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सार्वजनिक कुआ के चारों ओर अतिक्रमण
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:16 AM IST
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सार्वजनिक कुएं अतिक्रमण की चपेट
ललितपुर।
नगर में अतिक्रमण की चपेट में आने से सार्वजनिक कुओं का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। नझाई बाजार स्थित ललित टॉकीज के सामने स्थित सार्वजनिक कुआं पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। यहां तक कि अब उक्त कुएं के चारों ओर पक्का निर्माण कर दुकानें बनाई जा रही है, जिस ओर प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। इस तरह की स्थिति किसी एक स्थान की नहीं है, अन्य पुराने कुएं भी धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
जल संसाधन मंत्रालय द्वारा एक ओर जहां जल स्रोतों के अस्तित्व को बचाने के लिए कई योजनाएं बनाकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच सार्वजनिक पेयजल के प्रमुख स्रोत कुओं का अस्तित्व खतरे में है। शहर के मध्य नझाई बाजार में ललित टॉकीज के पास पुराना सार्वजनिक कुआं बना हुआ है। लेकिन वर्तमान में यह आम लोगों के उपयोग युक्त नहीं रह गया है। आसपास के दुकानदारों द्वारा जहां इस कुएं में कचरा डाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दुकानदारों द्वारा इसके चारों ओर पहले तो टिन-चद्दर की दुकानों का निर्माण कर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया। अतिक्रमण यहीं नहीं रुका, कुछ नामचीन लोगों ने इस कुआं के एक ओर पक्की दुकानों का निर्माण कर लिया और अब वर्तमान में उक्त कुआं दूसरी ओर भी पिलर, लैंटरयुक्त पक्की दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें उक्त सार्वजनिक कुआं का अस्तित्व पूरी तरह से खतरे में आ चुका है। यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र ही उक्त कुआं पर हो रहे अतिक्रमण को स्थायी रूप से नहीं हटाया गया, तो यह कुआं पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों के कब्जे में आ जाएगा और इसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन एसडीएम सदर द्वारा इस कुआं का अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए थे और शहर को अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान भी चलाया था। लेकिन उस समय अतिक्रमण नहीं हट पाने के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद रहे और उक्त कुआं के चारों ओर पहले तो टिन-चद्दर की दो मंजिला दुकानें बनाई गई और अब स्थिति यह है कि अतिक्रमणकारियों द्वारा पिलर-लैंटरयुक्त पक्का निर्माण चल रहा है। ऐसा नहीं है कि शहर में यही कुआं अतिक्रमण की चपेट में हो, शहर में कई अन्य सार्वजनिक कुएं अतिक्रमण की चपेट में है और जिसे जब मौका लगता है, वह कुआं के चारों ओर निर्माण कर अतिक्रमण कर लेना चाहता है। गत महीनों पूर्व शहर के मुख्य स्टेशन रोड पर ही एडीएम आवास के सामने ही बने कुआं का अस्तित्व खत्म करने के लिए पिलर काट लिए गए थे, लेकिन बाद में प्रशासन के हरकत में आने पर उक्त कुआं के पिलर को पूर्व स्थिति में सीमेंटेड कराकर कुआं का अस्तित्व बचाया गया था। इसी प्रकार तालाबपुरा में छतदार कुआं भी अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण करने के प्रयास किया गया। जबकि मुहल्ला नेहरूनगर में बी केस् िके पास स्थित कुएं का अस्तित्व तो शराब की दुकान की भेंट काफी समय पहले ही चढ़ चुका है, जबकि आज भी सरकारी दस्तावेजों में उक्त स्थान पर कुएं का उल्लेख मिलता है। इसके लिए तो यहां के पार्षद द्वारा कई बार उच्च स्तर पर कार्रवाई के लिए भी लिखा गया, लेकिन प्रशासन के ढिलमुल रवैया के चलते अब तक उक्त कुएं के प्रकरण में भी कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
ललित टाकीज के सामने स्थित कुएं पर दुकानें बनने या पक्के निर्माण की जानकारी नहीं है, यदि यहां अवैध निर्माण हो रहा है, तो इसके लिए नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से बात कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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महेश प्रसाद दीक्षित, एसडीएम सदर।
