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Lalitpur News: साल 1936 से निकल रही बजरंग बली की शोभायात्रा, अंग्रेज अफसर भी बनते थे हिस्सा
Wed, 05 Apr 2023 11:52 PM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Wed, 05 Apr 2023 11:52 PM IST
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ललितपुर। ललितपुर में हनुमान जयंती अंग्रेजों के जमाने से मनाई जा रही है। यहां सबसे पहले साल 1883 में हनुमान जन्मोत्सव ऐनकैपिंग ग्राउंड (तुवन मंदिर) में मनाया गया था। अंग्रेज अफसर भी इसमेें शामिल हुए थे। इसके बाद 87 साल पहले वर्ष 1936 में पहली बार शोभायात्रा निकाली गई। तब शोभायात्रा में लैंप से जगमगाहट के साथ बजरंग बली को रथ पर विराजमान कर नगर भ्र्रमण कराया जाता था। चौराहे-चौराहे पर भक्त भगवान की आरती उतारते थे। अब समय के साथ शोभायात्रा का स्वरूप बदल गया है। अब हर साल कई अखाड़े और झांकियां शोभायात्रा का हिस्सा बनती हैं। इसकी भव्यता बढ़ती जा रही है
हनुमान जयंती पर साल 1936 में तुवन मंदिर प्रांगण से पहली शोभायात्रा निकाली गई थी। जिसमें सभी मंदिरों के ध्वज, भजन मंडलियां और हाथ ठेलों पर झांकियां निकाली गईं। शुरुआत में दो झांकियां ही शामिल हुईं। इसके चार साल बाद 1940 में भारत सेवा मंडल का पहला अखाड़ा शामिल हुआ। इसके बाद जुलूस को भव्य व आकर्षक बनाने लिए झांकियों को बैलगाड़ी और बाद में मोटर से निकाला गया। इसके बाद शोभायात्रा में अखाड़ों की संख्या में भी लगातार इजाफा होने लगा। झांकियां भी जीप और ट्रैक्टर से निकलने लगीं।
अब हनुमान जयंती पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा विशाल और भव्य हो गई है। जिसमें अब शहर के 13 नामी अखाड़े और लगभग 25 झांकियां शामिल होती हैं। वहीं शहर के प्रमुख हनुमान मंदिरों के ऊंचे धर्म ध्वज शामिल होते हैं। आज भी अखाड़े, झांकियां, भजन मंडलियां तुवन मंदिर पर एकत्रित होते हैं और यहां मंदिरों के धर्म ध्वज पहुंचने के साथ शोभायात्रा की भव्य शुरुआत होती है। शोभायात्रा को देखने के लिए पूरे जिले के लोग पहुंचते हैं।
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फोटो-14
कैप्सन-बृजेश चतुर्वेदी।
हनुमान जन्मोत्सव पर पहली शोभायात्रा 1936 में निकाली गई थी। तब से अब तक कई शोभायात्रा में काफी बदलाव हुए हैं। अब शोभायात्रा काफी भव्य और विशाल होती है और तेरह अखाड़े शामिल होते हैं।- बृजेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष, श्रीहनुमान जयंती महोत्सव समिति।
पुराने समय में काफी सामान्य तरीके से हनुमान जयंती पर्व मनाया जाता था। अब इसकी भव्यता बढ़ गई है। इसमें लगभग 24 से 25 झांकियां और तेरह अखाड़े शामिल होते हैं। - हरविंदर सलूजा, मंत्री।
हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा में सालों पहले कुछ ही भजन मंडलियां और कुछ झांकियां शामिल होती थीं। लेकिन इसे काफी विस्तार दिया गया है। इसमें अखाड़ों के हैरतअंगेज करतब काफी उत्साहित करते हैं। जबकि झांकियों की भव्यता भी दिखाई देती है। -अमित तिवारी।
हनुमान शोभायात्रा की शुरुआत 87 वर्ष पहले हुई थी। उस समय इतने संसाधन और लाइट की व्यवस्था नहीं थी। तब लैंप जलाकर शोभायात्रा निकाली जाती थी। अब इस शोभायात्रा में कई आकर्षक झांकियां व व्यायामशाला के युवक व युवतियां करतब का प्रदर्शन करते हैं।
-रामरतन कुशवाहा, पूर्व अध्यक्ष, श्रीहनुमान जयंती महोत्सव समिति।
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हनुमान जयंती पर साल 1936 में तुवन मंदिर प्रांगण से पहली शोभायात्रा निकाली गई थी। जिसमें सभी मंदिरों के ध्वज, भजन मंडलियां और हाथ ठेलों पर झांकियां निकाली गईं। शुरुआत में दो झांकियां ही शामिल हुईं। इसके चार साल बाद 1940 में भारत सेवा मंडल का पहला अखाड़ा शामिल हुआ। इसके बाद जुलूस को भव्य व आकर्षक बनाने लिए झांकियों को बैलगाड़ी और बाद में मोटर से निकाला गया। इसके बाद शोभायात्रा में अखाड़ों की संख्या में भी लगातार इजाफा होने लगा। झांकियां भी जीप और ट्रैक्टर से निकलने लगीं।
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अब हनुमान जयंती पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा विशाल और भव्य हो गई है। जिसमें अब शहर के 13 नामी अखाड़े और लगभग 25 झांकियां शामिल होती हैं। वहीं शहर के प्रमुख हनुमान मंदिरों के ऊंचे धर्म ध्वज शामिल होते हैं। आज भी अखाड़े, झांकियां, भजन मंडलियां तुवन मंदिर पर एकत्रित होते हैं और यहां मंदिरों के धर्म ध्वज पहुंचने के साथ शोभायात्रा की भव्य शुरुआत होती है। शोभायात्रा को देखने के लिए पूरे जिले के लोग पहुंचते हैं।
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कैप्सन-बृजेश चतुर्वेदी।
हनुमान जन्मोत्सव पर पहली शोभायात्रा 1936 में निकाली गई थी। तब से अब तक कई शोभायात्रा में काफी बदलाव हुए हैं। अब शोभायात्रा काफी भव्य और विशाल होती है और तेरह अखाड़े शामिल होते हैं।- बृजेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष, श्रीहनुमान जयंती महोत्सव समिति।
पुराने समय में काफी सामान्य तरीके से हनुमान जयंती पर्व मनाया जाता था। अब इसकी भव्यता बढ़ गई है। इसमें लगभग 24 से 25 झांकियां और तेरह अखाड़े शामिल होते हैं। - हरविंदर सलूजा, मंत्री।
हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा में सालों पहले कुछ ही भजन मंडलियां और कुछ झांकियां शामिल होती थीं। लेकिन इसे काफी विस्तार दिया गया है। इसमें अखाड़ों के हैरतअंगेज करतब काफी उत्साहित करते हैं। जबकि झांकियों की भव्यता भी दिखाई देती है। -अमित तिवारी।
हनुमान शोभायात्रा की शुरुआत 87 वर्ष पहले हुई थी। उस समय इतने संसाधन और लाइट की व्यवस्था नहीं थी। तब लैंप जलाकर शोभायात्रा निकाली जाती थी। अब इस शोभायात्रा में कई आकर्षक झांकियां व व्यायामशाला के युवक व युवतियां करतब का प्रदर्शन करते हैं।
-रामरतन कुशवाहा, पूर्व अध्यक्ष, श्रीहनुमान जयंती महोत्सव समिति।