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गैंगेस्टर एक्ट में दो को दो-दो वर्ष की सजा
ललितपुर/ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2015 12:22 AM IST
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ललितपुर। गैंगेस्टर कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एडीजे लोकेश राय ने गैंगेस्टर एक्ट के दो आरोपियों को दो - दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
थाना तालबेहट पुलिस ने ग्राम थानागांव निवासी छंदी उर्फ जगदीश यादव, हनुमत यादव निवासी ककड़ारी, दुर्जन एवं रतीराम के खिलाफ गिरोहबंद अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई कर झांसी स्थित गैंगेस्टर कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। छह फरवरी 2012 को यह प्रकरण जिला अपर सत्र न्यायालय व विशेष न्यायाधीश गिरोह बंद अधिनियम एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। आरोपी दुर्जन को इसी मामले में पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि रतीराम अव्यस्क होने के कारण उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड स्थानांतरित कर दी गई थी। विशेष न्यायाधीश की अदालत में मंगलवार को छंदी एवं हनुमत के प्रकरण पर निर्णायक सुनवाई हुई।
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य, गवाह एवं अभियोजन पक्ष की दलीलों पर गौर करने के बाद न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुना दिया। आरोपियों को दो - दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा, साथ ही पांच - पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो - दो माह अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है। मामले की पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह ने की।
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थाना तालबेहट पुलिस ने ग्राम थानागांव निवासी छंदी उर्फ जगदीश यादव, हनुमत यादव निवासी ककड़ारी, दुर्जन एवं रतीराम के खिलाफ गिरोहबंद अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई कर झांसी स्थित गैंगेस्टर कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। छह फरवरी 2012 को यह प्रकरण जिला अपर सत्र न्यायालय व विशेष न्यायाधीश गिरोह बंद अधिनियम एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। आरोपी दुर्जन को इसी मामले में पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि रतीराम अव्यस्क होने के कारण उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड स्थानांतरित कर दी गई थी। विशेष न्यायाधीश की अदालत में मंगलवार को छंदी एवं हनुमत के प्रकरण पर निर्णायक सुनवाई हुई।
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य, गवाह एवं अभियोजन पक्ष की दलीलों पर गौर करने के बाद न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुना दिया। आरोपियों को दो - दो वर्ष सश्रम कारावास की सजा, साथ ही पांच - पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो - दो माह अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है। मामले की पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह ने की।
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