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Lalitpur News: बारिश से किसान चिंतित, मटर और मसूर को नुकसान की आशंका

Tue, 03 Feb 2026 12:11 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 12:11 AM IST
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Rain worries farmers, fears damage to peas and lentils
महरौनी व मड़ावरा क्षेत्र में हुई सबसे अधिक बारिश
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर-महरौनी। जनपद में सोमवार को माउठ की बारिश होने से किसानों को फसलों के नुकसान होने की चिंता सताने लगी है। सोमवार को महरौनी और मड़ावरा क्षेत्र में लगभग एक घंटे तक बारिश हुई है। कई जगह बारिश व हवा के चलते फसलें बिछ गई हैं।
जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार की सुबह अचानक मौसम ने करवट ले ली। शहर में सुबह से ही घने बादल छा गए और गड़गड़ाहट होने लगी। इसी दौरान करीब साढ़े सात बजे हल्की बूंदाबांदी होने से मौसम में ठंडक बढ़ गई। दिन में एक घंटे के लिए हल्की धूप तो निकली लेकिन आसमान में बादलों के कारण सूरज दिन में भी छिपे रहे।
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महरौनी क्षेत्र में देर रात से घने बादल छा गए और हल्की हवाएं भी चल रही थीं। सुबह सात बजे से महरौनी व आसपास के क्षेत्रों में बादलों की तेज गड़गड़ाहट के बीच तेज बारिश होने लगी। लगभग एक घंटे तक अलग-अलग क्षेत्र में बारिश होती रही। वहीं, मड़ावरा क्षेत्र में भी सुबह से तेज बारिश होने से किसानों को फसलों में नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
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इसी प्रकार पाली क्षेत्र में भी बारिश हुई, लेकिन महरौनी और मड़ावरा के मुकाबले कम बारिश रही। हालांकि, मौसम विभाग द्वारा पहले ही बारिश होने की चेतावनी दी जा रही थी। बिरधा क्षेत्र में भी सुबह पांच बजे से सुबह सात बजे तक तेज बारिश हुई, इसके चलते मटर और मसूर की फसलें खेतों में बिछ गई। नाराहट क्षेत्र में भी तेज बारिश होने से मटर और चना के साथ गेहूं की फसलें की आड़ी हो गईं।

जिले में हुई औसत 5.8 मिलीमीटर बारिश
जिले में सोमवार को कुल 5.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके तहत महरौनी क्षेत्र में सबसे अधिक 13 मिलीमीटर, मड़ावरा क्षेत्र में दस मिलीमीटर और पाली क्षेत्र में 6 मिलीमीटर बारिश हुई है। जबकि ललितपुर क्षेत्र में बूंदाबांदी होना दर्शाया गया है।


वर्जन
अभी फसलों को पानी की जरूरत है। अभी फली बन रही है। बहुत ज्यादा बारिश नहीं हुई है। इससे अधिकांश फसलों को तो फायदा है। लगातार बादल रहने से सरसों, मसूर में माहू का प्रकोप लग सकता है। इस बारिश से जल भराव की स्थिति नहीं हुई है। - डॉ. मुकेश चंद, कृषि वैज्ञानिक
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