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ललितपुर।
नगर में अतिक्रमण की चपेट में आने से सार्वजनिक कुओं का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। नझाई बाजार स्थित ललित टॉकीज के सामने स्थित सार्वजनिक कुआं पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। यहां तक कि अब उक्त कुएं के चारों ओर पक्का निर्माण कर दुकानें बनाई जा रही है, जिस ओर प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। इस तरह की स्थिति किसी एक स्थान की नहीं है, अन्य पुराने कुएं भी धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
जल संसाधन मंत्रालय द्वारा एक ओर जहां जल स्रोतों के अस्तित्व को बचाने के लिए कई योजनाएं बनाकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच सार्वजनिक पेयजल के प्रमुख स्रोत कुओं का अस्तित्व खतरे में है। शहर के मध्य नझाई बाजार में ललित टॉकीज के पास पुराना सार्वजनिक कुआं बना हुआ है। लेकिन वर्तमान में यह आम लोगों के उपयोग युक्त नहीं रह गया है। आसपास के दुकानदारों द्वारा जहां इस कुएं में कचरा डाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दुकानदारों द्वारा इसके चारों ओर पहले तो टिन-चद्दर की दुकानों का निर्माण कर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया। अतिक्रमण यहीं नहीं रुका, कुछ नामचीन लोगों ने इस कुआं के एक ओर पक्की दुकानों का निर्माण कर लिया और अब वर्तमान में उक्त कुआं दूसरी ओर भी पिलर, लैंटरयुक्त पक्की दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें उक्त सार्वजनिक कुआं का अस्तित्व पूरी तरह से खतरे में आ चुका है। यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र ही उक्त कुआं पर हो रहे अतिक्रमण को स्थायी रूप से नहीं हटाया गया, तो यह कुआं पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों के कब्जे में आ जाएगा और इसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। करीब तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन एसडीएम सदर द्वारा इस कुआं का अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए थे और शहर को अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान भी चलाया था। लेकिन उस समय अतिक्रमण नहीं हट पाने के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद रहे और उक्त कुआं के चारों ओर पहले तो टिन-चद्दर की दो मंजिला दुकानें बनाई गई और अब स्थिति यह है कि अतिक्रमणकारियों द्वारा पिलर-लैंटरयुक्त पक्का निर्माण चल रहा है। ऐसा नहीं है कि शहर में यही कुआं अतिक्रमण की चपेट में हो, शहर में कई अन्य सार्वजनिक कुएं अतिक्रमण की चपेट में है और जिसे जब मौका लगता है, वह कुआं के चारों ओर निर्माण कर अतिक्रमण कर लेना चाहता है। गत महीनों पूर्व शहर के मुख्य स्टेशन रोड पर ही एडीएम आवास के सामने ही बने कुआं का अस्तित्व खत्म करने के लिए पिलर काट लिए गए थे, लेकिन बाद में प्रशासन के हरकत में आने पर उक्त कुआं के पिलर को पूर्व स्थिति में सीमेंटेड कराकर कुआं का अस्तित्व बचाया गया था। इसी प्रकार तालाबपुरा में छतदार कुआं भी अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण करने के प्रयास किया गया। जबकि मुहल्ला नेहरूनगर में बी केस् िके पास स्थित कुएं का अस्तित्व तो शराब की दुकान की भेंट काफी समय पहले ही चढ़ चुका है, जबकि आज भी सरकारी दस्तावेजों में उक्त स्थान पर कुएं का उल्लेख मिलता है। इसके लिए तो यहां के पार्षद द्वारा कई बार उच्च स्तर पर कार्रवाई के लिए भी लिखा गया, लेकिन प्रशासन के ढिलमुल रवैया के चलते अब तक उक्त कुएं के प्रकरण में भी कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
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ललित टाकीज के सामने स्थित कुएं पर दुकानें बनने या पक्के निर्माण की जानकारी नहीं है, यदि यहां अवैध निर्माण हो रहा है, तो इसके लिए नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से बात कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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महेश प्रसाद दीक्षित, एसडीएम सदर।