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दुष्कर्म के दोषी को सात वर्ष की सजा
ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2016 12:31 AM IST
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ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय हरकेश कुमार की अदालत ने अभियुक्त को नाबालिग के साथ दुष्कर्म के अपराध में दोषी पाते हुए सात वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।
थाना कोतवाली अंतर्गत एक व्यक्ति ने 16 जनवरी 2012 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए प्रार्थना पत्र में बताया था कि उसकी पुत्री 25 दिसंबर को करीब तीन बजे अपनी दादी के यहां ग्राम बसवां जाने के लिए बस स्टैंड पर थी। शाम चार बजे गांव का राजेंद्र बहादुर उर्फ रब्बू अहिरवार आया और पुत्री को मोटरसाइकल पर बैठा लिया।
पुत्री ने मना किया तो युवक ने कहा कि वह बसवां की ओर जा रहा है और वह उसे छोड़ देगा। पुत्री ने ज्यादा विरोध किया तो उसने पुत्री के सिर पर तमंचा अड़ा दिया, जिससे वह घबरा गई। राजेंद्र उसे ग्राम बसवां न ले जाकर जंगल की ओर ले गया। उसने पुत्री से बलात्कार किया और भाग गया।
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थोड़ी देर बाद गांव के अन्य लोगों उसकी पुत्री को बेहोशी अवस्था में देेखा और उसे घर ले आए। जब उसकी पुत्री को होश आया तो उसने परिजनों को पूरी घटना बताई। इस पर एक जनवरी 2012 को पुलिस अधीक्षक और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
इस पर उसने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद न्यायालय के आदेश से कोतवाली ने रिपोर्ट दर्ज की और विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए।
शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गवाहों, साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर अभियुक्त राजेंद्र बहादुर उर्फ रब्बू को दोषी पाते हुए सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अर्थदंड अदा नहीं करने पर चार माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड से वसूली गई आधी राशि पीड़ित पक्ष को दिलाने के आदेश भी दिए। पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।
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थाना कोतवाली अंतर्गत एक व्यक्ति ने 16 जनवरी 2012 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए प्रार्थना पत्र में बताया था कि उसकी पुत्री 25 दिसंबर को करीब तीन बजे अपनी दादी के यहां ग्राम बसवां जाने के लिए बस स्टैंड पर थी। शाम चार बजे गांव का राजेंद्र बहादुर उर्फ रब्बू अहिरवार आया और पुत्री को मोटरसाइकल पर बैठा लिया।
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पुत्री ने मना किया तो युवक ने कहा कि वह बसवां की ओर जा रहा है और वह उसे छोड़ देगा। पुत्री ने ज्यादा विरोध किया तो उसने पुत्री के सिर पर तमंचा अड़ा दिया, जिससे वह घबरा गई। राजेंद्र उसे ग्राम बसवां न ले जाकर जंगल की ओर ले गया। उसने पुत्री से बलात्कार किया और भाग गया।
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थोड़ी देर बाद गांव के अन्य लोगों उसकी पुत्री को बेहोशी अवस्था में देेखा और उसे घर ले आए। जब उसकी पुत्री को होश आया तो उसने परिजनों को पूरी घटना बताई। इस पर एक जनवरी 2012 को पुलिस अधीक्षक और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
इस पर उसने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद न्यायालय के आदेश से कोतवाली ने रिपोर्ट दर्ज की और विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए।
शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गवाहों, साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर अभियुक्त राजेंद्र बहादुर उर्फ रब्बू को दोषी पाते हुए सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अर्थदंड अदा नहीं करने पर चार माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड से वसूली गई आधी राशि पीड़ित पक्ष को दिलाने के आदेश भी दिए। पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।