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Lalitpur News: एमडी-एमएस की पढ़ाई शुरू होने तक नहीं हो सकेगा गंभीर रोगों का इलाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में गंभीर रोगों के उपचार के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते गंभीर बीमारियों का उपचार नहीं हो पा रहा है। न्यूरो और कार्डियक के मरीजों को बाहर जाना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज में एमडी व एमएस की सीटों की मान्यता मिलने पर उक्त सुविधाएं शुरू हो सकेंगी।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए मेडिकल कॉलेज की मंजूरी मिली। एमबीबीएस की 100 सीटों पर बच्चों को प्रवेश भी दिया गया। इनकी कक्षाएं भी संचालित हो गई हैं। आचार्य, सह आचार्य और सहायक आचार्य के साथ ही जेआर, एसआर की भी नियुक्ति हुई है। मेडिकल कॉलेज में लगभग 120 विशेषज्ञ व चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है।
लेकिन, अब तक कार्डियोलॉजी व न्यूरोलॉजी विभाग स्थापित नहीं हो सका है, न ही इसके विशेषज्ञ चिकित्सक नियुक्त हो सके हैं। इस कारण हृदय रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में दो से तीन मरीजों को सामान्य उपचार के बाद रेफर होना पड़ रहा है। कई बार समय से अस्पताल न पहुंच पाने के चलते जान तक गवां बैठते हैं। न्यूरोलॉजी विभाग भी नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं के दौरान सिर में चोट लगने या गंभीर चोट होने पर उपचार नहीं मिल पाता। मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रेफर किया जाता है।
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चार साल बाद शुरू होंगी एमडी-एमएस की कक्षाएं : मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में एमबीबीएस की कक्षाएं चल रही हैं। चार साल में इनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद मास्टर डिग्री की कक्षाएं शुरू होंगी। यानी, एमडी व एमएस की कक्षाओं के लिए मेडिकल कॉलेज चार वर्ष बाद तैयारियां शुरू करेगा। पहले नेशनल मेडिकल काउंसिल में एमएस व एमडी की कक्षाओं के लिए आवेदन करना होगा। जांच में मानक पूर्ण होने पर मान्यता मिलेगी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी उपचार की सुविधाएं मिलेंगी।
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मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार मुहैया कराया जा रहा है। कार्डियोलॉजी व न्यूरोलॉजी विभाग एमडी व एमएस की कक्षाएं शुरू होने पर स्थापित किया जाएगा।
- डॉ. डीवी पांडेय, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में गंभीर रोगों के उपचार के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते गंभीर बीमारियों का उपचार नहीं हो पा रहा है। न्यूरो और कार्डियक के मरीजों को बाहर जाना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज में एमडी व एमएस की सीटों की मान्यता मिलने पर उक्त सुविधाएं शुरू हो सकेंगी।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए मेडिकल कॉलेज की मंजूरी मिली। एमबीबीएस की 100 सीटों पर बच्चों को प्रवेश भी दिया गया। इनकी कक्षाएं भी संचालित हो गई हैं। आचार्य, सह आचार्य और सहायक आचार्य के साथ ही जेआर, एसआर की भी नियुक्ति हुई है। मेडिकल कॉलेज में लगभग 120 विशेषज्ञ व चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है।
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लेकिन, अब तक कार्डियोलॉजी व न्यूरोलॉजी विभाग स्थापित नहीं हो सका है, न ही इसके विशेषज्ञ चिकित्सक नियुक्त हो सके हैं। इस कारण हृदय रोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में दो से तीन मरीजों को सामान्य उपचार के बाद रेफर होना पड़ रहा है। कई बार समय से अस्पताल न पहुंच पाने के चलते जान तक गवां बैठते हैं। न्यूरोलॉजी विभाग भी नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं के दौरान सिर में चोट लगने या गंभीर चोट होने पर उपचार नहीं मिल पाता। मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रेफर किया जाता है।
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चार साल बाद शुरू होंगी एमडी-एमएस की कक्षाएं : मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में एमबीबीएस की कक्षाएं चल रही हैं। चार साल में इनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद मास्टर डिग्री की कक्षाएं शुरू होंगी। यानी, एमडी व एमएस की कक्षाओं के लिए मेडिकल कॉलेज चार वर्ष बाद तैयारियां शुरू करेगा। पहले नेशनल मेडिकल काउंसिल में एमएस व एमडी की कक्षाओं के लिए आवेदन करना होगा। जांच में मानक पूर्ण होने पर मान्यता मिलेगी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी उपचार की सुविधाएं मिलेंगी।
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार मुहैया कराया जा रहा है। कार्डियोलॉजी व न्यूरोलॉजी विभाग एमडी व एमएस की कक्षाएं शुरू होने पर स्थापित किया जाएगा।
- डॉ. डीवी पांडेय, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज