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पहले भी हुई जांच, लेकिन टायं-टायं फिस्स

Sat, 20 Jun 2015 12:46 AM IST
ललितपुर/ ब्यूरो
ललितपुर/ ब्यूरो Updated Sat, 20 Jun 2015 12:46 AM IST
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ललितपुर। चिट-फंड कंपनी के खिलाफ जांच कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई हुई, लेकिन बाद में मामला रफा- दफा कर दिया गया।
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चांदमारी निवासी जसप्रीत सिंह ने सीजेएम न्यायालय में चिट- फंड कंपनी के खिलाफ पूर्व में वाद दायर किया था। इसमें कहा गया था कि कुछ लोगों ने उसे बताया कि एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी में पैसा जमा करने पर पचास महीने में धन दोगुना हो जाता है। इस पर उसने पैसा जमा करना शुरू कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि कंपनी फर्जी है। इस पर न्यायालय ने धोखाधड़ी के आरोप में आधा दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ सम्मन जारी कर अदालत में तलब किया था। कुछ दिनों बाद यह मामला शांत हो गया और कंपनी नए नाम से कारोबार करने लगी। अब, एक बार फिर इसी जसप्रीत सिंह की शिकायत पर जिलाधिकारी ने डिप्टी कलेक्टर को जांच अधिकारी बना कर जांच का जिम्मा सौंप दिया है।


सूत्रों के अनुसार कंपनी धन दोगुना करने का दावा तो करती है, लेकिन धन लोगों को मिल नहीं पाता है। दरअसल, कंपनी के एजेंट पैसा जमा करने वालों के संपर्क में रहते हैं। जैसे ही पैसे की अवधि पूरी होती है, आसपास हवा फैला दी जाती है कि कंपनी बंद होने वाली है। अत: जो भी वापस मिल रहा है, ले लो। इस चक्कर में कंपनी के एजेंट निवेशकों को शहर में खाली प्लाट दिला देते हैं। इससे निवेशक भी चुप हो जाता है और किसी को भनक भी नहीं लगती है।
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दरअसल, कंपनी के नाम पर जमीन का कारोबार किया जा रहा है। इसमें छोटे- छोटे निवेशकों का पैसा जमा कराकर प्लाटिंग के लिए जमीन खरीदी जाती है, फिर वही जमीन निवेशकों को जबरन थमा दी जाती है। मजबूरन, निवेशक पैसा डूबने से बेहतर है कि जमीन ले लेता है। इससे कंपनी के लोग बिना पूंजी निवेश किए ही जमीन का कारोबार कर मालामाल हो रहे हैं।
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किस मुकाम तक पहुंचेगी जांच ?
ललितपुर। चिट- फंड कंपनी की जांच निष्पक्ष तरीके से हो पाएगी अथवा अन्य जांचों की तरह यह भी टायं- टायं फिस्स होकर रह जाएगी, निवेशकों के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है। जानकार सूत्र बताते हैं कि पहले भी इस तरह की शिकायतें की गईं, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। ऐसे में जनता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है। एक बार फिर जांच की जिम्मेदारी एक प्रशासनिक अधिकारी को सौंपे जाने के बाद ठगे गए निवेशकों को उम्मीद जागी है और उनकी निगाह एक सप्ताह बाद आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिक गई है।
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