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Lalitpur News: साइफन प्रणाली से लैस गोविंद सागर बांध के गेट होंगे ऑटोमेटिक
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ललितपुर। जनपद के सबसे पुराने बांधों में शुमार साइफन प्रणाली युक्त गोविंद सागर बांध के गेटों को आने वाले दिनों में हाथों से खोलने की आवश्यकता नहीं रहेगी। बांध के इन गेटों को ऑटोमेटिक किया जाएगा। सिंचाई विभाग इसकी कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
झांसी-सागर नेशनल हाईवे के किनारे गोविंद सागर बांध निर्मित है। इस बांध का निर्माण प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर वर्ष 1952 में किया गया था। बांध में 18 गेट के साथ साइफन प्रणाली भी है। बांध में संरक्षित पानी का उपयोग सिंचाई व शहर के लोगों के लिए पेयजल में किया जाता है। रेलवे को भी पानी की आपूर्ति की जाती है।
साइफन प्रणाली बांध होने के कारण यह बांध सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। बांध के निर्धारित जलस्तर से अधिक पानी होने के चलते निकासी के लिए लगे 18 गेट मैनुअल हैं। इन गेटों को कर्मचारियों को हाथों से खोलना पड़ता है, जोकि जोखिम भरा रहता है। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। गोविंद सागर बांध के इन गेटों के स्थान पर ऑटोमेटिक गेट लगाए जाएंगे। कार्ययोजना को स्वीकृति मिल गई तो बांध पर आधुनिक गेट लग जाएंगे।
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बांध पर भारी संख्या में आते हैं सैलानी
बरसात का मौसम शुरू होने के बाद इस बांध पर प्रतिदिन सैकड़ों सैलानी पहुंचते हैं। इसके साथ बांध पर प्रतिदिन सुबह-शाम की सैर करने वाले लोग भी आते हैं। इसके लिए सिंचाई विभाग ने गेटों के दोनों ओर हाईमास्ट लाइट हाल ही में लगवाई थी। इन लाइटों के जलने पर रात के समय बांध और खूबसूरत दिखता है।
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फैक्ट फाइल
- 363.93 मीटर पूर्ण जलस्तर
- 357.83 मीटर न्यूनतम जलस्तर
- 96.79 मिलियन घनमीटर पानी भंडारण क्षमता
- 190.90 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली
- 10820 हेक्टेयर भूमि सिंचित क्षमता
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बांध के मैनुअल गेटों के स्थान पर आधुनिक प्रणाली के गेट लगाए जाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसे स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
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झांसी-सागर नेशनल हाईवे के किनारे गोविंद सागर बांध निर्मित है। इस बांध का निर्माण प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर वर्ष 1952 में किया गया था। बांध में 18 गेट के साथ साइफन प्रणाली भी है। बांध में संरक्षित पानी का उपयोग सिंचाई व शहर के लोगों के लिए पेयजल में किया जाता है। रेलवे को भी पानी की आपूर्ति की जाती है।
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साइफन प्रणाली बांध होने के कारण यह बांध सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। बांध के निर्धारित जलस्तर से अधिक पानी होने के चलते निकासी के लिए लगे 18 गेट मैनुअल हैं। इन गेटों को कर्मचारियों को हाथों से खोलना पड़ता है, जोकि जोखिम भरा रहता है। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। गोविंद सागर बांध के इन गेटों के स्थान पर ऑटोमेटिक गेट लगाए जाएंगे। कार्ययोजना को स्वीकृति मिल गई तो बांध पर आधुनिक गेट लग जाएंगे।
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बांध पर भारी संख्या में आते हैं सैलानी
बरसात का मौसम शुरू होने के बाद इस बांध पर प्रतिदिन सैकड़ों सैलानी पहुंचते हैं। इसके साथ बांध पर प्रतिदिन सुबह-शाम की सैर करने वाले लोग भी आते हैं। इसके लिए सिंचाई विभाग ने गेटों के दोनों ओर हाईमास्ट लाइट हाल ही में लगवाई थी। इन लाइटों के जलने पर रात के समय बांध और खूबसूरत दिखता है।
फैक्ट फाइल
- 363.93 मीटर पूर्ण जलस्तर
- 357.83 मीटर न्यूनतम जलस्तर
- 96.79 मिलियन घनमीटर पानी भंडारण क्षमता
- 190.90 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली
- 10820 हेक्टेयर भूमि सिंचित क्षमता
बांध के मैनुअल गेटों के स्थान पर आधुनिक प्रणाली के गेट लगाए जाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसे स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड