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सिंचाई विभाग तीसरी बार बनवा रहा है धुरवारा बांध की रिपोर्ट

अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 07 Oct 2016 12:46 AM IST
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dam, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। बेतवा नदी पर प्रस्तावित धुरवारा बांध निर्माण शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरने लगा है। बांध की तीसरी बार डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। इस कार्य में ढाई करोड़ रुपये खर्च होगा, जबकि पूर्व में डेढ़ करोड़ रुपये डीपीआर बनाने में खर्च हो चुके हैं। हैरानी वाली बात यह है कि सिंचाई विभाग के पास अलग से इंवेस्टीगेशन एंड प्लानिंग(आई एंड पी) डिवीजन है, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। 
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माताटीला बांध में सिल्ट जमा होने के कारण धुरवारा बांध बनाए जाने का फैसला लिया गया है, ताकि बारिश के दौरान छोड़े जाने वाले पानी को इकट्ठा किया जा सके। इस बांध की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए पिछले दिनों सिंचाई निर्माण खंड प्रथम की ओर से निजी एजेंसी को ठेका देने के लिए टेंडर निकाला गया है। करीब ढाई करोड़ रुपये से धुरवारा बांध की डीपीआर, साध्यता रिपोर्ट, हाइड्रोलॉजी रिपोर्ट बनाने का ठेका होना है। ज्ञातव्य हो कि मार्च 2016 में धुरवारा बांध के सर्वे के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किया गया। वर्ष 2005 में आईएंडपी विभाग ने धुरवारा बांध का सर्वे कर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की थी। लेकिन, इस पर गौर नहीं किया गया। 
 यही नहीं, सिंचाई विभाग को अपने इंवेस्टीगेशन एंड प्लानिंग(आई एंड पी) डिवीजन पर भी भरोसा नहीं है। इस विभाग का मुख्य काम बांधों का सर्वे करना, रिपोर्ट तैयार करना है। आई एंड पी विभाग द्वारा जनपद में कई बांधों की रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है, लेकिन इसे दरकिनार कर प्राइवेट फर्म को ठेका देने की तैयारी कर ली गई है। खास बात यह है कि जिस आई एंड पी विभाग पर विश्वास नहीं किया जा रहा है, उसी ने कुछ दिन पहले  बालाबेहट में प्रस्तावित रबर बांध की डीपीआर तैयार कराई है। प्रदेश में अभी तक एक भी रबर बांध का निर्माण नहीं हुआ है, इसके बावजूद इस नई तकनीक के बांध की डीपीआर बनाई।
बांध की उपयोगिता पर सवाल
प्रस्तावित धुरवारा बांध को बनाने के पीछे सिंचाई विभाग का मकसद माताटीला बांध पर पानी का दबाव कम करना है। वर्षों पुराने माताटीला बांध की क्षमता पर असर पड़ा है, जिस कारण से इसमें पानी का स्टोरेज पूर्ण रुप से नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से राजघाट बांध के बाद व माताटीला बांध के पहले धुरवारा बांध को बनाया जाना प्रस्तावित किया गया है। धुरवारा बांध के बनाए जाने से माताटीला बांध में स्टोरेज न हो पाने वाले पानी को पहले ही रोक लिया जाएगा। 
लेकिन इस बांध की उपयोगिता को लेकर विभाग में ही विरोधाभास है। कई अधिकारियों ने धुरवारा बांध की उपयोगिता पर सवालिया निशान लगाए हैं। हाइड्रोलॉजी इंस्ट्रीट्यूट रुड़की ने दो वर्ष पहले एक रिपोर्ट दी थी, जिसके अनुसार माताटीला बांध डेंजर श्रेणी में आ गया है। इसका मुख्य कारण इसकी वर्षो पुरानी डिजाइन है। दूसरा कारण माताटीला बांध से बने राजघाट बांध की क्षमता इससे कहीं अधिक है। राजघाट बांध के पूर्ण गेट खोले जाने पर 12 लाख क्यूसेक पानी की निकासी होती है, जबकि माताटीला बांध को पूर्ण खोलने पर केवल छह लाख क्यूसेक पानी ही निकल पाता है। हाई फ्लड की स्थिति में माताटीला बांध कभी क्षतिग्रस्त हो सकता है। इसी कारण से विशेषज्ञों ने सिंचाई विभाग को धुरवारा बांध बनाने की बजाय माताटीला बांध के गेटों को बदलने व बांध के जीर्णोद्घार करने की सलाह दी थी। 
धुरवारा बांध के लिए मध्य प्रदेश की जमीन व वन विभाग की जमीन भी लेनी पड़ेगी, जिसमें काफी समय व रुपया बर्बाद होगा। इससे कम समय व लागत में माताटीला का स्वरुप बदला जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों ने झांसी जनपद में पहाड़ी बांध के रेनोवेशन का उदाहरण दिया। लेकिन इस पर गौर नहीं किया गया।

इनका कहना है
धुरवारा बांध का सर्वे निजी एजेंसी से कराने के लिए टेंडर निकाला गया है। मार्च में हुआ सर्वे प्रारंभिक सर्वे था और अब पूरी डिटेेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैैयार की जा रही है। आईएंडपी विभाग से सर्वे क्यों नहीं कराया जा रहा है, इसकी जानकारी नहीं है।   नरेंद्र कुमार जाड़िया अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड प्रथम।
इनका कहना है
आईएंडपी विभाग में स्टाफ ही नहीं है, इसलिए निजी एजेंसी से सर्वे कराया जा रहा है। धुरवारा बांध के निर्माण में मध्य प्रदेश व वन विभाग की जमीन ली जाएगी। मार्च में रिपोर्ट तैयार हुई है, बांध के निर्माण में कई रिपोर्ट तैयार कराई जाती हैं।  विनय श्रीवास्तव  चीफ इंजीनियर सिंचाई निर्माण खंड झांसी

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