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पिता के हत्यारे पुत्र को सात वर्ष का कठोर कारावास
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पिता के हत्यारे को सात वर्ष का कठोर कारावास
न्यायालय ने गैर इरादतन हत्या में सुनाई सजा
दस हजार अर्थदंड लगाया, साक्ष्य के अभाव में दूसरा पुत्र बरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) जगदीश कुमार की अदालत ने थाना बार अंतर्गत ग्राम नगारा निवासी एक व्यक्ति को इंदिरा आवास के पैसों के लिए पिता को ही लाठी से मारकर गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाते हुए सात वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव के अनुसार थाना बार अंतर्गत ग्राम नगारा निवासी गुन्चे पुत्र मनगोले अहिरवार ने चार वर्ष पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह अपने भाई हरिया के साथ एक ही मकान में रहता था। 19 जून 2014 की सुबह लगभग आठ बजे उसे गाली-गलौज की आवाज सुनाई दी, जिस पर वह अपने कमरे से बाहर निकला तो उसने देखा कि उसके भतीजे खिल्ला एवं हीरालाल उर्फ घोड़ा पुत्र हरिया अपने पिता हरिया से गालीगलौज कर रहे थे और कह रहे थे कि उसे इंदिरा आवास का पैसा मिला है, वह उन लोगों को अभी चाहिए। उसके भाई ने हरिया ने जब पैसा देने से मना किया तो उक्त दोनों लड़के आवेश में आ गए और खिल्ला गाली देते बोला कि उसे ठिकाने लगा दो। सब पैसे भूल जाएगा। खिल्ला ने हरिया (पिता) को हाथ से पकड़ लिया और हीरालाल ने अपने हाथ में ली हुई लाठी हरिया के सिर में मार दी। लाठी लगते ही हरिया के सिर से खून बहने लगा और वह गिर पड़ा। पास ही रिपटे पर खड़े गांव के रामपाल व अरविंद भी दौड़कर आ गए। सभी ने दोनों भाईयों को ललकारा तो उक्त दोनों बोले कि उनके बीच में मत आना, बरना जान से मार देंगे और धमकी देते हुए भाग गए। वह वाहन का इंतजाम कर अपने भाई हरिया को लेकर थाने गए, वहां उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वह भाई को लेकर जिला चिकित्सालय गया, जहां इलाज के दौरान अगले ही दिन 20 जून 2014 को हरिया की मौत हो गई थी। इसके बाद उसने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने 21 सितंबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज की और न्यायालय में गैर इरादतन हत्या की धारा में खिल्ला और हीरालाल के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
सोमवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने उक्त मामले में हीरालाल को अपने ही पिता हरिया की गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। वहीं न्यायालय ने उक्त मामले में दूसरे पुत्र खिल्ला को संदेह का लाभ देते हुए साक्ष्य के अभाव मेें बरी कर दिया। वहीं उक्त अभियुक्त तीन वर्ष से जेल में निरुद्घ चल रहे थे।
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न्यायालय ने गैर इरादतन हत्या में सुनाई सजा
दस हजार अर्थदंड लगाया, साक्ष्य के अभाव में दूसरा पुत्र बरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) जगदीश कुमार की अदालत ने थाना बार अंतर्गत ग्राम नगारा निवासी एक व्यक्ति को इंदिरा आवास के पैसों के लिए पिता को ही लाठी से मारकर गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाते हुए सात वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव के अनुसार थाना बार अंतर्गत ग्राम नगारा निवासी गुन्चे पुत्र मनगोले अहिरवार ने चार वर्ष पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह अपने भाई हरिया के साथ एक ही मकान में रहता था। 19 जून 2014 की सुबह लगभग आठ बजे उसे गाली-गलौज की आवाज सुनाई दी, जिस पर वह अपने कमरे से बाहर निकला तो उसने देखा कि उसके भतीजे खिल्ला एवं हीरालाल उर्फ घोड़ा पुत्र हरिया अपने पिता हरिया से गालीगलौज कर रहे थे और कह रहे थे कि उसे इंदिरा आवास का पैसा मिला है, वह उन लोगों को अभी चाहिए। उसके भाई ने हरिया ने जब पैसा देने से मना किया तो उक्त दोनों लड़के आवेश में आ गए और खिल्ला गाली देते बोला कि उसे ठिकाने लगा दो। सब पैसे भूल जाएगा। खिल्ला ने हरिया (पिता) को हाथ से पकड़ लिया और हीरालाल ने अपने हाथ में ली हुई लाठी हरिया के सिर में मार दी। लाठी लगते ही हरिया के सिर से खून बहने लगा और वह गिर पड़ा। पास ही रिपटे पर खड़े गांव के रामपाल व अरविंद भी दौड़कर आ गए। सभी ने दोनों भाईयों को ललकारा तो उक्त दोनों बोले कि उनके बीच में मत आना, बरना जान से मार देंगे और धमकी देते हुए भाग गए। वह वाहन का इंतजाम कर अपने भाई हरिया को लेकर थाने गए, वहां उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वह भाई को लेकर जिला चिकित्सालय गया, जहां इलाज के दौरान अगले ही दिन 20 जून 2014 को हरिया की मौत हो गई थी। इसके बाद उसने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने 21 सितंबर 2015 को रिपोर्ट दर्ज की और न्यायालय में गैर इरादतन हत्या की धारा में खिल्ला और हीरालाल के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
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सोमवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने उक्त मामले में हीरालाल को अपने ही पिता हरिया की गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। वहीं न्यायालय ने उक्त मामले में दूसरे पुत्र खिल्ला को संदेह का लाभ देते हुए साक्ष्य के अभाव मेें बरी कर दिया। वहीं उक्त अभियुक्त तीन वर्ष से जेल में निरुद्घ चल रहे थे।
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