ऋषि से है।
तालबेहट का किला
मानसरोवर झील के किनारे स्थित तालबेहट किला बुंदेलखंड के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। किले के साथ मानसरोवर झील भी पर्यटन की दृष्टि से आकर्षण का केंद्र है।
दूधई
बालाबेहट मार्ग पर स्थित दूधई में प्राचीन मंदिर और शिल्पकला के अवशेष हैं। क्षेत्र की पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित ऐतिहासिक धरोहरें इसे विशेष बनाती हैं।
राजघाट बांध
बेतवा नदी पर बना राजघाट बांध और आसपास का प्राकृतिक परिदृश्य प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
जिला पुरातत्व संग्रहालय
नेहरू नगर स्थित जिला पुरातत्व संग्रहालय में क्षेत्र से प्राप्त प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख और अन्य ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित रखे गए हैं।
बोले विशेषज्ञ और तीर्थक्षेत्रों से जुड़े लोग
“हमारी संस्कृति और आस्था के प्रतीक हैं तीर्थक्षेत्र। बुंदेलखंड में हमारी विरासत बिखरी पड़ी है। इन प्राचीन क्षेत्रों की धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी को आगे आना चाहिए। देवगढ़ को जैन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।”
— अनिल जैन अंचल, अध्यक्ष, देवोदय तीर्थक्षेत्र देवगढ़
“प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित और स्वच्छ रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। नवागढ़ के प्राचीन इतिहास और पुरातत्व को देखते हुए इसे जैन सर्किट के रूप में विकसित करने पर सरकार को विचार करना चाहिए।”
— ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत, निर्देशक, प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़
“बुंदेलखंड और ललितपुर में अनेक प्राचीन ऐतिहासिक विरासत समेटे अतिशय एवं सिद्ध क्षेत्र हैं। ये हमारी अमूल्य धरोहर और पहचान हैं। इन तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में प्रभावी पहल की जरूरत है।”
— डॉ. सुनील संचय, संयुक्त महामंत्री, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड
“ललितपुर में जगह-जगह प्राचीन तीर्थक्षेत्र हैं, जो हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान हैं। अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र आज पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यहां वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से तीर्थयात्री आते हैं।”
— मोदी पंकज जैन, प्रबंधक, अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र, ललितपुर