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Lalitpur News: लगातार बारिश से उड़द-सोयाबीन की फसल पर संकट

Thu, 03 Sep 2026 12:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 12:24 AM IST
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Urad and soybean crops at risk due to continuous rain.
ललितपुर। जुलाई में बारिश की कमी के बाद अगस्त में हुई लगातार झमाझम बारिश अब किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेत पानी से लबालब हो गए हैं। सबसे अधिक असर उड़द और सोयाबीन की फसल पर दिखाई दे रहा है। फूल आने के समय तेज हवा के साथ हुई बारिश से कई जगह फसलों के फूल झड़ गए हैं, जबकि लंबे समय से खेतों में पानी भरा रहने से पौधों की जड़ें सड़ने लगी हैं। कई स्थानों पर फसलें पीली पड़ रही हैं और कीट व फंगस का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। ऐसे में किसानों को पैदावार में भारी कमी की चिंता सता रही है। किसानों ने प्रशासन से जलभराव वाले खेतों का सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन कराने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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इस बार मानसून की शुरुआत किसानों के लिए राहत भरी नहीं रही। दस जुलाई के बाद रुक-रुककर बारिश हुई, जिससे पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण खरीफ फसलों को लेकर किसान चिंतित थे। जुलाई के अंत और अगस्त में बारिश का सिलसिला तेज हुआ तो खेतों में जरूरत से अधिक पानी भरने लगा। महरौनी, सौजना और अर्जुन खिरिया सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। कहीं उड़द और सोयाबीन के फूल बारिश में झड़ गए तो कहीं लगातार जलभराव से पौधों की जड़ें प्रभावित हो रही हैं। दिनभर बादल छाए रहने और धूप नहीं निकलने से भी फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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फूल आने पर बारिश ने बिगाड़ा फसल का गणित
फोटो --29
महरौनी क्षेत्र में किसानों के मुताबिक बारिश शुरू होने से पहले उड़द और सोयाबीन की फसल अच्छी स्थिति में थी। पौधों में फूल आने लगे थे, लेकिन इसी दौरान तेज हवा के साथ लगातार बारिश होने से अधिकांश फूल झड़ गए। अब पौधों में दो-चार फलियां ही दिखाई दे रही हैं। किसानों ने सोयाबीन का बीज करीब 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल और उड़द का बीज 10 से 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था। ऐसे में उत्पादन घटने पर लागत निकालना भी मुश्किल होने की चिंता किसानों को है।
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खेतों में पानी, सड़ने लगी उड़द की जड़ें
फोटो--32
सौजना क्षेत्र में जलभराव से उड़द की फसल प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार कई खेतों में लगातार पानी भरा रहने से पौधों की जड़ें सड़ने लगी हैं। बारिश के साथ धूप नहीं निकलने से फसल पर रोग और फंगस का खतरा बढ़ गया है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
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पानी में डूबी फसलें, निकासी की व्यवस्था नहीं
फोटो--34
अर्जुन खिरिया क्षेत्र में कई खेतों में लगातार पानी भरा हुआ है। किसानों का कहना है कि खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। लंबे समय तक फसल के पानी में डूबे रहने से उसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कराने की मांग की है।

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पिछले वर्षों में भी अतिवृष्टि से नुकसान
किसानों का कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से कभी कम बारिश तो कभी अतिवृष्टि के कारण खरीफ फसलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि फसल नुकसान के बाद सर्वे तो कराया जाता है लेकिन कई किसानों को समय से मुआवजा नहीं मिल पाता। इस बार भी लगातार बारिश से नुकसान की स्थिति बनने के बाद किसान प्रशासन की ओर देख रहे हैं।
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95 हजार से अधिक किसानों ने कराया फसल बीमा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में खरीफ फसलों का बीमा कराने वाले किसानों की संख्या 95 हजार से अधिक है। इनमें 3,162 गैर ऋणी और 92,395 ऋणी किसान शामिल हैं। लगातार बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बीच किसानों की नजर अब सर्वे और बीमा दावे की प्रक्रिया पर है।
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3.24 लाख हेक्टेयर में बोई गई खरीफ फसल
जिले में इस वर्ष खरीफ फसलों की कुल बोआई 3,24,265 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हुई है। इसमें उड़द की बोआई 1,59,615 हेक्टेयर और सोयाबीन की 37,945 हेक्टेयर में हुई है। मूंगफली 53,987, मक्का 11,643, तिल 7,159 और मूंग 2,359 हेक्टेयर में बोई गई है। ऐसे में लगातार बारिश से बड़े क्षेत्रफल में खरीफ फसलों के प्रभावित होने की आशंका किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
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