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रणछोरधाम में शुरु हुआ विष्णु कुंडात्मक महायज्ञ
Updated Mon, 15 Jan 2018 03:04 AM IST
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रणछोरधाम में शुरू हुआ विष्णु कुंडात्मक महायज्ञ
ललितपुर।
श्री रणछोरधाम मंदिर परिसर में मकर संक्रांति पर्व के मौके पर रविवार को 108 कुुंडात्मक विष्णु महायज्ञ और नव कुंडात्मक रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। यहां आयोजित धर्मसभा में महंतों द्वारा दान, यज्ञ और मकर संक्रांति पर्व पर पुण्य स्नान का महत्व बताया।
श्री रणछोरधाम आश्रम के महंत वीरेंद्रानंद महाराज ने कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस सृष्टि पर सबसे पहले यज्ञ भगवान ब्रह्मा जी ने किया था। उसी यज्ञ से माता गायत्री की उत्पत्ति हुई थी। यज्ञ तीन प्रकार के होते हैं, पहला सतोगुणी यज्ञ, दूसरा रजोगुणी और तमोगुणी यज्ञ। यज्ञ के माध्यम से तीनों लोकों को भोजन जाता है, स्वर्ग लोक में देवताओं को, पितर लोक में पितरों को और प्रेत लोक में प्रेतों को यज्ञ के माध्यम से भोजन जाता है। यज्ञ से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूूरी होती हैं। जिस समय अयोध्या के राजा दशरथ की वृद्धा अवस्था आई, लेकिन कोई पुत्र न होने से वह बहुत दुखी हुए। तब महाराज दशरथ अपने गुरु के पास गए और अपने गुुरु से प्रार्थना की कि उनके यहां कोई पुत्र नहीं है, इसलिए पुत्र प्राप्ति का कोई उपाय बताएं। तब महाराज दशरथ के गुरु वशिष्ठ ने पुत्र प्राप्ति के लिए दशरथ को गुरु यज्ञ करवाया और उस यज्ञ के प्रभाव से महाराज दशरथ के यहां चार पुत्र हुए, जिनके नाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न हुए। दशरथ के पूर्वज महाराज महाभिष ने सौ यज्ञ करवाए थे, उन यज्ञों के प्रभाव से महाभिष नाम के राजा के राजा सा शरीर स्वर्ग में जाकर रहने लगे थे। उन्होंने आगे कहा कि यज्ञ से समस्त पापों का नाश हो जाता है। यज्ञ करते समय यजमानों के स्वाहा बोलकर ही अग्नि में आहुतियां डालना चाहिए। क्योंकि बिना स्वाहा के कोई भी मंत्र फलदायी नहीं होता। अग्निदेव की पत्नी का नाम स्वाहा है, पितरों की पत्नी का स्वधा और यज्ञ की पत्नी का नाम दक्षिणा है। यज्ञ के पहले दिन यजमानों ने गणेश पूजन किया और दशा स्नान जलयात्रा, प्रायश्चित संकल्प किया। इस मौके पर रणछोरधाम मानव कल्याण समिति के पदाधिकारी कृष्णानंद, बाबू सिंह, ओमप्रकाश, वीर सिंह, गजराम यादवेंद्र, कीरत सिंह, धीरज सिंह, सनमान सिंह, भगवान सिंह, डा.मिलन यादव आदि उपस्थित रहे।
उपस्थित रहे।
सात दिवसीय भागवत कथा जारी
शहर के मुहल्ला आजादपुरा तृतीय में सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा में व्यास बलदेव कृष्ण शास्त्री ने प्रह्लाद अवतार, हिरण कश्यप, नृसिंह अवतार राजा वली की कथा का वाचन किया। वामन अवतार का श्रवण कराकर भगवान की भक्तों की कृपा का महत्व बताया। कथा में मुख्य यजमान स्नेहलता, नरेंद्र सिंह चौहान रहीं, जबकि पूजन पंडित विनोद शास्त्री ने कराया। कथा में विजय शंकर सिंह, विवेक सिंह, डा. चंद्रभान सिंह चौहान, संदीप सिंह, सूरत, भगत सिंह, कार्तिक राजा, हरी किशोर नरवरिया, देवेंद्र पाठक, पंकज नायक, राजू रैकवार उपस्थित रहे।
