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Lalitpur News: 48 टीमों ने शुरू किया फसलों में नुकसान का सर्वे
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ललितपुर। भारी बारिश से खरीफ की फसलों में भारी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग, बीमा कंपनी और राजस्व विभाग की 48 टीमें फसलों में नुकसान का सर्वे कर रही हैं। कृषि विभाग में 13 हजार किसान बीमित हैं, लेकिन बाकी किसान जिनका बीमा नहीं हो सका है, वे सर्वे के बाद आपदा राहत के भरोसे हैं।
फसलों में नुकसान के आकलन के लिए तहसील ललितपुर में लेखपालों, कृषि विभाग के कार्मिकों एवं बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की 14 टीमों का गठन किया गया है। वहीं, तालबेहट तहसील के अंतर्गत भी 14 टीमों का गठन हुआ है, जबकि महरौनी तहसील के अंतर्गत नौ, मड़ावरा में चार और पाली तहसील में सात टीमों का गठन किया गया है। अपर जिलाधिकारी व कृषि उपनिदेशक के नेतृत्व में टीमों ने क्षेत्र में जाकर भारी बारिश से खरीफ की नष्ट हुई फसलों का सर्वे शुरू कर दिया है। यह सर्वे एक सप्ताह में पूरा कर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद प्रशासन यह रिपोर्ट शासन को भेजेगा।
फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। लेकिन, इससे पहले ही भारी बारिश ने तबाही मचा दी। ऐसे में जिन किसानों ने बीमा कराया है, उन्हें फसल नुकसान होने पर 72 घंटे में क्लेम करने पर बीमा की राशि मिल सकती है। लेकिन, जिन किसानों का बीमा नहीं हो सका है, वह किसान आपदा राहत के ही भरोसे हैं। कई किसान तो ऐसे हैं, जिनकी फसलों को तो नुकसान हुआ ही है, उनके कच्चे घर भी जमींदोज हो गए हैं। अब वह शासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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फसलों में नुकसान के आकलन के लिए तहसील ललितपुर में लेखपालों, कृषि विभाग के कार्मिकों एवं बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की 14 टीमों का गठन किया गया है। वहीं, तालबेहट तहसील के अंतर्गत भी 14 टीमों का गठन हुआ है, जबकि महरौनी तहसील के अंतर्गत नौ, मड़ावरा में चार और पाली तहसील में सात टीमों का गठन किया गया है। अपर जिलाधिकारी व कृषि उपनिदेशक के नेतृत्व में टीमों ने क्षेत्र में जाकर भारी बारिश से खरीफ की नष्ट हुई फसलों का सर्वे शुरू कर दिया है। यह सर्वे एक सप्ताह में पूरा कर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद प्रशासन यह रिपोर्ट शासन को भेजेगा।
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फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। लेकिन, इससे पहले ही भारी बारिश ने तबाही मचा दी। ऐसे में जिन किसानों ने बीमा कराया है, उन्हें फसल नुकसान होने पर 72 घंटे में क्लेम करने पर बीमा की राशि मिल सकती है। लेकिन, जिन किसानों का बीमा नहीं हो सका है, वह किसान आपदा राहत के ही भरोसे हैं। कई किसान तो ऐसे हैं, जिनकी फसलों को तो नुकसान हुआ ही है, उनके कच्चे घर भी जमींदोज हो गए हैं। अब वह शासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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