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खुद को जानने के लिए ज्ञान का उपयोग करो : मुनि सुधा सागर
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महरौनी। मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि जब खुद को जानना है तो ज्ञान का उपयोग करो इंद्रिय का नहीं। जहां जहां अपनापन लगे उन्हें इंद्रिय से नहीं ज्ञान से जानें। वह मंगलवार को यशोदय तीर्थ स्थल पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनिश्री ने कहा कि सम्यक दृष्टि जीव को ज्ञान का अनुभव होता है ज्ञेय का नही। ज्ञेय का अनुभव अरिहंतों और सिद्धों को होता है। छदमस्थ को ज्ञान का अनुभव होता है। हमें ज्ञान से अनुभव होता है।
यशोदय तीर्थ स्थल पर मुनि सुधा सागर महाराज एवं क्षुल्लक गंभीर सागर के सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में तपकल्याणक के दिन नाभिराय का दरबार, युवराज आदिकुमार का विवाह, आदिकुमार का राज्याभिषेक, 32000 मुकुटबद्ध द्वारा संचालन, षट्कर्म शिक्षा, ब्राह्मी-सुंदरी को विद्यादान, नीलाजंना नृत्य, आदिकुमार का वैराग्य, दीक्षावन की ओर प्रस्थान, अकन्यास संस्कार रोपण की क्रियाएं हुईं। भगवान का वैराग्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
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मुनिश्री ने कहा कि सम्यक दृष्टि जीव को ज्ञान का अनुभव होता है ज्ञेय का नही। ज्ञेय का अनुभव अरिहंतों और सिद्धों को होता है। छदमस्थ को ज्ञान का अनुभव होता है। हमें ज्ञान से अनुभव होता है।
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यशोदय तीर्थ स्थल पर मुनि सुधा सागर महाराज एवं क्षुल्लक गंभीर सागर के सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में तपकल्याणक के दिन नाभिराय का दरबार, युवराज आदिकुमार का विवाह, आदिकुमार का राज्याभिषेक, 32000 मुकुटबद्ध द्वारा संचालन, षट्कर्म शिक्षा, ब्राह्मी-सुंदरी को विद्यादान, नीलाजंना नृत्य, आदिकुमार का वैराग्य, दीक्षावन की ओर प्रस्थान, अकन्यास संस्कार रोपण की क्रियाएं हुईं। भगवान का वैराग्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
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