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ललितपुर।
श्री रणछोरधाम मंदिर परिसर में मकर संक्रांति पर्व के मौके पर रविवार को 108 कुुंडात्मक विष्णु महायज्ञ और नव कुंडात्मक रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। यहां आयोजित धर्मसभा में महंतों द्वारा दान, यज्ञ और मकर संक्रांति पर्व पर पुण्य स्नान का महत्व बताया।
श्री रणछोरधाम आश्रम के महंत वीरेंद्रानंद महाराज ने कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस सृष्टि पर सबसे पहले यज्ञ भगवान ब्रह्मा जी ने किया था। उसी यज्ञ से माता गायत्री की उत्पत्ति हुई थी। यज्ञ तीन प्रकार के होते हैं, पहला सतोगुणी यज्ञ, दूसरा रजोगुणी और तमोगुणी यज्ञ। यज्ञ के माध्यम से तीनों लोकों को भोजन जाता है, स्वर्ग लोक में देवताओं को, पितर लोक में पितरों को और प्रेत लोक में प्रेतों को यज्ञ के माध्यम से भोजन जाता है। यज्ञ से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूूरी होती हैं। जिस समय अयोध्या के राजा दशरथ की वृद्धा अवस्था आई, लेकिन कोई पुत्र न होने से वह बहुत दुखी हुए। तब महाराज दशरथ अपने गुरु के पास गए और अपने गुुरु से प्रार्थना की कि उनके यहां कोई पुत्र नहीं है, इसलिए पुत्र प्राप्ति का कोई उपाय बताएं। तब महाराज दशरथ के गुरु वशिष्ठ ने पुत्र प्राप्ति के लिए दशरथ को गुरु यज्ञ करवाया और उस यज्ञ के प्रभाव से महाराज दशरथ के यहां चार पुत्र हुए, जिनके नाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न हुए। दशरथ के पूर्वज महाराज महाभिष ने सौ यज्ञ करवाए थे, उन यज्ञों के प्रभाव से महाभिष नाम के राजा के राजा सा शरीर स्वर्ग में जाकर रहने लगे थे। उन्होंने आगे कहा कि यज्ञ से समस्त पापों का नाश हो जाता है। यज्ञ करते समय यजमानों के स्वाहा बोलकर ही अग्नि में आहुतियां डालना चाहिए। क्योंकि बिना स्वाहा के कोई भी मंत्र फलदायी नहीं होता। अग्निदेव की पत्नी का नाम स्वाहा है, पितरों की पत्नी का स्वधा और यज्ञ की पत्नी का नाम दक्षिणा है। यज्ञ के पहले दिन यजमानों ने गणेश पूजन किया और दशा स्नान जलयात्रा, प्रायश्चित संकल्प किया। इस मौके पर रणछोरधाम मानव कल्याण समिति के पदाधिकारी कृष्णानंद, बाबू सिंह, ओमप्रकाश, वीर सिंह, गजराम यादवेंद्र, कीरत सिंह, धीरज सिंह, सनमान सिंह, भगवान सिंह, डा.मिलन यादव आदि उपस्थित रहे।
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सात दिवसीय भागवत कथा जारी
शहर के मुहल्ला आजादपुरा तृतीय में सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा में व्यास बलदेव कृष्ण शास्त्री ने प्रह्लाद अवतार, हिरण कश्यप, नृसिंह अवतार राजा वली की कथा का वाचन किया। वामन अवतार का श्रवण कराकर भगवान की भक्तों की कृपा का महत्व बताया। कथा में मुख्य यजमान स्नेहलता, नरेंद्र सिंह चौहान रहीं, जबकि पूजन पंडित विनोद शास्त्री ने कराया। कथा में विजय शंकर सिंह, विवेक सिंह, डा. चंद्रभान सिंह चौहान, संदीप सिंह, सूरत, भगत सिंह, कार्तिक राजा, हरी किशोर नरवरिया, देवेंद्र पाठक, पंकज नायक, राजू रैकवार उपस्थित रहे।
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